दरिया को तूफानी मत कर
सच से आनाकानी मत कर
ऐ शासक! बदलाव करो पर
खबरों पे सुल्तानी मत कर
केवल सत्ता की खबरों से
जनता को अज्ञानी मत कर
आमजनों की जो लाचारी
कर निदान, नादानी मत कर
बिन बोले पब्लिक सब जाने
पब्लिक से बचकानी मत कर
हर शासक मानव ही होता
मानव को असमानी मत कर
सुमन मीडिया वालों चेतो
आँसू को यूँ पानी मत कर
मानव की आसमानी मत कर दरिया को तूफानी मत कर ...
ReplyDeleteअति सुंदर प्रस्तुती ...
लोकतंत्र और सत्ता का अद्भुत संगम ..
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