Sunday, March 11, 2012

आशा का दीपक बुझाया ना जाये

दिल यूँ किसी का जलाया ना जाये
मुहब्बत में आँसू बहाया ना जाये

बिकते हैं मुस्कान बाज़ार में अब

हँसते हुए को रुलाया ना जाये

सबके विचारों का चश्मा अलग है

अँधे को दर्पण दिखाया ना जाये

चालाक ही खुद को नादान कहते

आगे से गुर ये सिखाया ना जाये

दिल में सुमन होगा कल और बेहतर
आशा का दीपक बुझाया ना जाये

16 comments:

कविता रावत said...

दिल में सुमन होगा कल और बेहतर
आशा का दीपक बुझाया ना जाये
..sach aasha hi to jo jeena sekhati hai..
bahut sundar rachna
Holi ki hardik shubhkamnayen!

नीला झा said...

दिल यूँ किसी का जलाया ना जाये
आशा का दीपक बुझाया न जाए

आज जीने की तमन्ना है

Anupama Tripathi said...

दिल में सुमन होगा कल और बेहतर
आशा का दीपक बुझाया ना जाये

सुंदर सोच ...

RITU said...

नहीं बुझेगा ये आशा का दीपक..
आपके सुन्दर शब्द जो साथ हैं ..
:)
kalamdaan.blogspot.in

काजल कुमार Kajal Kumar said...

वाह जी सुंदर

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

सुन्दर ग़ज़ल सर...
सादर.

expression said...

बहुत सुन्दर.....
सरलता से कही गयी गहन बातें...

सादर.

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

wakai kisi ka dil nahi jalana chahiye...hamesha kee tarah shandaar prabah me bahti ghazal..main is rawangi ka kayal hoon..sadar badhayee aaur amantran ke sath

परी देश की शह्जादी said...

sundar rachna

परी देश की शह्जादी said...

sundar rachna............

रंजना said...

सच है, संताप के अन्धकार में आशा का दीपाक जरूर जलाये रखना चाहिए...

बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल रची भाईजी..बहुत बहुत सुन्दर.

प्रवीण पाण्डेय said...

बेहतरीन अभिव्यक्ति..

mridula pradhan said...

bahut achchi lagi.......

Poonam Agrawal said...

Behtareen....

संजय भास्कर said...

बहुत बहुत खुबसूरत लिखी है यह गजल ...हर शेर बधाई के लायक है ....

भूला आशिक said...

मैं ग़ज़लों और नज्मों में तुम्हारी बात लिखता हूँ, किसी बेजान कागज़ पर अपने जज़्बात लिखता हूँ,

मैं शायर हूँ मेरी मजबूरियां भी बंदिशों की हैं,
इसी खातिर अश्कों को मैं बरसात लिखता हूँ..!

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