Monday, March 16, 2020

क्या क्या खेल दिखाती कुर्सी

सबके मन को भाती कुर्सी
क्या क्या खेल दिखाती कुर्सी

अपने बनते झट बेगाने
जहां बीच में आती कुर्सी

किस्सा कुर्सी का दशकों से
जब तब रोज सुनाती कुर्सी

नैतिकता के प्रहरी को भी
बार बार अजमाती कुर्सी

जहां खड़े थे तन के आगे
फिर से वहीं झुकाती कुर्सी

समय लिखेगा सारी बातें
जिसको भी बहकाती कुर्सी

छोड़ सुमन लालच, फटकारो
जब जब ये इठलाती कुर्सी

कौन सुनेगा अर्ज सभी के

दर्द सभी के, मर्ज सभी के
अपने-अपने तर्ज सभी के

करने को मिहनत सब करते
क्यों सर पे है कर्ज सभी के

डूब रहा बैंकों में पैसा
कौन सुनेगा अर्ज सभी के

शासक की इक गलत नीति से
कितने होते हर्ज सभी के

समझाते हैं सभी सुमन को
देखो मत क्या फर्ज सभी के

होली का मौसम उदास है

हर ॠतुओं का मजा खास है
होली का मौसम उदास है

है विकास का शोर बहुत पर
आया क्या सचमुच विकास है

खेल आंकड़ों का दिखलाना
ये विकास का बस कयास है

देश वही बढ़ता है आगे
अमन-चैन का जहां वास है

डर में कुछ तो कहीं हताशा
साहिब के घर मचा रास है

लाखों गांव - घरों में देखो
अंधियारा करता निवास है

करो सुमन जो काम तुम्हारा
फिर तो जीवन में सुवास है

चुपके चुपके नैन

फागुन में अक्सर प्रिये, तब तब दिल को चैन।
प्रियतम से जब जब मिले, चुपके चुपके नैन।।

मस्त पवन के संग में, रंग भरे जज़्बात।
बाहर भी तन भींगता, कमरे में बरसात।।

अंग अंग में रंग से, दिल में प्रेम प्रसंग।
होते तंग अनंग से, जब जब जगे तरंग।।

कंत विरह की वेदना, मन में दुख अनन्त।
आस लगाए अंत तक, जबतक ॠतु वसन्त।।

होली को समझें नहीं, सुमन रंग का खेल।
रंगों सा इन्सान में, हो आपस में मेल।।

तू जुल्फों में लगा देना

जगह मेरी तेरे दिल में उसे दिल में दबा देना
मेरी यादें सभी चुपके से आँसू में बहा देना

मुहब्बत के सभी किस्से मजे लेकर के सुनते जो
हँसी को ओढ़ कुछ यूं कि उम्मीदों को जगा  देना

किसी का दिल जहाँ टूटा वो अश्कों में नहा लेते
तू बारिश में नहाकर के वो आँसू भी छुपा देना

समय का फेर ऐसा है कि हम तुम मिल नहीं पाए
मगर अगले जनम में ऐ खुदा हमको मिला देना

नहीं मुमकिन कोई बाँधे मुहब्बत और खुशबू को
सुमन टूटे जो शाखों से तू जुल्फों में लगा देना 
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