Monday, July 21, 2014

खुद को खुद से नंगा देख

अपने भीतर गंगा देख
खुद को खुद से नंगा देख

खुशी खुशी तू गम को जी
तब जीवन सबरंगा देख

भारत सोने की चिड़िया?
कदम कदम भिखमंगा देख

शब्दों में भाई भाई
पर आपस में दंगा देख

खुद जी ले, जीने भी दे
सुमन सभी को चंगा देख

5 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (22-07-2014) को "दौड़ने के लिये दौड़ रहा" {चर्चामंच - 1682} पर भी होगी।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

कालीपद प्रसाद said...

विरोधाभास का सुन्दर विवेचन |
कर्मफल |
अनुभूति : वाह !क्या विचार है !

आशीष भाई said...

सुंदर रचना श्यामल भाई धन्यवाद !
Information and solutions in Hindi ( हिंदी में समस्त प्रकार की जानकारियाँ )

Pratibha Verma said...

सुन्दर रचना ...

स्वाति said...

सुन्दर प्रस्तुति ...

हाल की कुछ रचनाओं को नीचे बॉक्स के लिंक को क्लिक कर पढ़ सकते हैं -
विश्व की महान कलाकृतियाँ- पुन: पधारें। नमस्कार!!!