Saturday, January 12, 2019

आरक्षण का दाँव मुसाफिर

कभी रुके ना पाँव मुसाफिर
भले शहर या गाँव मुसाफिर
हर चुनाव में खेल रहे सब
आरक्षण का दाँव मुसाफिर

               राम नाम की लूट मुसाफिर
               गठबंधन की छूट मुसाफिर
               किस कारण से कल के साथी
               दूर गए अब टूट मुसाफिर

चला रहे सरकार मुसाफिर
बाँट रहे तकरार मुसाफिर
देश लुटा फिर नहीं चाहिए
ऐसा चौकीदार मुसाफिर

               सबके अपने गीत मुसाफिर
               सबकी चाहत जीत मुसाफिर
               इस चुनाव की वैतरणी में
               दुश्मन दिखते मीत मुसाफिर

जोड़ रहे हैं हाथ मुसाफिर
टेक रहे हैं माथ मुसाफिर
कौन जानता, कौन रहेगा
इस चुनाव में साथ मुसाफिर

               बाँट रहे जो न्यूज मुसाफिर
               जनता है कनफ्यूज मुसाफिर
               गजब चलन अब वो करते हैं
               खुलेआम एब्यूज मुसाफिर

भले जीत या हार मुसाफिर
हो आपस में प्यार मुसाफिर
बची रहे मानवता अपनी
सुमन करे इजहार मुसाफिर 

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