Tuesday, March 8, 2011

वो घड़ी सुहानी दिल में है

फागुन आया, तुम न आये, यादों की कहानी दिल में है
जो जख्म मिले थे बिछुड़न के, उसकी भी निशानी दिल में है

इक तड़प मिलन की ले करके जब जब आता ऋतुराज यहाँ
जीने की भी है मजबूरी पर प्यास पुरानी दिल में है

सुख-दुख, मिलन-जुदाई तो आते रहते यह सुना बहुत
सहरा-सा जीवन है फिर भी चाहत की जवानी दिल में है

जब प्रियतम पास नहीं होते फागुन का रंग लगे फीका
आँगन के खालीपन में भी जीने की रवानी दिल में है

कोयल की मीठी कूक यहाँ, इक हूक जगा देती अक्सर
खुशबू संग सुमन मिले निश्चित वो घड़ी सुहानी दिल में है

11 comments:

ललित शर्मा said...

कोयल की मीठी कूक यहाँ, इक हूक जगा देती अक्सर
खुशबू संग सुमन मिले निश्चित वो घड़ी सुहानी दिल में है

सुंदर फ़ागुनी गजल के लिए आभार

दीप्ति शर्मा said...

bahut sunder rachna
bhadayi.

प्रवीण पाण्डेय said...

फागुन की सुन्दर अभिव्यक्ति।

वन्दना said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (10-3-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

http://charchamanch.blogspot.com/

गुड्डोदादी said...

सुख-दुख, मिलन-जुदाई तो आते रहते यह सुना बहुत
सहरा-सा जीवन है फिर भी लोगों की जुबानी दिल में है

बहुत ठसका मस्का
सुहागन अभागन हैं

राज भाटिय़ा said...

कोयल की मीठी कूक यहाँ, इक हूक जगा देती अक्सर
खुशबू संग सुमन मिले निश्चित वो घड़ी सुहानी दिल में है
बहुत ही सुंदर फ़ागुनी रंग मे रंगी आप की यह रस भरी रचना, धन्यवाद

ehsas said...

खुबसुरत रचना। दिल की तड़प को बखुबी शब्दों में ढाला है आपने।

Khare A said...

जब प्रियतम पास नहीं होते फागुन का रंग लगे फीका
आँगन के खालीपन में भी जीने की रवानी दिल में है

ati sundar

राधिका said...

फागुन आया, तुम न आये, यादों की कहानी दिल में है
जो जख्म मिले थे बिछुड़न के, उसकी भी निशानी दिल में है

बहुत सुंदर मधुमास का वर्णन

मनमोर में हुआ उजाला
यह किसने अद्धभुत गीत लिख डाला

अनामिका की सदायें ...... said...

sunder gazal.

रंजना said...

फागुनी छटा क्या खूब बिखेरी भाई जी....

बहुत बहुत सुन्दर....

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