Wednesday, September 30, 2026

हार मिली कि हार मिला?

हार  मिली  कि  हार मिला, दोनों है स्वीकार।
एक  हार  में   सीख  तो,  एक  हार  श्रृंगार।।

हार  जीत कुछ भी नहीं, यह मन का विज्ञान।
हर चीजों का स्वाद है, अलग अलग श्रीमान।।

पहली  सीढ़ी  जीत  की, मिला  वहाँ जो हार।
उसी  हार  की  सीख  से, जीत  मिले उपहार।।

हारे  को  हरिनाम  क्यों, क्या उनका ये काम।
रोक  उसे  जो जीत  कर,  बेच  रहे  हैं  नाम।।

गिरतीं  चढ़तीं  चींटियां, पर  जातीं  हैं  जीत।
यह  जीवन दर्शन सुमन, हृदय बसा लो मीत।

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