मतलब पर मत लव को खोल।
हो सकता है सब कुछ गोल।
मतलब पूरे तो मिठास संग,
लव खोलो, मत लब लब बोल।।
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रचना में विस्तार
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अन्ध-भक्ति है रोग
छुआछूत से कब हुआ, देश अपन ये मुक्त? जाति - भेद पहले बहुत, अब VIP युक्त।। धर्म सदा कर्तव्य ह...
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गन्दा फिर तालाब
क्या लेखन व्यापार है, भला रहे क्यों चीख? रोग छपासी इस कदर, गिरकर माँगे भीख।। झट से झु...
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मगर बेचना मत खुद्दारी
यूँ तो सबको है दुश्वारी एक तरफ मगर बेचना मत खुद्दारी एक तरफ जाति - धरम में बाँट रहे जो लोगों को वो करते सचमुच गद्दारी एक तरफ अक्सर लो...
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लेकिन बात कहाँ कम करते
मैं - मैं पहले अब हम करते लेकिन बात कहाँ कम करते गंगा - गंगा पहले अब तो गंगा, यमुना, जमजम करते विफल परीक्षा या दुर्घटना किसने देखा वो...
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विश्व की महान कलाकृतियाँ-
19 comments:
लव खोलो, मत लब लब बोल।।
-सटीक!!
आपकी टिपण्णी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया! इतनी सुंदर पंक्तियाँ लिखा है आपने की खुशी से मन भर गया!
वाह वाह अत्यन्त सुंदर ! बिल्कुल सही कहा है आपने! इस छोटी सी प्यारी सी उम्दा रचना के लिए बधाई!
waah !
शब्द-शब्द में सार ..!
waah!
कम शब्दों मे ज्यादा बड़ी बात्।
बढ़िया रहा मतलब का चमत्कार!
बस वाह !!
chotee see pyaree rachana .
waah
bahut sundar लव खोलो, मत लब लब बोल
mere blog tak aane ke liye aapka aabhari hooo
वाह, सुमन जी वाह।
चंद शब्दों में पूरा लेख ।
बहुत बढ़िया रहा।
लव खोलो, मत लब लब बोल।
बिल्कुल सटीक बात्!
दिलचस्प।
टिप्पणी का आभार सभी को
सुमन हृदय में अमृत घोल
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
बहुत सुन्दर
वाह!
बहुत खुब जी
लव खोलो, मत लब लब बोल
कब शब्द और अर्थ अगाध...
भईया की कलम चले निर्बाध...
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