Wednesday, July 17, 2019

वो हवा के साथ है

देशभक्ति को बढ़ाने की फिजा के साथ है
दीप के जो साथ दिखता वो हवा के साथ है

सिर्फ नारों के सहारे देश किसका, कब चला
मर्ज दिखलाते मगर क्या वो दवा के साथ है?

जिन्दगी का एक मतलब बच सके इन्सानियत
साथ सबके जी सकें क्या इस दुआ के साथ है?

तल्खियों से बात मनवाना गलत है साथियों
प्यार से दिल जीत लेने की कला के साथ है

जो चलन सदियों से अपने देश में है चल रहा
हर सुमन उसको बचाने की वफा के साथ है

बीज नया तू बोने दो

मेरे दिल पर राज करो
कल करना सो आज करो
यूँ बतियाना आँखों से
बिन बोले आवाज करो

जिसको कोई काम नहीं
समझ उसे आराम नहीं
राम नाम जपते अक्सर
उसके दिल में राम नहीं

जीने खातिर धंधा दो
रोने खातिर कंधा दो
जो विरोध में कुछ माँगे
कि कानून भी अंधा दो

रोटी दोनों वक्त मिले
ना कोमल तो सख्त मिले
अधिकारी सेवक अपना
अक्सर वो कमबख़्त मिले

जो होता है होने दो
बीज नया तू बोने दो
खोना, पाना रोज सुमन
सोना छोड़ो, सोने दो 

Wednesday, July 10, 2019

खोल पंख फिर उड़ो गगन में

अपना अपना सपना देखो
उन सपनों में अपना देखो
तुझे सजन मिलना मुमकिन तब
सदा खोज तू उसे स्वजन में
खोल पंख फिर उड़ो गगन में

अपने अपने फर्ज हमारे
फर्ज सभी हैं कर्ज हमारे
खोजो साथी अपने जैसा
वरना जलते रहो अगन में
खोल पंख फिर उड़ो गगन में

जैसा जीते वैसा लिखना
जो अन्दर तुम बाहर दिखना
भला जगत का कैसे संभव
वक्त गुजारो सदा मनन में
खोल पंख फिर उड़ो गगन में

जीवन काल हमारा छोटा
वक्त कभी ना करना खोटा
जनम सुमन का इस माटी से
खोना फिर से इसी वतन में
खोल पंख फिर उड़ो गगन में 

Saturday, June 29, 2019

इस माटी पर सबका हक है

ये बात यकीनन बेशक है
इस माटी पर सबका हक है

हम साथ रहे हैं सदियों से
फिर आपस में क्यों बकझक है?

लड़ते जब हम सब तब देखो
क्या खूब सियासत रौनक है

जीने दो हम भी इन्सां हैं
क्या इसमें भी कोई शक है?

जय श्री राम दिया जीवन जो
अब दिल सुन करता धकधक है

जो उन्मादी धरम नाम पर
वैसा देश चला कब तक है?

सुमन बचा ले मानवता को
फिर सबकी दुनिया चकचक है 

मिला तुझे कब ठाँव मुसाफिर

कभी शहर फिर गाँव मुसाफिर
रुकना मुश्किल पाँव मुसाफिर
लाख भटक लो यहाँ वहाँ तुम
मिला तुझे कब ठाँव मुसाफिर

          कोमल धरती छोड़ मुसाफिर
          लौहनगर से जोड़ मुसाफिर
          गाँव, शहर के इस बन्धन को
          क्या पाओगे तोड़ मुसाफिर

बदले भाव, प्रभाव मुसाफिर
ना बदले सद्भाव मुसाफिर
पर ना बदला अभी गाँव में
लोगों बीच अभाव मुसाफिर

          सुख सुविधा कमजोर मुसाफिर
          प्यार मिला घनघोर मुसाफिर
          दूर गाँव है कोलाहल से
          मगर शहर में शोर मुसाफिर

गड़बड़ है कुछ ठाँव मुसाफिर
चलते छलिया दाँव मुसाफिर
मगर अधिक गाँवों में अब भी
मिले दिलों को छाँव मुसाफिर

          सीधे साधे लोग मुसाफिर
          ना ठगने का रोग मुसाफिर
          यज्ञ किसी का अगर गाँव में
          लोग करे सहयोग मुसाफिर

उपले के हैं चित्र मुसाफिर
है दीवार विचित्र मुसाफिर
सुमन गाँव में साफ दिलों से
सभी, सभी के मित्र मुसाफिर
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