Saturday, June 23, 2018

क्या बिटिया की लाज अलग है?

एक भाव मुमकिन गीतों में कहने का अंदाज़ अलग है
कल कैसा था क्या कल होगा इन बातों से आज अलग है

अक्सर बिकते आज कलम भी कीमत भले अलग होती है
जिसे दाम ज्यादा मिल जाता तब उसकी आवाज अलग है

अगर किसी की लुटती अस्मत चर्चाएं उसके मजहब की
हिन्दू ,मुस्लिम मत समझाओ क्या बिटिया की लाज अलग है

बार बार बदले हैं शासक क्या शासन भी बदल सका है
गौर से देखो तो लगता है राज एक पर साज अलग है

हिम्मत सच लिखने की है तो लिखने का हक प्यारे तुझको
राग सुमन दरबारी लिखकर मिलनेवाला ताज अलग है

Thursday, June 14, 2018

मौत मंजिल है जीवन सफर हो गया

प्यार करने का ऐसा असर हो गया
बाखबर पहले था बेखबर हो गया

प्यार सबके दिलों में तो दुनिया बसी
जो असल में इधर से उधर हो गया

रूठने और मनाने के दिन खो गए
आपसी रिश्ता मानो जहर हो गया

मौत है बावफा, जिन्दगी बेवफा
मौत मंजिल है जीवन सफर हो गया

काम से नाम में खुशबू आती सुमन
सबके दिल यूँ बसे जैसे घर हो गया

Saturday, June 2, 2018

बस प्यार एक सौगात यहाँ

ये जीवन इक बहती धारा, नित सीख नया दे जाती है।
फिर जीने खातिर चुन चुनके, कुछ खुशियाँ भी ले आती है।।
ये जीवन -----

हम जान रहे सबसे ज्यादा, हर उमर में बोध हुआ इतना,
पीछे मुड़ के जब देखा तो, इस भरम पे क्रोध हुआ कितना,
फिर भी हम सीख कहाँ पाए, ये सीख हमें सिखलाती है।
ये जीवन -----

धोखे ही अक्सर मिलते हैं, पर मिलता सच्चा संत नहीं,
जीवन भर चुनते सच्चे को, इस सीख का कोई अंत नहीं,
अनुभव मिलता है ठोकर से, ठोकर ही राह बताती है।
ये जीवन -----

दौलत, शोहरत की लालच में, हम भटक रहे दिन रात यहाँ,
ये दुनिया प्यार की थाती है, बस प्यार एक सौगात यहाँ,
फिर लड़ते क्यों आपस में सुमन, हम सबको पाठ पढ़ाती है।
ये जीवन -----

मुमकिन है तुरपाई

बादल फटते, दूध भी फटता, मुश्किल है भरपाई।
फटते जब कपड़े या रिश्ते, मुमकिन है तुरपाई।
सीख लो मेरे भाई।
सीख ले तू भी ताई।।

जीवन है अनमोल खजाना, चतुराई से इसे बिताना।
कोई गम को खोज के रोता, गाता कोई सदा तराना।
ठान लिया जो उसे बुढ़ापे में आती तरुणाई।
सीख ले -----

आनेवाले कल की खातिर क्या क्या जोड़ रहे हैं?
इस कारण से पल कोमल जो उसको छोड़ रहे हैं।
छूटा घर आँगन भी अपना, करते रहे कमाई।
सीख ले -----

साँसें जब टूटेगी, टूटे, हमको जीना होगा।
हँसते हँसते जहर गमों का हमको पीना होगा।
यकीं सुमन को बजेगी यारो आँगन में शहनाई।
सीख ले -----

Sunday, May 20, 2018

पानी हूँ मुझको अपना ले

अपने जैसा मुझे बना ले
पानी हूँ मुझको अपना ले

दुनिया सजती अपनेपन से
रूठे अपने, उसे मना ले

हीरे, मोती भी पत्थर हैं
सदा प्यार का ही गहना ले

इक अनाज को हो चुनना तो
छोड़ सभी को सिर्फ चना ले

देख कसाई खुद को कैसे
राम नाम चोला पहना ले

हार मिलेगा सीख हार से
समझ हार को नहीं फना ले

लिखना है तो पढ़ो सुमन तू
दूजे की अच्छी रचना ले 
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