Sunday, April 5, 2009

पहलू

मुस्कुरा के हाल कहता पर कहानी और है
जिन्दगी के फलसफे की तर्जुमानी और है

जिन्दगी कहते हैं बचपन से बुढ़ापे का सफर
लुत्फ तो हर दौर का है पर जवानी और है

हौसला टूटे कभी न स्वप्न भी देखो नया
जिन्दगी है इक हकीकत जिन्दगानी और है

ख्वाब से हटकर हकीकत की जमीं पर आओ भी
दर्द से जज्बात बनते फिर रवानी और है

जब सुमन को है जरूरत बागबां के प्यार की
मिल गया तो सच में उसकी मेहरबानी और है

17 comments:

परमजीत बाली said...

रचना बहुत सुन्दर है।बधाई स्वीकारें। लेकिन बहुत महँगी पड़ी है यह रचना आपको।जानकर अफसोस हुआ।

दिगम्बर नासवा said...

श्यामल ji
आपकी महँगी ग़ज़ल के शेर vakai 6 hazaar से ज्यादा vajni हैं
सुन्दर रचना है

संगीता पुरी said...

आपके नुकसान को जानकर तकलीफ हुई ... पर गजल बहुत अच्‍छी बनी है ... बधाई दूं या अफसोस जाहिर करूं।

लवली कुमारी / Lovely kumari said...

nuksan ka jankar afsos huaa.sundar rachna likhi ..sachmuch mulyawaan.

SWAPN said...

हौंसला टूटे कभी न स्वप्न भी देखो नया।
जिन्दगी है इक हकीकत जिन्दगानी और है।।

ख्वाब से हँटकर हकीकत की जमीं पर आओ भी।
दर्द से जज्बात बनते फिर रवानी और है।।

gazal ke liye to wah wah hi nikalti hai,bahut khoob sher ek se badhkar ek.hamari nazar men to ye anmol hain. nuksan ke liye dukh hua.

हिमांशु पाण्डेय said...

हौंसला टूटे कभी न स्वप्न भी देखो नया।
जिन्दगी है इक हकीकत जिन्दगानी और है।।

bahut khoob

Kaotuka said...

Tees hajaree court suna tha..aaj tees hajaree rachna padh lee.

Sundar.

Prem Farrukhabadi said...

nuksaan ka dard sah gaye.
dard mein bhi kavita kah gaye.
chor ko kosh kar khud ko masos kar
fir bhi aap apne aap mein rah gaye.

badhai ho rachna ke liye.

श्यामल सुमन said...

आप सबको मेरा हार्दिक आभार। आपकी टिप्पणियाँ मेरे कलम की उर्जा है।

प्रेम भाई के लिए कहना चाहूँगा कि-

आपकी त्वरित पँक्तियों को पढ़कर।
भावनाओं में बिल्कुल हम बह गए।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

Abhivyakti said...

bhut acchi rachna

sidheshwer said...

इतने मँहगे शेर देखे आज पहली बार हम ,
उम्दा है यह ठौर और इसकी कहानी और है !

"मुकुल:प्रस्तोता:बावरे फकीरा " said...

Ati Sundar

सतीश चंद्र सत्यार्थी said...

इतनी मंहगी रचना प्रस्तुत करने के लिए धन्यवाद.

mukti said...

मेरे ब्लॉग पर टिप्पणी लिखने के लिए धन्यवाद .आपकी ग़ज़ल बहुत अच्छी लगी .

dr.bhoopendra singh said...

बहुत सुंदर बंधू ,कवि इसी लिए रचनाकार है क्योंकि वह व्यक्तिगत हानि को गंभीर रचना में badal देता है
मेरी हार्दिक शुभकामनायें
सादर डॉ.भूपेन्द्र

vandana said...

aapki gazal ka har sher lajawab hai .
dukh hua jankar ki itna nuksan ho gaya.

लक्ष्मी नारायण लहरे "साहिल " said...

भाव भरी रचना हार्दिक बधाई ... जय हो

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