Thursday, June 14, 2018

मौत मंजिल है जीवन सफर हो गया

प्यार करने का ऐसा असर हो गया
बाखबर पहले था बेखबर हो गया

प्यार सबके दिलों में तो दुनिया बसी
जो असल में इधर से उधर हो गया

रूठने और मनाने के दिन खो गए
आपसी रिश्ता मानो जहर हो गया

मौत है बावफा, जिन्दगी बेवफा
मौत मंजिल है जीवन सफर हो गया

काम से नाम में खुशबू आती सुमन
सबके दिल यूँ बसे जैसे घर हो गया

Saturday, June 2, 2018

बस प्यार एक सौगात यहाँ

ये जीवन इक बहती धारा, नित सीख नया दे जाती है।
फिर जीने खातिर चुन चुनके, कुछ खुशियाँ भी ले आती है।।
ये जीवन -----

हम जान रहे सबसे ज्यादा, हर उमर में बोध हुआ इतना,
पीछे मुड़ के जब देखा तो, इस भरम पे क्रोध हुआ कितना,
फिर भी हम सीख कहाँ पाए, ये सीख हमें सिखलाती है।
ये जीवन -----

धोखे ही अक्सर मिलते हैं, पर मिलता सच्चा संत नहीं,
जीवन भर चुनते सच्चे को, इस सीख का कोई अंत नहीं,
अनुभव मिलता है ठोकर से, ठोकर ही राह बताती है।
ये जीवन -----

दौलत, शोहरत की लालच में, हम भटक रहे दिन रात यहाँ,
ये दुनिया प्यार की थाती है, बस प्यार एक सौगात यहाँ,
फिर लड़ते क्यों आपस में सुमन, हम सबको पाठ पढ़ाती है।
ये जीवन -----

मुमकिन है तुरपाई

बादल फटते, दूध भी फटता, मुश्किल है भरपाई।
फटते जब कपड़े या रिश्ते, मुमकिन है तुरपाई।
सीख लो मेरे भाई।
सीख ले तू भी ताई।।

जीवन है अनमोल खजाना, चतुराई से इसे बिताना।
कोई गम को खोज के रोता, गाता कोई सदा तराना।
ठान लिया जो उसे बुढ़ापे में आती तरुणाई।
सीख ले -----

आनेवाले कल की खातिर क्या क्या जोड़ रहे हैं?
इस कारण से पल कोमल जो उसको छोड़ रहे हैं।
छूटा घर आँगन भी अपना, करते रहे कमाई।
सीख ले -----

साँसें जब टूटेगी, टूटे, हमको जीना होगा।
हँसते हँसते जहर गमों का हमको पीना होगा।
यकीं सुमन को बजेगी यारो आँगन में शहनाई।
सीख ले -----

Sunday, May 20, 2018

पानी हूँ मुझको अपना ले

अपने जैसा मुझे बना ले
पानी हूँ मुझको अपना ले

दुनिया सजती अपनेपन से
रूठे अपने, उसे मना ले

हीरे, मोती भी पत्थर हैं
सदा प्यार का ही गहना ले

इक अनाज को हो चुनना तो
छोड़ सभी को सिर्फ चना ले

देख कसाई खुद को कैसे
राम नाम चोला पहना ले

हार मिलेगा सीख हार से
समझ हार को नहीं फना ले

लिखना है तो पढ़ो सुमन तू
दूजे की अच्छी रचना ले 

अपने में मस्त है

होता उदय कहीं पे और कहीं अस्त है।
यारो अजब दुनिया, अपने में मस्त है।।

कोई आता है तो कोई जाता है
क्या पता कौन किसको भाता है
पर हर किसी का हर किसी से,
कुछ ना कुछ तो नाता है।
सब एक दूसरे को समझाता है,
पर कुछ उसमें भरमाता है।
मुस्कान भरे चेहरे भी भीतर से त्रस्त है।
यारो अजब दुनिया, अपने में मस्त है।।

किसी का निशाना है किसी की निशानी है,
सबका जीवन अपने आप में इक कहानी है,
किसी का बुढ़ापा तो किसी की जवानी है,
आँखों में समन्दर है पर वहाँ नहीं पानी है।
कोई खुश दिखता तो कोई दिखे पस्त है।
यारो अजब दुनिया, अपने में मस्त है।।

बाहर बुराई है, मुझमें अच्छाई है,
सोच लो भले ऐसा उल्टी सच्चाई है,
करना भला किसी का अपनी भलाई है,
बोली है प्रीत की फिर भी लड़ाई है,
एक हाथ नीम लिए दूजे मिठाई है,
पागल सुमन यही सोचने में व्यस्त है।
यारो अजब दुनिया, अपने में मस्त है।।
हाल की कुछ रचनाओं को नीचे बॉक्स के लिंक को क्लिक कर पढ़ सकते हैं -
विश्व की महान कलाकृतियाँ- पुन: पधारें। नमस्कार!!!