अपना गीत - अपना स्वर
कृपया वीडियो को क्लिक करके सुने - नीचे इसी गीत के बोल भी हैं
झील सी गहरी लख आँखों में, नील-सलिल अभिराम।
निहारे नयन सुमन अविराम।।
कुछ समझा कुछ समझ न पाया, बोल रही क्या आँखें?
जो न समझा कहो जुबाँ से, खुलेगी मन की पाँखें।
लिपट लता-सी प्राण-प्रिये तुम, भूल सभी परिणाम।
निहारे नयन सुमन अविराम।।
दर्द बहुत देता इक कांटा, जो चुभता है तन में।
उसे निकाले चुभ के दूजा, क्यों सुख देता मन में।
सुख कैसा और दुःख है कैसा, नित चुनते आयाम।
निहारे नयन सुमन अविराम।।
भरी दुपहरी में शीतलता, सखा मिलन से चैन।
सिल जाते हैं होंठ यकायक और बोलते नैन।
कठिन रोकना प्रेम-पथिक को, प्रियतम हाथ लगाम।
निहारे नयन सुमन अविराम।।
Thursday, July 14, 2011
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रचना में विस्तार
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गन्दा फिर तालाब
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मगर बेचना मत खुद्दारी
यूँ तो सबको है दुश्वारी एक तरफ मगर बेचना मत खुद्दारी एक तरफ जाति - धरम में बाँट रहे जो लोगों को वो करते सचमुच गद्दारी एक तरफ अक्सर लो...
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लेकिन बात कहाँ कम करते
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विश्व की महान कलाकृतियाँ-
14 comments:
bahut badiya.......
pichhle dino surat or vishakhapatnam ke karykramo me Albela Khatri se bhent hui thi....Aapki mancheey prastuti ki taareef kar rahe the... badhai swikaren....
दर्द बहुत देता इक कांटा, जो चुभता है तन में।
उसे निकाले चुभ के दूजा, क्यों सुख देता मन में।
बहुत गहराई हैं शब्दों में .....
वाह मजा आ गया जी गीत सुनके। बधाई।
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जीवन का सूत्र...
NO French Kissing Please!
भावमय सुंदर गीत.
कोमलता से पूर्ण अद्भुत रचना।
bahut sundar geet...aapki aawaj me sunne ka mza aaya
बहुत सुन्दर गीत मजा आ गया
bahut hiacha laga sunkar,,,
jai hind jai bharat
बहुत सुन्दर रचना...महोदय आपकी यह उत्कृष्ट रचना दिनांक 19-07-2011 को मंगलवारीय चर्चा में चर्चा मंच पर भी होगी कृपया आप चार्चा मंच http://charchamanch.blogspot.com/ पर पधार कर अपने सुझावों से अवगत कराएं
bahut hi sundar!
bahut hi behatrin abhi byakti.badhaai aapko.
please visit my blog.thanks.
अच्छी प्रस्तुति
बहुत गहराई हैं शब्दों में ....
लिकं हैhttp://sarapyar.blogspot.com/
आपको मेरी हार्दिक शुभकामनायें.
अगर आपको love everbody का यह प्रयास पसंद आया हो, तो कृपया फॉलोअर बन कर हमारा उत्साह अवश्य बढ़ाएँ।
aaj aapka geet sun nahi paya..manbhavan geet..kanta ka prayog bahut bakhoobi kiya hai
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