Wednesday, July 25, 2018

बोली जब बचकानी हो

यादें भले पुरानी हो
नूतन रोज कहानी हो

देवराज कोई होगा
इक परियों की रानी हो

छोटे बच्चों के संग में
दादा, दादी, नानी हो

और बुजुर्गों की खातिर
आँखों में भी पानी हो

लगे दूर जाना अच्छा
बेटी जहाँ सयानी हो

लगता है कितना प्यारा
बोली जब बचकानी हो

गम से लड़ते रहने से
चाल सुमन मस्तानी हो

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