ज्ञान का दीप जलाना मुश्किल,
पेट की आग बुझाना मुश्किल।
सर झुकाते रहे हैं बर्षों से,
शान से सर भी उठाना मुश्किल।
जगी नव-चेतना जो रंग नया लायेगी।
तीरगी से ही सही रश्मि निकल आयेगी।।
किसने अस्मत हमारी है लूटी,
हमारी मिल्लतें कहाँ टूटी?
मिला स्वराज सिर्फ कहने को,
अबतलक दासता नहीं छूटी।
करेंगे कोशिशें जो मुश्किलें हँटायेगी।
तीरगी से ही सही रश्मि निकल आयेगी।।
हमारी सोच में ही अनबन है,
बिना सूकून के क्या जीवन है?
अलग है वर्ण और बोली भी,
कई सुमन हैं एक उपवन है।
हमारी एकता ही रास्ता बनायेगी
तीरगी से ही सही रश्मि निकल आयेगी।।
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23 comments:
हमारी एकता ही रास्ता बनायेगी
तीरगी से ही सही रशमि निकल आयेगी।।
बहुत अच्छी रचना सच कहा आपने आशा ही जीवन है!
हमारी एकता ही रास्ता बनायेगी
तीरगी से ही सही रशमि निकल आयेगी।।
जी हाँ! एकमात्र रास्ता तो एकता से ही होकर जाती है.
बहुत खूबसूरत भाव और प्रेरक रचना
हमारी एकता ही रास्ता बनायेगी ...
सही लिखा है | सुन्दर रचना |
किसने अस्मत हमारी है लूटी,
हमारी मिल्लतें कहाँ टूटी?
मिला स्वराज सिर्फ कहने को,
अबतलक दासता नहीं छूटी।
सुन्दर रचना। बधाई
जगी नव-चेतना जो रंग नया लायेगी।
तीरगी से ही सही रशमि निकल आयेगी।
कितनी सार्थक और सुन्दर बात कही है आशा है तो सब कुछ है सकारात्मक सोच के लिये प्रेरित करती बेहतरीन रचना आभार्
bahut khoob
ज्ञान का दीप जलाना मुश्किल,
पेट की आग बुझाना मुश्किल।
सर झुकाते रहे हैं बर्षों से,
शान से सर भी उठाना मुश्किल।
जगी नव-चेतना जो रंग नया लायेगी।
तीरगी से ही सही रशमि निकल आयेगी।।
सुन्दर भावों से सजी-सँवरी कविता के लिए बधाई।
"हमारी एकता ही रास्ता बनायेगी
तीरगी से ही सही रशमि निकल आयेगी।।"
इन पंक्तियों ने खासा प्रभावित किया । आभार ।
अत्यन्त सुंदर भाव और अभिव्यक्ति के साथ लिखी हुई आपकी ये रचना बहत अच्छी लगी!
आज के दिन की शुरूआत इस उर्जावान रचना से. बहुत खूब सर
atyant sundar bhav.
अंतिम पद में सार |हमारी सोच में ही अनवन है ,उपवन एक है मगर सुमन अनेक है ,कविता भी पूरी रचनाकार का तखल्लुस भी और एकता की बात भी |अति उत्तम
सुन्दर रचना। बधाई
bahut bole toh bahut hi badhiya hai ji.............
anand aa gaya........
badhaai !
सही विचार जी। विशेषत: मेरे नाम से ही प्रारम्भ!
प्रेरक रचना...आभार.
गुलमोहर का फूल
ऊर्जा एवं प्रेरणा से परिपूर्ण आपकी यह रचना,
जिसके मूल में है सबके हित की संकल्पना.......
साभार
हमसफ़र यादों का.......
आप सबके स्नेह समर्थन का आभारी हूँ।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com
एकता से ही हम अपने वर्चस्व को एक नयी पहचान दे सकते है..
आत्मविश्वास बढ़ाने वाली कविता...
kamaal hai suman ji... ye sach hai.. achha hai...
अच्छी रचना, एक गुजारिश है श्यामल जी, वर्तनी की अशुद्धियां न करें!
मिथिलेश जी - धन्यवाद। रशमि को मैंने रश्मि कर दिया है। दरअसल "की बोर्ड" पर संयुक्ताक्षर के लिए प्रयोग में आनेवाले "की" कुछ ठीक से काम नहीं कर रहा है। अतः यह गलत टाइप हो गया। फिर भी गलती को ओर इशारा करने के लिए आभारी हूँ।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com
ज्ञान का दीप जलाना मुश्किल,
पेट की आग बुझाना मुश्किल।
सर झुकाते रहे हैं बर्षों से,
शान से सर भी उठाना मुश्किल।
sahi vichar prakat karti hui kavita..
bhaiya..bahut hi saarthak, sajeev aur sateek...
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