Thursday, March 25, 2010

शादी बिनु राधा किशन

अक्सर हो पाता नहीं मन से मन का मेल।
प्रायः अपने यूँ दिखे ज्यों पानी में तेल।।

निन्दा में संलग्न हैं लोग कई दिन रात।
दूजे का बस नाम है कहते अपनी बात।।

चमके सोने की तरह अब आँगन में धूप।
मजदूरों के तन जले पानी हुआ अनूप।।

आगे पीछे गाड़ियाँ शासक की यह शान।
आमलोग की भूख से वे बिल्कुल अन्जान।।

संसद बेबस हो गया अपराधी के हाथ।
जो थोड़े अच्छे बचे होते कभी न साथ।।

कई लोग समझा गए नहीं गगन पर थूक।
हो समक्ष अन्याय तो रहा न जाता मूक।।

मिली खबर कि आजकल शेर हुआ बीमार।
इसीलिए अब चल रही गीदड़ की सरकार।।

शादी बिनु राधा किशन तब रहते थे संग।
सुमन अचानक रो पड़ा देख नजरिया तंग।।

19 comments:

संजय भास्कर said...

मिली खबर कि आजकल शेर हुआ बीमार।
इसीलिए अब चल रही गीदड़ की सरकार।।

बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

संजय भास्कर said...

ग़ज़ब की कविता ... कोई बार सोचता हूँ इतना अच्छा कैसे लिखा जाता है

कृष्ण मुरारी प्रसाद said...

संजय जी से सहमत..........
.......
यह पोस्ट केवल सफल ब्लॉगर ही पढ़ें...नए ब्लॉगर को यह धरोहर बाद में काम आएगा...
http://laddoospeaks.blogspot.com/2010/03/blog-post_25.html
लड्डू बोलता है ....इंजीनियर के दिल से....

M VERMA said...

संसद बेबस हो गया अपराधी के हाथ।
जो थोड़े अच्छे बचे होते कभी न साथ।।
साथ ही
मिली खबर कि आजकल शेर हुआ बीमार।
इसीलिए अब चल रही गीदड़ की सरकार।।
अत्यंत सामयिक है.
बहुत सुन्दर

वन्दना said...

अक्सर हो पाता नहीं मन से मन का मेल।
प्रायः अपने यूँ दिखे ज्यों पानी में तेल।।

निन्दा में संलग्न हैं लोग कई दिन रात।
दूजे का बस नाम है कहते अपनी बात।।
वाह ………किन लफ़्ज़ों मे तारीफ़ करूँ ,बडी कटु सच्चाई कह दी।
वैसे हर शेर लजवाब है किस किस की तारीफ़ करें।

डॉ टी एस दराल said...

बहुत सुन्दर रचना।
सत्य पर आधारित।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

बहुत सुंदर काव्य, सामाजिक यथार्थ लेकर आए हैं आप इस रचना में।

धीरज शाह said...

अक्सर हो पाता नहीं मन से मन का मेल।
प्रायः अपने यूँ दिखे ज्यों पानी में तेल।।

सुन्दर काव्य।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

सभी दोहे सुन्दर हैं!

प्रवीण पाण्डेय said...

सीधा व तीखा कटाक्ष है स्थितियों पर ।

राज भाटिय़ा said...

शादी बिनु राधा किशन तब रहते थे संग।
सुमन यकायक रो पड़ा देख नजरिया तंग।।
बहुत सुंदर कहा आप ने बाकी संजय जी से हम भी सहमत है जी

ठाकुर पदम सिंह said...

अक्सर हो पाता नहीं मन से मन का मेल।
प्रायः अपने यूँ दिखे ज्यों पानी में तेल।।

बहुत सुंदर रचना बधाई

निर्झर'नीर said...

अक्सर हो पाता नहीं मन से मन का मेल।
प्रायः अपने यूँ दिखे ज्यों पानी में तेल।।

बहुत सुन्दर रचना।

रंजना said...

शादी बिनु राधा किशन तब रहते थे संग।
सुमन यकायक रो पड़ा देख नजरिया तंग।।

यह एकदम मेरे ही मन की बात कह दी आपने भैया...

सदैव की भांति चिंतन को विस्तार देती अतिसुन्दर रचना...

रचना दीक्षित said...

सचमुच लाजवाव.सीधा व तीखा कटाक्ष
बेहतरीन अभिव्यक्ति बहुत गहरी बातें

हर्षिता said...

बहुत ही अच्छी प्रस्तुति,धन्यवाद सुमन जी।

Babli said...

बहुत ही सुन्दर और शानदार रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है! बधाई!

arun c roy said...

bahut sunder and sam saamyik rachna suman ji...

चन्द्र कुमार सोनी said...

बहुत सुंदर.
WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM

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