Thursday, June 11, 2009

भावना

अलग थलग दुनियाँ से फिर भी इस दुनियाँ में रहता हूँ
अनुभव से उपजे चिन्तन की नव-धारा संग बहता हूँ

पद पैसा प्रभुता की हस्ती प्रायः सब स्वीकार किया
अवसर पे ऐसी हस्ती को बेखटके सच कहता हूँ

अपना कहकर जिसे संभाला मेरी हालत पे हँसते
ऊपर से हँस भी लेता पर दर्द हृदय में सहता हूँ

इन्डिया और भारत का अन्तर मिट जाये तो बात बने
दूरी कम करने की अपनी कोशिश करता रहता हूँ

जश्न मनाया चोरों ने जब थाने का निर्माण हुआ
बना खंडहर भाव सुमन का भाव-जगत में ढ़हता हूँ

30 comments:

Nirmla Kapila said...

अपना कहकर जिसे संभाला मेरी हालत पे हँसते।
ऊपर से हँस भी लेता पर दर्द हृदय में सहता हूँ।।
बहुत सुन्दर आपकी नव-धारा मे बह गयी बधाई

योगेन्द्र मौदगिल said...

अच्छी रचना के लिये बधाई स्वीकारें श्यामल जी

Razia said...

इन्डिया और भारत का अन्तर मिट जाये तो बात बने।
yahi antar to hame apne bharat ko hamse door karta hai.
bahu achchhi rachna

verma8829 said...

shyamal jee
khubsoorat rachana bani hai aapke kalam se.
badhai

ओम आर्य said...

अलग थलग दुनियाँ से फिर भी इस दुनियाँ में रहता हूँ।
अनुभव से उपजे चिन्तन की नव-धारा संग बहता हूँ।।

waah bahut badhiya

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत लाजवाब रचना. बधाई.

रामराम.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

"जश्न मनाया चोरों ने जब]
थाने का निर्माण हुआ।
बना खंडहर भाव सुमन का,
भाव-जगत में ढ़हता हूँ।।"

लाजवाब रचना।
बधाई।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

रचना को पढ़कर,
अनायास ही ताऊ के शब्द
मुँह से निकल पड़े।
वाह....लाजवाब।

अजय कुमार झा said...

आदरणीय श्यामल जी..मानव मन के स्वाभाविक मनोविज्ञान को दर्शाती सुन्दर रचना..आपको पढ़ना हमेशा ही सुखद लगता है..

VIJAY TIWARI " KISLAY " said...

श्यामल सुमन जी
' भावना पढ़ी .
बहुत अच्छी लगी
'''' इन्डिया और भारत का अन्तर मिट जाये तो बात बने। '''''
आपका ये देश प्रेम जरूर रंग लाएगा .
- विजय

Pyaasa Sajal said...

इन्डिया और भारत का अन्तर मिट जाये तो बात बने।
दूरी कम करने की अपनी कोशिश करता रहता हूँ।।
itna zyadaa mazaa aa jaata hai aapko padhke kabi kabi...shabdo ka chayan ekdum naveen hai,apne ek alag style banata huaa...surely bahut bahut achha :)

वन्दना अवस्थी दुबे said...

जश्न मनाया चोरों ने जब थाने का निर्माण हुआ।
बना खंडहर भाव सुमन का भाव-जगत में ढ़हता हूँ।।
क्या बात है.....बधाई.

sada said...

"जश्न मनाया चोरों ने जब थाने का निर्माण हुआ,
बना खंडहर भाव सुमन का भाव-जगत में ढ़हता हूँ।

भावनाओं से सुसज्जित रचना 'भावना' के लिये बधाई

Science Bloggers Association said...

बहुत ही सुन्‍दर भाव हैं। गजल के कई शेर सीधे दिल में उतर जाने वाले हैं।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

परमजीत बाली said...

सुमन जी,बहुत बढिया रचना है बधाई स्वीकारें।

अपना कहकर जिसे संभाला मेरी हालत पे हँसते।
ऊपर से हँस भी लेता पर दर्द हृदय में सहता हूँ।।

AlbelaKhatri.com said...

india aur bharat ka antar mit jaaye............
HAY HAY ...........MAAR DALA.........
badhaai__

रंजना said...

प्रत्येक दोहे पर दादों और आपके लिए दुआओं की झड़ी लग गयी.........

अद्भुद लिखा है आपने ...अद्वितीय...

राज भाटिय़ा said...

जश्न मनाया चोरों ने जब थाने का निर्माण हुआ।
बना खंडहर भाव सुमन का भाव-जगत में ढ़हता हूँ।।
वाह जबाब नही जी, बहुत ही सुंदर.
धन्यवाद

रश्मि प्रभा... said...

bahut sundar....

स्वप्न मंजूषा शैल said...

इन्डिया और भारत का अन्तर मिट जाये तो बात बने।

बस यही तो लाख टके की बात कह दी आपने
उम्दा ...

SWAPN said...

अपना कहकर जिसे संभाला मेरी हालत पे हँसते।
ऊपर से हँस भी लेता पर दर्द हृदय में सहता हूँ।।

bahut sunder suman ji. sabhi sher lajawaab. badhai sweekaren.

Suman said...

जश्न मनाया चोरों ने जब थाने का निर्माण हुआ। nice

●๋• सैयद | Syed ●๋• said...

बहुत खूब !!

SAHITYIKA said...

nice one..
last 4 lines are really very nice.. :)

Priya said...

जश्न मनाया चोरों ने जब थाने का निर्माण हुआ।
बना खंडहर भाव सुमन का भाव-जगत में ढ़हता हूँ।।

aap to bes aap hain....... jawab nahi

अनिल कान्त : said...

लाजवाब रचना

woyaadein said...

पड़ गए मेरे शब्द कम हैं, आपको लेकिन नमन है.
यथार्थ से उपजी है कविता, सत्य-चिंतन अनुपम है.

साभार
हमसफ़र यादों का.......

श्यामल सुमन said...

इस रचना पर मिला समर्थन हृदय से है आभार।
बना रहे सौभाग्य सतत और मिले सभी का प्यार।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.

दिगम्बर नासवा said...

वाह.सुमन जी अच्छी रचना है............बधाई

Ekta said...

umda rachna. bhav bahut khubsurat hain.
bahut badhiya

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