Thursday, December 19, 2013

चुना आपने 'आप' को

आम आदमी ने सुमन, काम किया है खास।
खास आदमी को झटक, हिला दिया विश्वास।।

दिल्ली की गद्दी मिले, हुआ अनैतिक मेल।
देख सुमन गद्दी वही, ना चढ़ने का खेल।।

दिल्ली को वरदान या, यह चुनाव अभिशाप।
चुना आपने 'आप' को, सुमन भुगत लें आप।।

अलग ढंग से 'आप' का, देखो सुमन प्रयोग।
पत्रकार, नेता सहित, चकित हुए हैं लोग।।

सुमन खड़ा यूँ सामने, झाड़ू लेकर भूत।
भीतर भीतर रो रहे, परम्परा के दूत।।

सेवक, शासक बन गया, बने हुए श्रीमान।
अब शासक होगा सुमन, जिनके है ईमान।।

प्यार दिया है आपने, है चर्चा में 'आप'।
सुमन आस है 'आप' से, मिटा सके सब पाप।।

7 comments:

राजीव कुमार झा said...

बहुत सुन्दर .
नई पोस्ट : मृत्यु के बाद ?

राजीव कुमार झा said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (21-12-2013) "हर टुकड़े में चांद" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1468 पर होगी.
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है.
सादर...!

सुशील कुमार जोशी said...

सटीक !

कालीपद प्रसाद said...

बहुत सुन्दर !
नई पोस्ट मेरे सपनों का रामराज्य ( भाग २ )

abhishek shukla said...

sundar prastuti.....

abhishek shukla said...

parivartan ki ek lahar...jo aane wale sukhad bhavishya ki oor ishara karti hai...sarthak prastutu..abhaar

प्रवीण पाण्डेय said...

सामयिक और सुन्दर..

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विश्व की महान कलाकृतियाँ- पुन: पधारें। नमस्कार!!!