मनोरमा
Thursday, July 10, 2025

खुशी या गम के मिलेंगे आँसू

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नजर झुकाना या फिर उठाना, नजर मिलाना लगा हुआ है मिली  मुहब्बत  में जो निशानी, वहीं निशाना लगा हुआ है भले  हो  मेरा  या  घर तुम्हारा, सभी घरों...
1 comment:
Tuesday, July 1, 2025

जब कालचक्र घूमे तो

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ये सबको  है  एहसास, डरे वो भीतर से। पर मन से जो बदमाश, डरे वो भीतर से।। जीवन जीने का सपना, सुख-दुख है सबका अपना।  सुख  की  चर्चा  से दूरी, ब...

नारंगी इमर्जेन्सी

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साधो! सब राजा इक संगी।  कभी इमर्जेन्सी जो काली, अभी हुई नारंगी।। साधो! सब राजा ----- लोक-लुभावन शब्द गढ़े नित, राजा एक दशक से।  सबके सब  झूठ...
Monday, June 23, 2025

दुनिया कुछ सनकी के कारण

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बिगड़  रहा है विश्व-समाज,  कुछ शासक हैं जुमलेबाज,  कौन  देश  है  किसका  साथी, खबरों  में यह शोर है। दुनिया  कुछ सनकी के कारण, विश्वयुद्ध की ...

योग जरूरी मीत

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योग  जरूरी   रोज  है,  इक   दिन  करे  प्रचार। इक   योगी   शासन   करे,  एक   करे  व्यापार।। योगी - जन  मिलते  कहाँ,  कपड़े  पर  विश्वास। कुछ ...
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अपने बारे में -

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श्यामल सुमन
जमशेदपुर, झारखण्ड (भारत), India
क्या कहूँ अपने से अपने ही बारे में? इस प्रतियोगी युग में जीने के लिए लगातार कार्यरत एक जीवित-यंत्र, जिसे सामान्य भाषा में आदमी कहा जाता है और जो इसी आपाधापी से कुछ वक्त चुराकर अपने भोगे हुए यथार्थ की अनुभूतियों को समेट, शब्द-ब्रह्म की उपासना में विनम्रता से तल्लीन है - बस इतना ही।
शिक्षा - एम० ए० (अर्थशास्त्र)
तकनीकी शिक्षा - विद्युत अभियंत्रण मे डिप्लोमा
सम्प्रति - प्रशासनिक पदाधिकारी टाटा स्टील, जमशेदपुर
रुचि के विषय : नैतिक-मानवीय मूल्य एवं सम्वेदना
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