होली तो अब सामने, खेलेंगे सब रंग।
मँहगाई ऐसी बढ़ी, फीकी हुई उमंग।।
पैसा निकले हाथ से, ज्यों मुट्ठी से रेत।
रंग दिखे ना आस की, सूखे हैं सब खेत।।
एक रंग आतंक का, दूजा भ्रष्टाचार।
सभी सुरक्षा संग ले, चलती है सरकार।।
मौसम संग इन्सान का, बदला खूब स्वभाव।
है वसंत पतझड़ भरा, आदम हृदय न भाव।।
बना मीडिया आजकल, बहुत बड़ा व्यापार।
खबरों के कम रंग हैं, विज्ञापन भरमार।।
रंग सुमन का उड़ गया, देख देश का हाल।
जनता क्यों कंगाल है, नेता मालामाल।।
मँहगाई ऐसी बढ़ी, फीकी हुई उमंग।।
पैसा निकले हाथ से, ज्यों मुट्ठी से रेत।
रंग दिखे ना आस की, सूखे हैं सब खेत।।
एक रंग आतंक का, दूजा भ्रष्टाचार।
सभी सुरक्षा संग ले, चलती है सरकार।।
मौसम संग इन्सान का, बदला खूब स्वभाव।
है वसंत पतझड़ भरा, आदम हृदय न भाव।।
बना मीडिया आजकल, बहुत बड़ा व्यापार।
खबरों के कम रंग हैं, विज्ञापन भरमार।।
रंग सुमन का उड़ गया, देख देश का हाल।
जनता क्यों कंगाल है, नेता मालामाल।।
बहुत बढ़िया लगे सामयिक दोहे.. होली की शुभकामनायें
ReplyDeleteहोली तो अब सामने खेलेंगे सब रंग।
ReplyDeleteमँहगाई ऐसी बढ़ी फीका हुआ उमंग।।
पैसा निकले हाथ से ज्यों मुट्ठी से रेत।
रंग दिखे ना आस की सूखे हैं सब खेत।।
behtreen laine.aabhar.
बहुत अच्छे लगे सभी दोहे । होली की शुभकामनायें
ReplyDeleteएसी होली हो, तो हो ली होली :)
ReplyDeleteवाह स्यामल जी,
ReplyDeleteजोरदार दोहों ने दुह दिया सबको,
होली की शुभकामनाएं
खेलकर फ़ोटो आर्कुट पे लगाएं
आभार
होली के बेहतरीन दोहे!!
ReplyDeleteबहुत सही लिखे हैं सभी दोहे।
ReplyDeleteहोली की शुभकामनायें।
सभी दोहे बहुत अच्छॆ लगे.
ReplyDeleteधन्यवाद
होली के दोहों से आपने दिखाया कमाल
ReplyDeleteतरह तरह के रंग बेचकर नेता हुए मालामाल,
हुए नेता मालामाल आपने बताया,
बस ये तो आम आदमी ही है हर कदम पर फरेब खाया हुआ ....
happy holi 2 you....
Bahut acche aur sarthak dohe hai....Aapko bahut dhanywaad!
ReplyDeleteHoli ki shubhakaamnae!!
रगों के समसामयिक सन्दर्भ
ReplyDeleteअत्यंत सुन्दर
होली की शुभकामनाएँ!
ReplyDeleteबढ़िया सामयिक दोहे ....
ReplyDeleteपर अगली पोस्ट कुछ मस्ती से भरी होनी चाहिए ...अब तो खुमार चढ चुका है जी ...
जबरदस्त, होली की शुभकामनायें !
ReplyDeleteHolee kee anek shubhkamnayen!
ReplyDeleteस्यामल
ReplyDeleteजिंदा रह
अरे तने यूं के लिख दिया होली के दीन्
यूं तो बोत बडी बात है से
पीसा निक्डे हाथ से जों मुठ्ठी मा रेत
रंग न दीखे आसां के सूखे हैं सब खेत
एक बातां नू मने समझ ने आयी
नेताओं को बैल की जगह जोत के हल चल्वावो
रेत के टोकरे भी उठ्वावो
फिर देखो खेतों की हरियाली
रेत के स्थान पर मुठ्ठी में अन्न होगा
सभी ओर होगी प्रसन्नता खुशियाली
दर-वट जमाना कट
सभी पढ़ कर सोचेगे
क्या लिख दिया दादी ने अब
sabhi dohe soye huyon ko jagrit karne ke liye kafi hain basharte un par asar ho............ek se badhkar ek hain.
ReplyDeleteHOLI KI HARDIK SHUBHKAMNAYEIN.
बहुत अच्छे लगे सभी दोहे । होली की शुभकामनायें
ReplyDeleteआज तो कुछ अलग सा मिला आपसे ! होली और मिलाद उन नबी की शुभकामनायें
ReplyDeleteमिला प्यार मुझको बहुत जगा हृदय का भाव।
ReplyDeleteहोली की शुभकामना हो रंगीन प्रभाव।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
बहुत बेहतरीन दोहे.
ReplyDeleteआपको होली पर्व की घणी रामराम.
रामराम
excellent ji.
ReplyDeletethanks.
WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM
पैसा निकले हाथ से ज्यों मुट्ठी से रेत।
ReplyDeleteरंग दिखे ना आस की सूखे हैं सब खेत।।
Aaj desh ke kisano ka yahi haal hai...apne sachhai ka warnan kiya hai...par kitni achhi tarah.
रंग सुमन का उड़ गया देख देश का हाल।
ReplyDeleteजनता सब कंगाल है नेता मालामाल।।
वाह वाह ।