राष्ट्रवाद का दौर है भाई, बोलो वन्देमातरम
मंदिर तक में लूट मचाई, बोलो वन्देमातरम
दिशाहीन जब होती सत्ता, छात्र उतरते सड़कों पे
रोजी - रोटी असल लड़ाई, बोलो वन्देमातरम
चीनी,चावल,आटा, सब्जी, कठिनाई से थाली में
जब सुरसा - सी हो मँहगाई, बोलो वन्देमातरम
आमजनों की तकलीफों पे, जो आवाज उठाते हैं
फेंक रहे उन पर रोशनाई, बोलो वन्देमातरम
सभी उपक्रम जो सरकारी, अब कुबेर के जिम्मे में
जन - गण - मंगल पड़ी खटाई, बोलो वन्देमातरम
बंद हुए विद्यालय कितने, अनगिन खस्ते हाल में
नौनिहाल की बंद पढ़ाई, बोलो वन्देमातरम
हँसकर चाहे या रो करके, जगना होगा तुझे सुमन
अब तक बात समझ न आई, बोलो वन्देमातरम




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