Sunday, July 29, 2018

तू पत्थर सी मूरत बन जा

कली कभी तू मत घबराना,
बन के सुमन तुझे है आना,
कोई आंसू देख सके ना, तू पत्थर सी मूरत बन जा।
वक्त से ऐसे लड़ते रहना, कल की एक जरूरत बन जा।।

धरती जैसे इस जीवन में सुख दुख घूम रहा है।
संकट में जो आज उसी को कल सुख चूम रहा है।
जीत समय को तू ऐसे कि सबकी प्यारी सूरत बन जा।।
कल की एक जरूरत बन जा, तू पत्थर सी मूरत बन जा।।

सीता का दुख और द्रोपदी अपनी महक लिए है।
जितना भी तपता है सोना उतनी चमक लिए है।
वैसे जूझ, बसो यादों में, सबके लिए मुहुरत बन जा।।
कल की एक जरूरत बन जा। तू पत्थर सी मूरत बन जा।। 

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