Tuesday, February 22, 2011

करता वही कमाल

बेमतलब बातों से हटकर जिसका हृदय विशाल।
जगत में करता वही कमाल।।

यूँ तो सबका जीवन अपना अपने ढ़ंग से जीते।
कभी खुशी का अमृत मिलता जहर गमों का पीते।
हो आदत विकसित खुरपी सी बनते नहीं कुदाल।
जगत में करता वही कमाल।।

जिसको देखो अक्सर कहते जीवन तो उलझन है।
गलत प्रशासन, लोक-लाज संग परम्परा बन्धन है।
हर सवाल का समाधान जो बनते नहीं सवाल।
जगत में करता वही कमाल।।

सच्चाई के पथ पर चलना कितना मुश्किल काम।
और मुश्किल से टकराकर ही पाते सब परिणाम।
सुमन हटा दे सभी मुखौटे लेकर हाथ मशाल।
जगत में होगा तभी कमाल।।

12 comments:

गुड्डोदादी said...

श्यामल जी
चिरंजीव भवः

यूँ तो सबका जीवन अपना अपने ढ़ंग से जीते।
कभी खुशी का अमृत मिलता जहर गमों का पीते।

गीत होन या गजल,लेख हो या व्यंग सभी में संवेदनाएं ही निकलती है
बहुत बहुत आशीर्वाद

वन्दना said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (24-2-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

http://charchamanch.blogspot.com/

राज भाटिय़ा said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

गुड्डोदादी said...

सच्चाई के पथ पर चलना कितना मुश्किल काम।
और मुश्किल से टकराकर ही पाते सब परिणाम।


क्या लिक्खूँ भगवान सबका है


हर सवाल मेरा दुश्मन है
हर सवाल मेरा जीवन है

प्रवीण पाण्डेय said...

काश जगत में यह कमाल हो जाये।

संजय भास्कर said...

सार्थक और भावप्रवण रचना।

रजनीश तिवारी said...

सुमन हटा दे सभी मुखौटे लेकर हाथ मशाल।
जगत में होगा तभी कमाल।।
सारगर्भित, बहुत अच्छी रचना !

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

'सुमन हटा दे सभी मुखौटे लेकर हाथ मशाल

जगत में होगा तभी कमाल'

सार्थक सन्देश देती प्रभावशाली रचना

गुड्डोदादी said...

गुड्डोदादी (:)हर सवाल मेरा दुश्मन है
हर सवाल मेरा जीवन है
एक बहुत कड़वे सच की व्याख्या का वर्णनFeb 22यश लोफ़र साधना कृत चित्रकारit's true.....................Feb 22गुड्डोदादी (:)श्यामल जी
चिरंजीव भवः

यूँ तो सबका जीवन अपना अपने ढ़ंग से जीते।
कभी खुशी का अमृत मिलता जहर गमों का पीते।

गीत होन या गजल,लेख हो या व्यंग सभी में संवेदनाएं ही निकलती है
बहुत बहुत आशीर्वादFeb 23Read full reply
ज्योति डांग..... जिन्दगी दोस्त है .bahut khoob dadiFeb 23यश लोफ़र साधना कृत चित्रकारom sai Ram Om Sai Ram Om Sai Ram Om Sai Ram Om Sai
Ram Om Sai Ram Om Sai Ram Om Sai Ram Om Sai Ram Om Sai Ram Om Sai Ram
Om Sai Ram Om Sai Ram Om Sai Ram Om Sai Ram Om Sai Ram Om Sai Ram Om Sai
Ram Om Sai Ram Om Sai Ram Om Sai Ram Om Sai Ram Om Sai Ram Om Sai Ram
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Om Sai Ram Om Sai Ram Om Sai Ram Om Sai Ram Om Sai Ram Om Sai Ram Om Sai
Ram Om Sai Ram Om Sai Ram Om Sai Ram Om Sai Ram Om Sai RamRead full reply5:04 AM
Priyanka BharatiGOOD MORNING DADI ............सच्चाई के पथ पर चलना कितना मुश्किल काम।
और मुश्किल से टकराकर ही पाते सब परिणाम। BAHUT ACHI KAVITA HAIN DADI.......7:37 PM
यश लोफ़र साधना कृत चित्रकारpriyanka ji koi muskil nhi sacai pe chalna .....ha jarurat hai himat ki............7:40 PMPriyanka BharatiU R RIGHT
YASH JI............. मुश्किल से टकराकर ही पाते सब परिणाम।7:58 PM

ज्योत्स्ना पाण्डेय said...

कमाल की रचना.... कमाल करती हुई.
-सादर .

निर्झर'नीर said...

सच्चाई के पथ पर चलना कितना मुश्किल काम।
और मुश्किल से टकराकर ही पाते सब परिणाम।
सुमन हटा दे सभी मुखौटे लेकर हाथ मशाल।
जगत में होगा तभी कमाल।।

सुमन जी आप तो हमेशा ही कमाल करते है ..
इस बार भी कमाल किया है आपने

nawab said...

नमस्ते अंकल,
मेरे लिए, मेरी पीड़ी के लिए दो ज़रूरी सीख इस रचना में हैं...
1. बटोरने वाली 'कुदाल' या देने वाली 'खुरपी' - ये चयन ही हमारे जीवन को अर्थ देगा.
2. शिकायत से आगे समाधान की ओर बढ़ना है.

आप हमें ऐसे ही प्रेरित करते रहें...

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