Sunday, May 31, 2020

अपना देश, प्रवासी कहते?

अपना देश, प्रवासी कहते?
सच को भी आभासी कहते?

जिसने छल से पाया वैभव
 उसको भी विश्वासी कहते?

भूख मिटाती, प्यास मिटाती
धरती को क्यों प्यासी कहते?

राज पाट, भोगे सुख सारे
उसको भी सन्यासी कहते?

सारी सुविधा जिनसे मिलती
उसे दास क्यों दासी कहते?

झूठे नेता, मगर शान में
बातें अच्छी खासी कहते

पांच दशक से सुमन शहर में
उसे गांव का वासी कहते?

2 comments:

Meena Bhardwaj said...

सादर नमस्कार,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा मंगलवार (02-06-2020) को
"हमारे देश में मजदूर की, किस्मत हुई खोटी" (चर्चा अंक-3720)
पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है ।

"मीना भारद्वाज"

Sudha devrani said...

वाह!!!
बहुत खूब ...
राज पाट, भोगे सुख सारे
उसको भी सन्यासी कहते?

हाल की कुछ रचनाओं को नीचे बॉक्स के लिंक को क्लिक कर पढ़ सकते हैं -
विश्व की महान कलाकृतियाँ- पुन: पधारें। नमस्कार!!!