Friday, November 3, 2023

ये मिसाल है सिर्फ जलन की

वो  सुनते जाकर जन-जन की
ये  कहते  बस  अपने  मन की 

वो  फकीर - सा  देश  जोड़ता
इनको  फिक्र  नहीं  निर्धन की

प्रेम   लुटाना   उनकी  आदत
इन्हें   घृणा  के  मैराथन   की 

वो  माँगे  धरती   पर  सुविधा 
ये बतियाते  सपन  गगन  की

पूछ  रहा  वो  इनसे  खुलकर 
क्या  हालत  है कालेधन  की

हर  मजहब  से  प्रीत  करे वो 
इनको एक धरम - बन्धन की 

वो  दीपक सा जले सुमन पर 
ये मिसाल हैं सिर्फ जलन की 

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