Sunday, May 20, 2018

पानी हूँ मुझको अपना ले

अपने   जैसा   मुझे  बना  ले
पानी  हूँ  मुझको  अपना  ले

दुनिया  सजती  अपनेपन से
अपने   रूठे   उसे   मना  ले

हीरे  -  मोती   भी  पत्थर  हैं
सदा  प्यार  का  तू  गहना ले

इक अनाज को ही चुनना तो
सभी  छोड़  तू सिर्फ चना ले

देख  कसाई  कैसे  खुद  को
भक्तों - सा  चोला  पहना ले

सीख  हार  से  हार  मिलेगा 
हार  अगर  उपहार  बना ले

लिखना है तो पढ़ो सुमन तू
दूजे  की  अच्छी  रचना  ले 

4 comments:

HARSHVARDHAN said...

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन जन्म दिवस - सुमित्रानंदन पंत और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

बहुत बढिया पोस्ट, कैसन हो सुमन जी। :)
जानिए क्या है बस्तर का सल्फ़ी लंदा

Meena sharma said...

वाह ! सुंदर !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (22-05-2017) को "आम और लीची का उदगम" (चर्चा अंक-2978) पर भी होगी।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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