Thursday, November 17, 2011

अलग अलग है

अलग नहीं है किसी की दुनिया मगर जिन्दगी अलग अलग है
भले वो खोये हैं रौनकों में मगर सादगी अलग अलग है

यूँ मुस्कुराते मिलेंगे चेहरे कहीं खुलापन कहीं पे पहरे
कई जो दिखते हैं मुतमइन पर वहाँ तिश्नगी अलग अलग है

वो रोज मिलते हैं मुझसे आ के चले भी जाते हैं दिल जला के
बहुत ही नाजुक खिंचाव उस पे नई ताज़गी अलग अलग है

मकान जितने बड़े बड़े हैं बिना प्यार बेज़ान खड़े हैं
इधर है कोशिश दिलों को जोड़ें उधर बानगी अलग अलग है

धरम अलग पर है साथ जीना कभी खुशी और ग़मों को पीना
हैं एक मालिक सभी सुमन के मगर बंदगी अलग अलग है

14 comments:

गुड्डोदादी said...

श्यामल
आशीर्वाद
बहुत ही गजब की गजल दिल को छू गई
पास होती तो दादा मुनि अशोक कुमार जी की दुअन्नी देती

मुस्कुराते मिलेंगे चेहरे कहीं खुलापन कहीं पे पहरे
कई जो दिखते हैं मुतमईन पर वहाँ तिश्नगी अलग अलग अलग है

प्रवीण पाण्डेय said...

गजब रचना।

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

बहुत खूब सर!

सादर

अनुपमा पाठक said...

मकान जितने बड़े बड़े हैं बिना प्यार बेज़ान खड़े हैं
इधर है कोशिश दिलों को जोड़ें उधर बानगी अलग अलग है
वाह!
बहुत सुंदरता से सच्चाई व्यक्त हुई है!

kshama said...

वो रोज मिलते हैं मुझसे आ के चले भी जाते हैं दिल जला के
बहुत ही नाजुक खिंचाव उस पे नई ताज़गी अलग अलग है

मकान जितने बड़े बड़े हैं बिना प्यार बेज़ान खड़े हैं
इधर है कोशिश दिलों को जोड़ें उधर बानगी अलग अलग है
Wah! Kya ashaar hain!

Pallavi said...

धरम अलग पर है साथ जीना कभी खुशी और ग़मों को पीना
हैं एक मालिक सभी सुमन के मगर बंदगी अलग अलग है
वाह बहुत खूब और एक दम सही बात कहती हुई खूबसूरत प्रस्तुति.... आभार समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है।
http://mhare-anubhav.blogspot.com/

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

मकान जितने बड़े बड़े हैं बिना प्यार बेज़ान खड़े हैं
इधर है कोशिश दिलों को जोड़ें उधर बानगी अलग अलग है

Behtreen Panktiyan...

webseoservices said...

बहुत अच्छा ब्लाग है महत्वपूर्ण जानकारी के लिए धन्यवाद

sushma 'आहुति' said...

अलग नहीं है किसी की दुनिया मगर जिन्दगी अलग अलग है
भले हैं खोये वो रौनकों में मगर सादगी अलग अलग है.........बहुत ही लाजवाब प्रस्तुती.....

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

सुन्दर रचना सर,
सादर बधाई...

Rajput said...

मकान जितने बड़े बड़े हैं बिना प्यार बेज़ान खड़े हैं
इधर है कोशिश दिलों को जोड़ें उधर बानगी अलग अलग है
आज के माहोल में फिट बैठती है आपकी रचना

anju(anu) choudhary said...

waha bahut khubsurat gazal....

नीला said...

मकान जितने बड़े बड़े हैं बिना प्यार बेज़ान खड़े हैं
इधर है कोशिश दिलों को जोड़ें उधर बानगी अलग अलग है

वाह ..
जीना तेरी गली मारना तेरी गली में

shashi purwar said...

bahut sunder . bahut khoob .badhi aapko

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