Saturday, March 27, 2010

सुमन आग भीतर लिए

हार जीत के बीच में, जीवन एक संगीत।
मिलन जहाँ मनमीत से, हार बने तब जीत।।

डोर बढ़े जब प्रीत की, बनते हैं तब मीत।
वही मीत जब संग हो, जीवन बने अजीत।।

रोज परिन्दों की तरह, सपने भरे उड़ान।
सपने गर जिन्दा रहे, लौटेगी मुस्कान।।

रौशन सूरज चाँद से. सबका घर संसार।
पानी भी सबके लिए, क्यों होता व्यापार।।

रोना भी मुश्किल हुआ, आँखें हैं मजबूर।
पानी आँखों में नहीं, जड़ से पानी दूर।।

निर्णय शीतल कक्ष से, अब शासन का मूल।
व्याकुल जनता हो चुकी, मत कर ऐसी भूल।।

सुमन आग भीतर लिए, खोजे कुछ परिणाम।
मगर पेट की आग ने, बदल दिया आयाम।।

17 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

पेट की आग बुझने के बाद आत्मा की आग शमित करें कविवर । सुन्दर ।

संगीता पुरी said...

अपनी इच्‍छा के अनुरूप कार्य नहीं कर पाना .. यह तो बहुत सारे लोगों का दुर्भाग्‍य है !!

रवीन्द्र प्रभात said...

सुन्दर अभिव्यक्ति,आभार

राज भाटिय़ा said...

सुमन के भीतर आग है खोजे कुछ परिणाम।
मगर पेट की आग ने बदल दिया आयाम।।
बहुत सुंदर रचना, आज के हालात पर सटीक जी.
धन्यवाद

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

nice.

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत सुन्दर रचना .बधाई

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

यह आग ठण्डी नही पड़नी चाहिए!

guddo said...

श्यामल जी
चिरंजीव भवः
सुमन के भीतर आग है
यही तो सच्चा राग है
कोशिश करके मिट जायेंगे,
गहरा जितना दाग है
इस जलती हुई मशाल को जलाये रक्खो श्यामल

सुंदर अति सुंदर दर्द भरी रचना को जी के लिखा है आपने
कहाँ से धन्यवाद के शब्द लायूं
आशीर्वाद के साथ आपकी गुड्डो दादी

संजय भास्कर said...

... बेहद प्रभावशाली अभिव्यक्ति है ।

डॉ टी एस दराल said...

इस आग को जलाये रखना
और पेट की आग को बुझाये रखना ।

सुन्दर रचना ।

वन्दना said...

रोना भी मुश्किल हुआ आँखें हैं मजबूर।
पानी आँखों में नहीं जड़ से पानी दूर।।
bahut hi gahre bhav.

M VERMA said...

रोना भी मुश्किल हुआ आँखें हैं मजबूर।
पानी आँखों में नहीं जड़ से पानी दूर।।

जड़ से पानी दूर हुआ तो जड़ता आयेगी.
अतृप्त कामनाओं की फिर बद्ली छायेगी.

चंदन कुमार झा said...

सुन्दर दोहे !!!

दीपक 'मशाल' said...

Suman ji aapne jis tarah kai sachchaiyon aur takleefon ko rachna me udela hai wah dekhte banta hai..

devendra goswami said...

bahut khub
suman ji aag bahut tej hai aur ye aag sab ke aandar lagani hogi

भूतनाथ said...

kyaa baat....kyaa baat....kyaa baat ....!!

रंजना said...

Satat vicharneey ....Atisundar......

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