Sunday, April 3, 2022

दो कौड़ी के

ये  जयकारे  दो  कौड़ी के
शोर  तुम्हारे  दो  कौड़ी के

स्वप्न सुनहरे दिखलाया पर
खुले  पिटारे  दो  कौड़ी के

आमजनों के जख्म ढँके हैं
जहाँ  उघारे  दो  कौड़ी  के

जब लोगों का भ्रम टूटा तो 
तुझे  पुकारे  दो  कौड़ी  के

बलजोरी गुणगान कराकर
बने  सितारे  दो  कौड़ी  के

अवसर आया करो नेक तू
हुए  नकारे  दो   कौड़ी  के

सुमन सुधारो अपने को या 
बन  जा  प्यारे दो कौड़ी के

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