संधर्ष न किया तो धिक्कार जिन्दगी है
काँटों का सेज फिर भी स्वीकार जिन्दगी है
मिलता सुकूँ हवा से जो तन पे हो पसीना
भूखे को जैसे रोटी अभिसार जिन्दगी है
इन्सानियत की कीमत, ईमान की भी कीमत
हालात ऐसे लगते व्यापार जिन्दगी है
क्या माँगने से हिस्से की धूप भी मिलेगी
हक छीनकर के पाना अधिकार जिन्दगी है
गुजरो जिधर से यारो बन के सुमन ही गुजरो
कोई भी कह सके ना लाचार जिन्दगी है
काँटों का सेज फिर भी स्वीकार जिन्दगी है
मिलता सुकूँ हवा से जो तन पे हो पसीना
भूखे को जैसे रोटी अभिसार जिन्दगी है
इन्सानियत की कीमत, ईमान की भी कीमत
हालात ऐसे लगते व्यापार जिन्दगी है
क्या माँगने से हिस्से की धूप भी मिलेगी
हक छीनकर के पाना अधिकार जिन्दगी है
गुजरो जिधर से यारो बन के सुमन ही गुजरो
कोई भी कह सके ना लाचार जिन्दगी है
इन्सानियत की कीमत ईमान की भी कीमत
ReplyDeleteहालात ऐसे लगते व्यापार जिन्दगी है
और गुज़रो जिधर से सुमन-=--- बहुत कमाल की पँक्तियाँ हैं । पूरी कविता आज की जिन्दगी का सच ब्याँ करती सी हैं बधाई आपको इस सुन्दर रचना के लिये।
सभी पंक्तियों को पढ़ने के बात मन में वाह वाह निकला।
ReplyDeleteआपके लिए सिर्फ वाह वाह....
इन्सानियत की कीमत ईमान की भी कीमत
ReplyDeleteहालात ऐसे लगते व्यापार जिन्दगी है
duniya ka ek aapne gazal me piroya hai bahut badhiya lagi..dhanywaad suman ji
बहुत बेहतरीन!
ReplyDelete"संधर्ष न किया तो धिक्कार जिन्दगी है
ReplyDeleteकाँटों सेज कहकर स्वीकार जिन्दगी है"
वाह श्यामल जी बहुत खूब .
काँटों की सेज देखी , फूलों की सेज देखी
संघर्ष भी लगे तो , अपना न हो फ़साना
संधर्ष न किया तो धिक्कार जिन्दगी है
ReplyDeleteकाँटों सेज कहकर स्वीकार जिन्दगी है..
khoobsoorat laine.
संधर्ष न किया तो धिक्कार जिन्दगी है
ReplyDeleteकाँटों सेज कहकर स्वीकार जिन्दगी है
बहुत सुन्दर श्यामल जी !
श्यामल जी
ReplyDeleteसदा सुखी रहो
गुजरो जिधर से खुशबु बन के सुमन के गुजरो
कोई भी कह सके ना लाचार जिंदगी है
वाह क्या दर्द भरे शब्द हैं इस गज़ल में
आपकी अंतिम शेर में बहुत ही जज्बात भरा हुआ है
और ऐसा लगता है कि आपने जी कर लिखा है इस गज़ल को
इतनी पसंद आयी पढते पढते अश्रुधारा बह निकली कृपया इस गज़ल को मेरी ऑरकुट भेज देवें
आशीर्वाद के साथ गुड्डों दादी चिकागो से
गुजरो जिधर से खुशबू बन के सुमन की गुजरो
ReplyDeleteकोई भी कह सके ना लाचार जिन्दगी है।।
waah ..........bahut sundar baat kahi........yun to zindagi har pal ek jung hai magar jiyo to aise ki sabki yaadon mein bas jao.
गुजरो जिधर से खुशबू बन के सुमन की गुजरो
ReplyDeleteकोई भी कह सके ना लाचार जिन्दगी है।।
bahut hi badhiya rachANA ....badhai "
----- eksacchai { AAWAZ }
http://eksacchai.blogspot.com
इस ग़ज़ल को पढ़ कर मैं वाह-वाह कर उठा।
ReplyDeletewaah..bahut hi badhiyaa
ReplyDeleteइन्सानियत की कीमत ईमान की भी कीमत
ReplyDeleteहालात ऐसे लगते व्यापार जिन्दगी है
bahut umda bhav aur sarvotam rachna hai....
वाह श्यामल जी बहुत खूब .
ReplyDeleteगुजरो जिधर से खुशबू बन के सुमन की गुजरो
ReplyDeleteकोई भी कह सके ना लाचार जिन्दगी है।।
क्या बात है श्यामल जी. बहुत खूब. गणतंत्र दिवस मुबारक हो.
इन्सानियत की कीमत ईमान की भी कीमत
ReplyDeleteहालात ऐसे लगते व्यापार जिन्दगी है
हालात तो कुछ ऐसे ही हैं।
अच्छी रचना।
बहुत सुंदर रचना लगी.
ReplyDeleteआप को गणतंत्र दिवस की मंगलमय कामना
धन्यवाद
happy republic day.
ReplyDeletebahut badhiyaa likhaa.
thanks.
www.chanderksoni.blogspot.com
संधर्ष न किया तो धिक्कार जिन्दगी है
ReplyDeleteकाँटों का सेज कहकर स्वीकार जिन्दगी है
मिलता सुकूँ हवा से जो तन पे हो पसीना
भूखे की जैसे रोटी अभिसार जिन्दगी है
Waah!
Gantantr diwas kee dheron shubhkamnayen!
आप सब के प्रति धन्यवाद सहित विनम्र आभार प्रेषित है।
ReplyDeleteअब फिर तीन फरवरी के बाद मुलाकात होगी नेट पर - तब तक अलविदा।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman. blogspot. com
सही पकड़ा है कवि ने जिन्दगी को!
ReplyDeleteनया वर्ष स्वागत करता है , पहन नया परिधान ।
सारे जग से न्यारा अपना , है गणतंत्र महान ॥
गणतन्त्र-दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!
charon taraf apni khushbu bikherta ek ek sher, behatareen.sumanji.
ReplyDeletehar ek panktee me vajan hai...
ReplyDeletebahut sunder rachana............
गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें.......
बहुत सुन्दर रचना ! आपको और आपके परिवार को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें!
ReplyDeleteWAAH !!! WAAH !!! WAAH !!! LAJAWAAB BHAI JI, LAJAWAAB !!! KYA LIKHA HAI AAPNE...WAAH !!!
ReplyDeleteexcellent.
ReplyDeletethanks.
www.chanderksoni.blogspot.com