Sunday, December 13, 2020

भस्मासुर

हर युग में,
रूप बदल बदलकर,
भस्मासुर आता है, 
और अपने तरीके बदलकर,
अपना किरदार निभाता है।

कहते हैं कि भस्मासुर को
वरदान मिला था कि
वह जिसके सर पे हाथ रखेगा,
वो राख या भस्म हो जाएगा।

खुद के भस्म होने का डर,
आखिर किसे नहीं लगता?
लेकिन सच तो यही है कि 
एक न एक दिन 
सबको भस्म होना ही पड़ता।

भस्मासुर ने जिस जिसके
सर पे हाथ रखा वो बर्बाद। 

लेकिन आज के भस्मासुर?
उसने अब वरदान के प्रयोग का
नया तरीका इजाद किया है।
वो अब किसी के सर पर,
हाथ नहीं रखता बल्कि 
झुककर प्रणाम करता है।
उसने जिसे भी प्रणाम किया,
उसे ही बर्बाद किया है।

कभी गुरु को प्रणाम, 
गुरु का काम तमाम।
कभी संसद की सीढ़ी को प्रणाम,
और अभी लोग डरे, सहमे हैं,
क्योंकि उसने पिछली बार, 
संविधान को प्रणाम जो कर लिया!!

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