आने वाले कल का स्वागत, बीते कल से सीख लिया
नहीं किसी से कोई अदावत, बीते कल से सीख लिया
भेद यहाँ पर ऊँच नीच का, हैं आपस में झगड़े भी
ये दुनिया तो सिर्फ मुहब्बत, बीते कल से सीख लिया
हंगामे होते, होने दो, इन्सां तो सच बोलेंगे
सच कहना है नहीं इनायत, बीते कल से सीख लिया
यह कोशिश प्रायः सबकी है, हों मेरे घर सुख सारे
क्या सबको मिल सकती जन्नत, बीते कल से सीख लिया
गर्माहट टूटे रिश्तों में, कोशिश हो, फिर से आए
क्या मुमकिन है सदा बगावत, बीते कल से सीख लिया
खोज रहा मुस्कान हमेशा, गम से पार उतरने को
इस दुनिया से नहीं शिकायत, बीते कल से सीख लिया
भागमभाग मची न जाने, किसको क्या क्या पाना है
सुमन सुधारो खुद की आदत, बीते कल से सीख लिया
Friday, December 30, 2011
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9 comments:
बहुत ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने नये साल पर! आपको एवं आपके परिवार के सभी सदस्यों को नये साल की ढेर सारी शुभकामनायें !
वाह सुमन जी बहुत सुंदर.
श्यामल
आशीर्वाद
सबकी है कोशिश प्रायः कि, मेरे घर हों सुख सारे
क्या सबको मिल सकती जन्नत, बीते कल से सीख लिया
बहुत कटाक्ष पूर्ण अनोखी रचना
दुनियाँ रंग रंगीली बत्तीस दांतों में जिव्हां ने रहना सीख लिया
बहुत खूबसूरत रचना……………आगत विगत का फ़ेर छोडें
नव वर्ष का स्वागत कर लें
फिर पुराने ढर्रे पर ज़िन्दगी चल ले
चलो कुछ देर भरम मे जी लें
सबको कुछ दुआयें दे दें
सबकी कुछ दुआयें ले लें
2011 को विदाई दे दें
2012 का स्वागत कर लें
कुछ पल तो वर्तमान मे जी लें
कुछ रस्म अदायगी हम भी कर लें
एक शाम 2012 के नाम कर दें
आओ नववर्ष का स्वागत कर लें
भूत कहीं एकान्त पड़ा है,
तो भविष्य की बमचक क्यों
बहुत सुन्दर प्रस्तुति वाह!...नववर्ष की मंगल कामना
आने वाले कल का स्वागत, बीते कल से सीख लिया
कोई करे क्यों यहाँ अदावत, बीते कल से सीख लिया
Behad sundar!
Aapko naya saal bahut,bahut mubarak ho!
बहुत ही खूबसूरत गज़ल है सर... सादर बधाई और
नूतन वर्ष की सादर शुभकामनाएं
सार्थक प्रस्तुति ।
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें सुमन जी ।
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