Saturday, November 28, 2009

नारी बिन सूना जगत

मँहगाई की क्या कहें, है प्रत्यक्ष प्रमाण।
दीन सभी मर जायेंगे, जारी है अभियान।।

नारी बिन सूना जगत, वह जीवन आधार।
भाव-सृजन, ममता लिए, नारी से संसार।।

भाव-हृदय जैसा रहे, वैसा लिखना फर्ज।
और आचरण हो वही, इसमें है क्या हर्ज।।

कट जायेंगे पेड़ जब, क्या तब होगा हाल।
अभी प्रदूषण इस कदर, जगत बहुत बेहाल।।

नदी कहें नाला कहें, पर यमुना को आस।
मुझे बचा ले देश में, बनने से इतिहास।।

सबकी चाहत है यही, पास रहे कुछ शेष।
जो पाते संघर्ष से, उसके अर्थ विशेष।।

जीवन तो बस प्यार है, प्यार भरा संसार।
सांसारिक इस प्यार में, करे लोग व्यापार।।

सतरंगी दुनिया सदा, अपना रंग पहचान।
और सादगी के बिना, नहीं सुमन इन्सान।।

33 comments:

श्रीश पाठक 'प्रखर' said...

दोहों को दुहरा रहा, लेकर यही आस |
कविताई बढ़ती रहे, स्वर हो जाएँ ख़ास ||

Babli said...

आपने बहुत ही शानदार और ज़बरदस्त रचना लिखा है! हर एक पंक्तियाँ सच्चाई बयान करती हैं! बधाई!

अनिल कान्त : said...

दोहे पढ़कर आनंद की प्राप्ति हुई

चंदन कुमार झा said...

बहुत ही सुन्दर दोहे………………………………

वन्दना said...

sabhi dohe ek se badhkar ek hain........badhayi

ज्ञानदत्त G.D. Pandey said...

नदी कहें नाला कहें पर यमुना को आस।
बचा ले मुझको देश में बनने से इतिहास।।

---------
यम की बहिन यम को प्राप्त होने जा रही है। :(

अजय कुमार said...

सार्थक बातें कहते दोहे

काजल कुमार Kajal Kumar said...

वाह सुंदर अनुभूति

Apanatva said...

sabhee dohe sach ko ujagar karate hue dil par chap chodate hai. badhai.

M VERMA said...

सबकी चाहत है यही पास रहे कुछ शेष।
पाने का संघर्ष है लेकिन चाह अशेष।।
बहुत ही अर्थवान दोहे

योगेश स्वप्न said...

sabhi dohe samyik, aur lajawaab.

हरकीरत ' हीर' said...

'' deen सभी मर jayenge है jari abhiyaan ''......sahi kahaa आपने mnhgai तो yahi darshati है .....!!

राज भाटिय़ा said...

नदी कहें नाला कहें पर यमुना को आस।
बचा ले मुझको देश में बनने से इतिहास।।
भई बहुत सुंदर दोहे कहे आप ने,
धन्यवाद

Udan Tashtari said...

शानदार दोहे सभी!!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

दोहे लिखने में आप निपुण है!
बधाई!

डॉ टी एस दराल said...

बहुत सुंदर दोहे लिखे हैं, श्यामल जी।
बधाई।

निर्झर'नीर said...

कट जायेंगे पेड़ तो होगा तब क्या हाल।
अभी प्रदूषण इस कदर जगत बहुत बेहाल।।

kya baat kahi hai..

bahot khoob

वन्दना अवस्थी दुबे said...

बहुत बढिया दोहे.

चन्द्र कुमार सोनी said...

excellent.

अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी said...

वाह !
दोहों को कितना बढ़िया लिखा गया है !
..................
'' पाने का संघर्ष है लेकिन चाह अशेष '' पढ़ते-पढ़ते
याद आया भर्तृहरि का अमर-वाक्य ............
'' भोग न भुक्ता वयमेव भुक्ता ''
यानी ,,,,,,,,,,,,,,
'' हा ! आयु नाश हो जाती है तृष्णा का नाश नहीं होता ''
...............बधाई......................

निर्मला कपिला said...

suman jee ek se baDHa kar ek hai dohaa ab kaise kahooMM ki yahee acchaa lagaa mujhe to sabhee bahut pasaMd aaye badhaaI

Roshani said...

gajab ki rachna ki hai aapne badhaii....har panktiyon men kuch khas hai.

दीपिका said...

mahngaayi aaj ek aisa sunject hai jispar charcha bahut mahnga hai...

kabhi mere blog par bhi aakar mera maarg-darshan karein.

हरकीरत ' हीर' said...

नदी कहें नाला कहें पर यमुना को आस।
बचा ले मुझको देश में बनने से इतिहास।।

वाह...वाह.....!!

जीवन तो बस प्यार है प्यार भरा संसार।
सांसारिक इस प्यार में करे लोग व्यापार।।

सही कहा जनाब .....!!

सतरंगी दुनिया सदा रंग अपना पहचान।
और सादगी के बिना नहीं सुमन इन्सान।।

बहुत खूब .....!!

ρяєєтι said...

behatarin Dohe ...

रंजना said...

In dohon ko padh jo ek panki dhyaan me aayi usse bahar nikal tippani ko doosre shabd dhoondh paane me saksham hi nahi ho paa rahi hun...wo panktiyan hain.....

"satsaiya ke dohre jyon naavik ke teer....."

Haan ,yahan bas naam bhar badal diya jaaye to ukti shat pratishat yahi lagoo hogee.

गौतम राजरिशी said...

दोहा-गुरू हैं आप तो...

नमन है।

योगेश स्वप्न said...

suman ji, aapki rachna ke liye to comment kar chuka hun aaj vishesh taur par aapko dhanyawaad dena chahta hun,aapka e.mail khoj raha tha , asafal raha, email par hi dhanyawaad dena chahta tha, poochhiye kyun ? isliye ki aap mere blog ki pahli rachna ke tippnikaar hain, aaj mere blog ko ek varsh ho gaya , kal se doosra varsh shuru hoga. is ek varsh men aapke protsahan, aur comments ke liye main aapka hriday se aabhari hun aur aapko tahedil se dhanyawaad deta hun, krapya sneh banaye rakhen. punah dhanyawaad.

yogesh verma "swapn"
e.mail.
yogeshverma56@gmail.com

श्यामल सुमन said...

काम जरूरी था बहुत रहा शहर से दूर।
आभारी श्यामल सुमन प्यार मिला भरपूर।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

shikha varshney said...

waah maja aa gaya dohe padhkar

N KUMAR said...

Bahut hi badhiya aur arth purn dohe
yatharth ki chadar odhe
sayad insaan samajh sake
aage kya hone ko hai

N KUMAR said...

Bahut hi badhiya

N KUMAR said...

Bahut hi badhiya aur arth purn dohe
yatharth ki chadar odhe
sayad insaan samajh sake
aage kya hone ko hai

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