Thursday, September 20, 2018

पीछे दौड़े आते लोग

गीत सभी के अपने अपने अपना राग सुनाते लोग
तकरीरों से खुद को ढककर दूजे को समझाते लोग

सोच किसी के भीतर कैसा क्या बाहर से दिखता है
चेहरे पे मुस्कान ओढ़कर अक्सर क्यूँ भरमाते लोग

जाल बिछाते प्यार का ऐसे ताकि कुछ सहयोग मिले
सीढ़ी सा उपयोग करे फिर तोड़ उसे बढ़ जाते लोग

दुश्मन आसानी से मिलते दोस्तों की पहचान कठिन
दोस्त-वेष में कुछ मिलते जो भीतरघात कराते लोग

फिकर छोड़कर इन बातों की आगे बढ़ते रहो सुमन
खुद की राह बना लो खुद से पीछे दौड़े आते लोग

तू सचमुच एक हिदायत हो

मैंने कब चाहा  है तुझको,
क्यों साथ हमेशा रहती हो।
मैं जितना दूर गया तुझसे,
तू पीछे पीछे चलती हो।।

ना रूप - रंग है पास मेरे,
फिर भी मुझपे तू मरती क्यों।
क्या मिलता है मुझसे, तुझको,
तू प्यार हमेशा करती क्यों।।

तुमसे मैं लड़ना भी चाहा,
पर लड़ते लड़ते हार गया।
है नाव वही, माझी भी वही,
भवसागर में पतवार गया।।

जीवन भर साथ मिला तेरा,
अब तू जीवन की आदत हो।
मैं मनमानी कर ना पाऊँ,
तू सचमुच एक हिदायत हो।।

मैं फक्र से कहता हूँ सबको,
तुझसे ही सुमन, चमन मेरा।
अब हाथ जोड़कर खड़ा प्रिये,
ऐ विपदा! तुझे नमन मेरा।।

Thursday, August 30, 2018

यूँ तो हैं अंगूर खट्टे

आग को पानी बुझा दे पानी में भी आग है
ऐ समन्दर! शोर तेरा पर छुपा इक राग है

क्या बुराई किसमें कितनी कह रहा है हर कोई
कहने वाले कहते अक्सर चाँद में भी दाग है

जो थी पाने की तमन्ना वो अगर ना मिल सका
यूँ तो हैं अंगूर खट्टे, कहने को बैराग है

इस तरह से आमलोगों को छला एक आदमी
फिर बना शासक सभी का कौन सा अनुराग है

आया पतझड़ तो सिखाते डरने की है बात क्या
अब तो बाजारों में मिलते हर सुमन और बाग है 

Sunday, July 29, 2018

तू पत्थर सी मूरत बन जा

कली कभी तू मत घबराना,
बन के सुमन तुझे है आना,
कोई आंसू देख सके ना, तू पत्थर सी मूरत बन जा।
वक्त से ऐसे लड़ते रहना, कल की एक जरूरत बन जा।।

धरती जैसे इस जीवन में सुख दुख घूम रहा है।
संकट में जो आज उसी को कल सुख चूम रहा है।
जीत समय को तू ऐसे कि सबकी प्यारी सूरत बन जा।।
कल की एक जरूरत बन जा, तू पत्थर सी मूरत बन जा।।

सीता का दुख और द्रोपदी अपनी महक लिए है।
जितना भी तपता है सोना उतनी चमक लिए है।
वैसे जूझ, बसो यादों में, सबके लिए मुहुरत बन जा।।
कल की एक जरूरत बन जा। तू पत्थर सी मूरत बन जा।। 

Wednesday, July 25, 2018

बोली जब बचकानी हो

यादें भले पुरानी हो
नूतन रोज कहानी हो

देवराज कोई होगा
इक परियों की रानी हो

छोटे बच्चों के संग में
दादा, दादी, नानी हो

और बुजुर्गों की खातिर
आँखों में भी पानी हो

लगे दूर जाना अच्छा
बेटी जहाँ सयानी हो

लगता है कितना प्यारा
बोली जब बचकानी हो

गम से लड़ते रहने से
चाल सुमन मस्तानी हो
हाल की कुछ रचनाओं को नीचे बॉक्स के लिंक को क्लिक कर पढ़ सकते हैं -
विश्व की महान कलाकृतियाँ- पुन: पधारें। नमस्कार!!!