Wednesday, October 21, 2009

आशा की किरणें जगी


तन की सीमा से भली, मन की सीमा जान।
मन को वश में कर सके, वही असल इन्सान।।

आशा की किरणें जगीं, भले अंधेरी राह।
नीरवता सुख दे जिसे, सुन्दर उसकी चाह।।

अभिनय करने में यहाँ, नेता बहुत प्रवीण।
भाषण, आश्वासन सहित, खींचे चित्र नवीन।।

खट्टा तब मीठा लगे, जब हो प्रियतम पास।
घड़ी मिलन की याद में, होते नहीं उदास।।

व्यंग्य-बाण के साथ में, हो रचना में धार।
बदलेंगे तब नीति ये, जनता के अनुसार।।

किया बहुत मैंने यहाँ, गम दुनिया की बात।
प्रथम मिलन को याद कर, सचमुच इक सौगात।।

हर विकास के नाम पर, क्या होता है आज?
सबकी कोशिश से बचे, दीनों की आवाज।।

श्लील और अश्लील में, कौन बताये भेद?
आदम युग हम जा रहे, प्रकट करें बस खेद।।

रचना भी है आपकी, भाव आपके खास।
सुमन सजाया बस इसे, कैसा रहा प्रयास?

27 comments:

Udan Tashtari said...

बहुत बेहतरीन दोहे सब के सब!

संगीता पुरी said...

अक्‍सर टिप्‍पणियों में पढा करती थी मैं इन्‍हें .. सुंदर दोहे के रूप में बिखरे हुए मोतियों को सहेजकर एक माला बना ली .. अच्‍छा किया !!

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

सुंदर दोहे हैं, टिप्पणी की टिप्पणी और दोहे के दोहे।

Pandit Kishore Ji said...

behatrin dohe..... jawaab nahi aapka janaaab

अल्पना वर्मा said...

सभी दोहे अच्छे लगे.

Mishra Pankaj said...

तन की सीमा से भली मन की सीमा जान।
मन को वश में कर सके वही असल इन्सान।।

आशा की किरणें जगी भले अंधेरी राह।
नीरवता सुख दे जिसे गजब है उसकी चाह।।
सुन्दर लगा सुमन जी .

'अदा' said...

बहुत सुन्दर...
इसक कहते हैं 'आम के आम और गुठलियों के दाम'
बहुत सही दोहे लिखें हैं आपने भईया....

राज भाटिय़ा said...

श्लील और अश्लील में कौन बताये भेद?
आदम युग हम जा रहे प्रकट करेंगे खेद।।
सभी दोहे एक से बढ कर एक
धन्यवाद

वन्दना said...

ek se badhkar ek dohe hain.......wakai sabrang hain.

M VERMA said...

सभी दोहे बहुत सुन्दर और प्रेरक

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

रचना भी है आपकी भाव आपके खास।
सुमन खिलें हैं बाग में, अच्छे रहे प्रयास।।

SACCHAI said...

" bahut hi badhiya ek se ek dohe "

----eksacchai { aawaz }

http://eksacchai.blogspot.com

संजीव गौतम said...

वाह! टिप्पणी की टिप्पणी दोहे के दोहे आपको प्रणाम है.

अभिषेक ओझा said...

टिपण्णी से रचना निकल पड़ी ये तो.

चन्द्र कुमार सोनी said...

badhiyaa likhte hain aap........
or likhiye.
thanks.
CHANDER KUMAR SONI,
L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,
SRI GANGANAGAR-335001,
RAJASTHAN, INDIA.
CHANDERKSONI@YAHOO.COM
00-91-9414380969
CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM

Kusum Thakur said...

"रचना भी थी आपकी भाव आपके खास।
सुमन सजाया बस इसे कैसा रहा प्रयास? "


आपके इस प्रयास से प्रेरित हुए हम ,
सजाया बस आपने देख रहे अचम्भ ।

बहुत खूब !!!

योगेन्द्र मौदगिल said...

सार्थक, सटीक व सामयिक दोहे.... वाह..

Dhiraj Shah said...

सुन्दर दोहे....

Pandit Kishore Ji said...

behatrin dohe

श्यामल सुमन said...

आप सबकी रचनाएं, आपके ही भाव पर टिप्पणी देने के काव्यात्मक प्रयास के परिणाम हैं ये सबरंग दोहे, जिसे आप सबका बहुत समर्थन मिला। मैं विनम्र आभार निवेदित करना चाहता हूँ आप सबके प्रति।

सादर
श्यामल सुमन
www.manoramsuman.blogspot.com

Nirmla Kapila said...

सुमन जी कई दोहे आपके तभी पहले पढे से लगते हैं । बहुत सुन्दर हैं बधाई

Suman said...

श्लील और अश्लील में कौन बताये भेद?
आदम युग हम जा रहे प्रकट करेंगे खेद।।nice

Prem said...

vvvयह प्रयास खूब रहा .तीनो भाग एक साथ पढ़े ,मज़ा आया ,दीवाली की शुभकामनाये ,न भेजने से ,देर भली .

pragya said...

खट्टी भी मीठी लगे जब हो प्रियतम पास।
उस क्षण को बस याद कर होते नहीं उदास।।
सचमुच सबरंग है और बहुत सुंदर हैं!

kshama said...

Behad achhe dohe hain..man pe jiske lagaam ho wahee 'saadhu' kahlaya ..kuchh apnee saadhna se saadh gaya..!

Amit K Sagar said...

एक से बढ़कर एक पंक्ति! बहुत बहुत उम्दा.

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रंजना said...

Saare ke saare dohe man ko moh gaye....
Bahut bahut bahut hi sundar rachna..

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