Sunday, June 19, 2011

उपसंहार

तुम?

हाँ तुम!
मेरा जीवन, मेरी बन्दगी।
जिसे समझने में,
अभी तक ख़त्म हुई मेरी जिंदगी।

और मैं?

बस तेरे सामने मेरे यार
एक खुली किताब की तरह,
खुला है मेरा प्यार।
जहाँ विषय प्रवेश भी तुम हो,
और तुम ही उपसंहार।

14 comments:

संगीता पुरी said...

गजब !!

प्रवीण पाण्डेय said...

पूर्णस्य, पूर्णमादाय...

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

जहाँ बिषय प्रवेश भी तुम हो,
और तुम ही उपसंहार।

Kam shabdon me khoob kaha....Bahut Badhiya

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूबसूरत अभिव्यक्ति

दिगम्बर नासवा said...

कितना विरोधाभास है ... तुम और मैं ... अलग तो हैं कितने पर फिर भी एक हैं ...

Patali-The-Village said...

बहुत खूबसूरत अभिव्यक्ति|

सुमन'मीत' said...

kya kahun nishabd hun....

tum hi aadi tum hi ant ho mera...

Babli said...

वाह ! बहुत खूब लिखा है आपने! लाजवाब प्रस्तुती!
मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com/
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

रंजना said...

वाह....

***Punam*** said...

आदि और अंत....
बस तू.......!
सुन्दर
अति सुन्दर....!!

गुड्डोदादी said...

तुम?

हाँ तुम!
मेरा जीवन, मेरी बन्दगी।
जिसे समझने में,
अभी तक ख़त्म हुई जिंदगी।

और मैं?

बस तेरे सामने,
एक खुली किताब की तरह,
खुला है मेरा प्यार।
जहाँ बिषय प्रवेश भी तुम हो,
और तुम ही उपसंहार।
kavi shayamal suman
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PAWAN ARORA मेरा मजहब '' प्यार और वफ़ा ',
view more repliesLoading... PAWAN ARORA मेरा मजहब '' प्यार और वफ़ा ' और मैं?

बस तेरे सामने,
एक खुली किताब की तरह,
खुला है मेरा प्यार।

itne kam shabdo main purn pyar purn zindgi ka safar likhna bahut badi baat hai ..dadi maa salaam hai Read full reply58 minutes ago
guddo dadi माँ की शिक्षा संस्कार पवन बेटा
आशीर्वाद
धन्यवाद
मेरी लिखित नहीं हैं 41 minutes ago
SIYA Agrawal dadi ji , sadar pranam.......ye khuli kitab sab padh lete hai, lekin samjhta koi koi hi hai 38 minutes ago
guddo dadi माँ की शिक्षा संस्कार सिया जी

चल वे बुल्या ओथे चलिए जित्थे सानू कोई मन्ने
ऐथे साडी कोई नहीं सुन्दा सारे डोरे ते अन्ने 31 minutes ago
PAWAN ARORA मेरा मजहब '' प्यार और वफ़ा ' wah dadi kya baat kahi ....
चल वे बुल्या ओथे चलिए जित्थे सानू कोई मन्ने
ऐथे साडी कोई नहीं सुन्दा सारे डोरे ते अन्ने 27 minutes ago
SIYA Agrawal bilkul sahi baat kahi dadi ji aapne.........
ऐथे साडी कोई नहीं सुन्दा सारे डोरे ते अन्ने 22 minutes ago

गुड्डोदादी said...

Dadi Guddo


उपसंहार
तुम?
हाँ तुम!
मेरा जीवन, मेरी बन्दगी।
जिसे समझने में,
अभी तक ख़त्म हुई जिंदगी।
और मैं?
बस तेरे सामने,
एक खुली किताब की तरह,
खुला है मेरा प्यार।
जहाँ बिषय प्रवेश भी तुम हो,
और तुम ही उपसंहार।
अनुसरण कवि श्यामल जी अनुमति से

Posted by श्यामल सुमन at 7:02 PM 10 comments

Labels: कविता




Like · · Share · Edit · 21 hours ago


Nagendra Pareek, Joginder Rohilla, Gurmeet Singh and 4 others like this..



Dadi Guddo प्रीती बिट्टी,निहारिका बिट्टी धन्यवाद
21 hours ago · Like · 1 person.



Dadi Guddo ही रे जोगी पोता तने यो दादी आसिरबाद सीसाँ देवे कित ने गया ब्याह करा लियो के
38 minutes ago · Like.



Dadi Guddo गुरमीतसिंह बेटा जी धन्यवाद
37 minutes ago · Like.



Dadi Guddo नरेंदर बेटा आशीर्वाद
37 minutes ago · Like.



Dadi Guddo प्रीती बिट्टो धन्यवाद
36 minutes ago · Like.



Dadi Guddo दीपा भूरानी जी धन्यवाद
36 minutes ago · Like.







Nagendra Pareek बहुत सुन्दर दादी सा .. आपका चरण स्पर्श कर रहे है
34 minutes ago · Like.



Dadi Guddo नागेन्द्र सुपुत्र आशीर्वाद कैसे हो बेटा घर परिवार में कुशल मंगल मेरा आशीर्वाद कहें घर

फेसबुक पर चित्र के साथ

अल्पना वर्मा said...

'जहाँ बिषय प्रवेश भी तुम हो,
और तुम ही उपसंहार।'
अब इस से अधिक प्रेम कोई कैसे कर सकता है?
बेहद खूबसूरत रचना...अद्भुत अभिव्यक्ति!

jio said...

मैं ऊँचा होता चलता हूँ
उनके ओछेपन से गिर-गिर
उनके छिछलेपन से खुद-खुद
मैं गहरा होता चलता हूँ

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