Thursday, March 4, 2010

बकवास

शासन के जो भी प्रकार हैं, लोकतंत्र है खास
जनहित की बातों को लेकिन कहते हैं बकवास
पैर के नीचे की जमीन भी खिसकायी जाती है,
भाषण में ऐसी चालाकी बढ़ जाती है प्यास

जनता का शासन है फिर भी जनता ही लाचार
वीआईपी कारण दहशत का, सुन दिल्ली सरकार
चौखट पर बाजार खड़ा है आम लोग मजबूर,
कौन बचायेगा भारत को सिस्टम ही बेकार

दूजे अपने बन सकते पर अपनों से आघात
अपने सचमुच अपने हों तो बेहतर ये सौगात
रिश्ते बनते व्यवहारों से, नहीं खून से केवल,
खून के रिश्ते, खूनी रिश्ते बन करते प्रतिघात

जो बातें हम मंच से कहते क्या वैसा व्यवहार
सुमन झाँकता अपने अन्दर खुद लगता बीमार
प्रायः लोग किया करते हैं अच्छी अच्छी बातें,
कोशिश करते कैसे छीने दूजे का अधिकार

19 comments:

विनोद कुमार पांडेय said...

दूजे अपने बन सकते पर अपनों से आघात।
अपने सचमुच अपने हों तो बेहतर ये सौगात।
रिश्ते बनते व्यवहारों से, नहीं खून से केवल,
खून के रिश्ते, खूनी रिश्ते बन करते प्रतिघात।।

रिश्ते वही सफल होते है जो प्रेम की कसौटी पर खरा उतरे खून के वो रिश्ते जिसमें प्यार नही बन नाम ही रिश्ता बन कर रह जाता है...बढ़िया रचना....बधाई

Suman said...

शासन के जो भी प्रकार हैं, लोकतंत्र है खास।
जनहित की बातों को लेकिन कहते हैं बकवास।
पैर के नीचे की जमीन भी खिसकायी जाती है,
ऐसी चालाकी भाषण में बढ़ जाती है प्यास.nice

Udan Tashtari said...

वाह!! सटीक बयानी!

निर्मला कपिला said...

सुमन जी आज तो व्यवस्था से ले कर रिश्तों तक खूब कलम चलाई है बहुत अच्छी लगी आपकी ये रचना भी धन्यवाद।

पी.सी.गोदियाल said...

यह लोकतंत्र ही बकवास है सुमन जी, मुझे तो उस संविधान निर्माता की ही बुद्दी पर तरस आता है , जिसने एक तरफ समानता का धिकार की बात की और दूसरी तरफ इतना भी निर्धारित करना भूल गया कि एक नेता के लिए क्या क्वालिफिकेशन होनी चाहिए !

रश्मि प्रभा... said...

बढ़िया रचना.

मनोज कुमार said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
इसे 06.03.10 की चिट्ठा चर्चा (सुबह ०६ बजे) में शामिल किया गया है।
http://chitthacharcha.blogspot.com/

अभिषेक प्रसाद 'अवि' said...

चौखट पर बाजार खड़ा है आम लोग मजबूर,
कौन बचायेगा भारत को सिस्टम ही बेकार।।

sirf system ko dosh na de sir... humara bhi ismein yogdaan hai... par kavitaa aapki adbhutaas hai...

डॉ टी एस दराल said...

जो बातें हम मंच से कहते क्या वैसा व्यवहार।

हाथी के दांत , खाने के और दिखने के और ।
अच्छा उजागर किया है।

चन्द्र कुमार सोनी said...

bakwaas naam se aapne jo likhaa hain bahut badhiyaa hain.
isae koi bhi bakwaas nahi keh saktaa.
thanks.
WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM

चन्द्र कुमार सोनी said...

bakwaas naam se aapne jo likhaa hain bahut badhiyaa hain.
isae koi bhi bakwaas nahi keh saktaa.
thanks.
WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM

sangeeta swarup said...

प्रायः लोग किया करते हैं अच्छी अच्छी बातें,
कोशिश करते कैसे छीने दूजे का अधिकार।।

सटीक बात कही है....कथनी और करनी में अंतर करती हुई...

M VERMA said...

रिश्ते बनते व्यवहारों से, नहीं खून से केवल,
खून के रिश्ते, खूनी रिश्ते बन करते प्रतिघात।।
बहुत सुन्दर बात

Indranil Bhattacharjee said...

प्रायः लोग किया करते हैं अच्छी अच्छी बातें,
कोशिश करते कैसे छीने दूजे का अधिकार।।

कितना सच है ......

काजल कुमार Kajal Kumar said...

फिर सुबह होगी...

shama said...

Sirf ek shabd..wah!

योगेन्द्र मौदगिल said...

badiya BAKWAAS hai bhai..wahwa..

श्यामल सुमन said...

दिया सदा ही आपने प्यार मुझे कुछ खास।
यह मेरा सौभाग्य है भले किया बकवास।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

रंजना said...

दूजे अपने बन सकते पर अपनों से आघात।
अपने सचमुच अपने हों तो बेहतर ये सौगात।
रिश्ते बनते व्यवहारों से, नहीं खून से केवल,
खून के रिश्ते, खूनी रिश्ते बन करते प्रतिघात।।

क्या बात कही आपने...वाह !!!

सार्थक अतिसुन्दर रचना...

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