Sunday, September 19, 2010

हिंगलिश दोहे

LIFE MISERABLE हुई, INCREASING है RATE
GODOWN में GRAIN है, PEOPLE EMPTY पेट।।

JOURNEY हो जब TRAIN से, FEAR होता साथ।
होगा ACCIDENT कब, मिले DEATH से हाथ।।

इक LEADER SPEECH का, दूजा करे OPPOSE
दिखती UNITY जहाँ, PAY से अधिक PRAPOSE।।

आज CORRUPTION के प्रति, कही न दिखती HATE
जो भी हैं WANTED यहाँ, खुला MINISTER GATE।।

आँखों में TEAR नहीं, नहीं TIME पे RAIN
सुमन की LIFE SAFE है, LOSS कहें या GAIN।।

15 comments:

संगीता पुरी said...

बहुत खूब !!

संजय भास्कर said...

बेहद ख़ूबसूरत और उम्दा

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

झकास।
................
खूबसरत वादियों का जीव है ये....?

रंजना said...

वाह...लाजवाब...
सुन्दर भाव.... अभिनव प्रयोग !!!

रोमन अक्षरों के बदले अंगरेजी शब्दों को देवनागरी लिपि में भी लिख सकते हैं भैया...

डॉ टी एस दराल said...

बढ़िया प्रयास है । कुछ इंग्लिश वर्ड्स तो नैचुरल लगते हैं ।

गुड्डोदादी said...

LIFE MISRABLE हुआ,INCREASING है RATE |

GODOWN में GRAIN है,PEOPLE EMPTY पेट ||

सभी हिंगलिश दोहे एक से बढ़ कर के लिखे
वह दिन दूर नहीं रोटी के स्थान पर खावेंगे रेत|
GODOWN का GRAIN तो चूहों को ही चढेगा भेंट ||

वाणी गीत said...

बढ़िया है ...!

Anonymous said...

हिंगलिश में ही कविता लिखें TALK करते DAY रात,
हिंदी में लगी ZERO की बिंदी,ENGLISH नाचे हर बात

Roshani said...

:) मजेदार पोस्ट. नया प्रयोग अच्छा है.

Shiv said...

बहुत खूब!
अद्भुत प्रयोग किया है आपने.
मन प्रसन्न हो गया पढ़कर.

sidharth said...

english ho,ya ho hinlish baat smajh lo mero.....
limit consider karte hi thatya tends to zero.....

sidharth said...

bahut achhi rachna limit hamesa aadmi ko chhota bnata hai.......limit se hatkar itna achha karne ke lia badhai...

Manish Kumar said...

behtareen

चन्द्र कुमार सोनी said...

बहुत अच्छा लिखा हैं आपने.
हिन्दी और इंग्लिश की बढ़िया सेटिंग बिठाई हैं आपने.
बहुत उम्दा पोस्ट के लिए......
हार्दिक धन्यवाद.
WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM

डॉ० डंडा लखनवी said...

मित्रवर!
किन्ही दो अथवा दो से अधिक भाषाओं के पारस्परिक संचरण से तीसरी भाषा का जन्म होता है। हिंगलिश की उत्पत्ति भी इसी प्रकार हुई है। भाषा के मामले में दो भाषाओं के शब्द सहजता से बोले जा सकते हैं। लिखने की अपेक्षा बोलना सहज होता है परन्तु दो लिपियों के मेल से लिखना अथवा टाइप करना सहज नहीं होता है। यह ग्राहक के लिए सुग्राह्य भी नही है। हिंदी को विश्व भाषा के स्तर पर पहुंचाने के लिए देवनागरी लिपि को शीघ्रता से कार्य करने में सक्षम बनाए जाने की आवश्यकता है। आप अच्छे कवि हैं। आप की नकल और लोग करेंगे। आपके द्वारा लिपि के स्तर पर यह प्रयोग उसके मानकीकरण में बाधक हो सकता है। निवेदन है कि प्रयोग में आने वाले अन्य भाषा के शब्द को देवनागरी में लिख दिया करें।
सद्भावी-डॉ० डंडा लखनवी

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