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Sunday, May 31, 2020

अपना देश, प्रवासी कहते?

अपना देश, प्रवासी कहते?
सच को भी आभासी कहते?

जिसने छल से पाया वैभव
 उसको भी विश्वासी कहते?

भूख मिटाती, प्यास मिटाती
धरती को क्यों प्यासी कहते?

राज पाट, भोगे सुख सारे
उसको भी सन्यासी कहते?

सारी सुविधा जिनसे मिलती
उसे दास क्यों दासी कहते?

झूठे नेता, मगर शान में
बातें अच्छी खासी कहते

पांच दशक से सुमन शहर में
उसे गांव का वासी कहते?

जीवन चलता है सपनों से

ऐ दिल तू प्यार नहीं करना, धोखे कितने इस रस्ते में?
अक्सर वे देते जख्म जिन्हें, कहते अपने इस रस्ते में।

साहिल से सागर देख जरा, केवल पानी ही पानी है।
क्या प्यास बुझी तेरी चाहे, पानी जितने इस रस्ते में।

कहते सब जीवन को सपना, जीवन चलता है सपनों से।
जीवन जबतक देखो हरदम, नूतन सपने इस रस्ते में।

संघर्ष बहुत जीवन में तो, फिर प्यार भी बहुत जरूरी है।
इक जैसा मान रखो तो गम, लगता बंटने इस रस्ते में।

अपना जीवन हो कुन्दन सा, नित सीख सुमन तू जीवन से।
फिर अंधियारा इस जीवन से, लगता छंटने इस रस्ते में।

Thursday, May 21, 2020

विश्व, युद्ध की ओर बढ़ा है

कोरोना का शोर बढ़ा है
विश्व, युद्ध की ओर बढ़ा है

पूंजीवादी अहंकार भी
जगह जगह घनघोर बढ़ा है

मर्यादा की भाषा छूटी
गिनती में मुंहजोर बढ़ा है

जो परिपूर्ण लगे हैं धन से
उन लोगों में चोर बढ़ा है

शक्ल भले इन्सानी है पर
कितना आदमखोर बढ़ा है

दुखियों की चिन्ता खबरों में
बता, कहाँ कमजोर बढ़ा है

देख सुमन इस आफत में भी
घर घर रिश्वतखोर बढ़ा है

हर मीठे सुर खातिर आघात जरूरी है

सर्दी, गर्मी थोड़ी बरसात जरूरी है
हर मीठे सुर खातिर आघात जरूरी है

वो रिश्ते क्यूँ ढोना जो रिसने लग जाए
आपस में जोड़े वो जज्बात जरूरी है

मिलते जीवन में नित उबड़ खाबड़ रस्ते
गर चलना तो होना निष्णात जरूरी है

क्यूँ बातें मतलब की मतलब से करते हम
जबकि बिन मतलब भी कुछ बात जरूरी है

हो भले उमर जितनी पर खुशियाँ पाने को
बस अपनेपन का इक दिन-रात जरूरी है

हालात जहां बदतर फिर उसे बदलने को
हर शख्स में आशा की सौगात जरूरी है

खुद से, तुमसे, सबसे जो सीखा रोज सुमन
कुछ अनुभव की बातें बेबात जरूरी है

Wednesday, May 13, 2020

महफिल में मरहम बाँटे है

नहीं  किसीका  गम  बाँटे है
सब  अपना  परचम  बाँटे है

हाल  अभी  बेहाल खबर में
प्यासे  को  शबनम  बाँटे  है

लोगों को घायल करते फिर 
महफिल  में  मरहम  बाँटे है

लोक - लुभावन   वादे  ऐसे
ज्यों  कुदरत  मौसम बाँटे है

छीन उजाला आमजनों का
फिर घर घर क्य तम बाँटे है

हम  गरीब जीने को हरदिन
आपस  में  दमखम  बाँटे है

बाँट  चेतना, प्यार  सुमन तू
जितना  बाँटो,  कम  बाँटे है

Tuesday, April 28, 2020

दुश्मन सा बिस्तर लगता है

घर के बाहर डर लगता है
और जेल सा घर लगता है

किसको कौन सहारा देगा
सहमा सा मंजर लगता है

चहल पहल से, दूर जश्न से
सूना गांव, शहर लगता है

आंखों में है नींद मगर क्यों
दुश्मन सा बिस्तर लगता है

बस बीमारी, मौत खबर में
सुनना खबर, जहर लगता है

जीत हमारी निश्चित होगी
हाल अभी जर्जर लगता है

सबके साथ सुमन चल, चाहे
जितना अगर मगर लगता है

वो सूरज हाथ में लेकर

हमारे  पास  रहकर  वो, हमारा  क्यों  नहीं  होता?
सितम करता मगर हमसे, किनारा क्यों नहीं होता?

सभी बच्चे बनें काबिल, हरेक माँ-बाप की चाहत
उसी  माँ-बाप  का  बच्चा, सहारा क्यों नहीं होता?

वो  सूरज  हाथ  में लेकर, उजाला बाँटने निकला
मगर उसका ही घर रौशन, दुबारा क्यों नहीं होता?

जमीं  को  चीरकर  सबके  लिए, रोटी  उगाए जो
वही जीते  विवशता  में, गुजारा  क्यों नहीं होता?

वो देखो आसमां झुकता, जमीं से प्यार करने को
सुमन के भाग्य का ऐसा सितारा क्यों नहीं होता?

Sunday, April 12, 2020

आया जाया ना कर

सभी अपने, किसी को पराया ना कर
प्यार दिल में रखो आया जाया ना कर

सूनी गलियां, सड़क और मुहल्ले सभी
आस मिलने की दिल में लगाया ना कर

हौसला से बुरा वक्त टल जाता है
अपने डर से किसी को डराया ना कर

नासमझ हैं सभी तू समझदार है
बात उल्टी किसी को बताया ना कर

हैसियत जिसकी जितनी मदद को बढ़े
बेबसी तू किसी की भुनाया ना कर

सब मिल के लड़ेंगे तभी जीत है
बेवजह तू सियासत घुसाया ना कर

इस चमन में सुमन फिर बहार आएगी
जानवर, आदमी को बनाया ना कर

इस आफत में

बहुत उदासी इस आफत में
चाल सियासी इस आफत में

जबकि है तकलीफ में जनता
अच्छी खासी इस आफत में

भूख मिटाने बच्चों की माँ
बनती दासी इस आफत में

रोटी छोड़ो पानी तक को
जनता प्यासी इस आफत

लड़ो सुमन बस ये मत कहना
दुख आभासी इस आफत में

Wednesday, April 8, 2020

ऐसा आजतलक ना देखा

व्यर्थ लगे सब अर्जित साधन ऐसा आजतलक ना देखा
दहशत में है सबका जीवन ऐसा आजतलक ना देखा

धरती से मंगल तक पहुंचे पर क्या मंगल हो पाया?
खोया खोया है सबका मन ऐसा आजतलक ना देखा

लकवाग्रस्त किया दुनिया को छोटे इक विषाणु ने
खुद से कैद किया खुद का तन ऐसा आजतलक ना देखा

कौन सहारा किसको देगा केवल बात सहारा है
याद किया अपना भी बचपन ऐसा आजतलक ना देखा

आपस में सहयोग परस्पर करो सुमन है जीना तो
सब घर में पर सूना आंगन ऐसा आजतलक ना देखा

लड़ लेंगे फिर कभी बाद में

लड़ लेंगे फिर कभी बाद में
वक्त बुरा है, चलें साथ में

पूरी दुनिया पर ये आफत
जिसकी चर्चा बाट घाट में

बन्द करो घर के दरवाजे
महमारी है ताक झांक में

पद, पैसा, मजहब ना जाने
कदम कदम पर मौत घात में

जीत है मुमकिन प्रेम भाव से
क्यूं लड़ना फिर बात बात में

प्रियजन से बतियाते रहना
और नहीं कुछ अभी हाथ में

सावधान रहना, मत डरना
बोझ बढ़ेगा सुमन माथ में

सहयोग वही करते

अपने वश में सबकुछ क्यों दम्भ ये पाले हैं
सब बन्द घरों में अब बाहर में ताले हैं

खांसी भी हुई हल्की, कोरोना के डर से
अपनों ने अपनों को झट घर से निकाले हैं

इस बन्दी के कारण आफत आयी उन पे
जो रोज कमाते हैं, क्या उनको निवाले हैं

ये बात है राहत की कुछ लोग बढ़े आगे
जो बेबस लोगों को मिलजुल के सम्भाले हैं

नहीं सुमन बचा कोई मानवता संकट में
सहयोग वही करते जो दिल से निराले हैं

लड़ेंगे फिर सभी मिल के

हिदायत है ये सरकारी चिकित्सक की हिदायत है
रहो प्यारे सभी बच के ये कोरोना कयामत है

विदेशों में बहुत फैला हजारों जान पे आफत
मगर भारत में कमतर तो खुदा की ये इनायत है

इधर ज्ञानी उपजते जा रहे वाट्सअप की दुनिया में
नहीं गम्भीर वो दिखते यही उनसे शिकायत है

बचा हो प्यार दिल में तो ये दूरी हम भी सह लेंगे
सलामत सब रहे जग में खुदा से ये इबादत है

सदा हालात से लड़ के सुमन दुनिया बढ़ी अबतक
लड़ेंगे फिर सभी मिल के भले जैसी भी आफत है

कर लेंगे तुमसे रुसवाई कोरोना

तेरी चाल समझ ना आई कोरोना
खड़ा सामने है दुखदाई कोरोना

जमकर लूटा हमसब ने ही कुदरत को
तब अपनी औकात दिखाई कोरोना

मानो सबकी खुशियों को ही ग्रहण लगा
नहीं कहीं बजती शहनाई कोरोना

सूनी सड़कें और शहर भी है सूना
बसी उदासी है अंगनाई कोरोना

सभी सजग हैं सुमन अभी भारतवासी
कर लेंगे तुमसे रुसवाई कोरोना 

Monday, March 16, 2020

क्या क्या खेल दिखाती कुर्सी?

सबके  मन  को  भाती  कुर्सी
क्या क्या खेल दिखाती कुर्सी

अपने    बन   सकते   बेगाने
जहाँ   बीच   में  आती  कुर्सी

किस्सा  कुर्सी का  दशकों से
रहकर   मौन   सुनाती  कुर्सी

जो  भाषण  दें  नैतिकता पर 
उनको  भी  अजमाती  कुर्सी

तनकर खड़े रहे जो कल तक
अक्सर  उन्हें  झुकाती  कुर्सी

लिखता समय सभी की बातें
जिनको  भी  बहकाती कुर्सी

लालच छोड़ सुमन फटकारो
जब  जब  ये  इठलाती कुर्सी

कौन सुनेगा अर्ज सभी के?

दर्द   सभी  के,  मर्ज  सभी  के
होते   अक्सर   दर्ज   सभी  के

यूँ  तो  मिहनत  सब करते पर
क्यों सर  पे  है  कर्ज  सभी के

जब    सरकारें    बैंक   लूटती
कौन   सुनेगा   अर्ज  सभी  के

इक  गलती  दिल्ली  से  होती
कितने   होते   हर्ज   सभी  के

जो  सवाल  शासक  से करते
उसमें  शामिल  गर्ज  सभी के

समाचार,   सरकारी  -  भाषा 
मिलते  कितने  तर्ज  सभी के

सभी सुमन को क्यों समझाते
देखो  मत  क्या फर्ज सभी के

होली का मौसम उदास है

हर ॠतुओं का मजा खास है
होली का मौसम उदास है

है विकास का शोर बहुत पर
आया क्या सचमुच विकास है

खेल आंकड़ों का दिखलाना
ये विकास का बस कयास है

देश वही बढ़ता है आगे
अमन-चैन का जहां वास है

डर में कुछ तो कहीं हताशा
साहिब के घर मचा रास है

लाखों गांव - घरों में देखो
अंधियारा करता निवास है

करो सुमन जो काम तुम्हारा
फिर तो जीवन में सुवास है

तू जुल्फों में लगा देना

जगह मेरी तेरे दिल में उसे दिल में दबा देना
मेरी यादें सभी चुपके से आँसू में बहा देना

मुहब्बत के सभी किस्से मजे लेकर के सुनते जो
हँसी को ओढ़ कुछ यूं कि उम्मीदों को जगा  देना

किसी का दिल जहाँ टूटा वो अश्कों में नहा लेते
तू बारिश में नहाकर के वो आँसू भी छुपा देना

समय का फेर ऐसा है कि हम तुम मिल नहीं पाए
मगर अगले जनम में ऐ खुदा हमको मिला देना

नहीं मुमकिन कोई बाँधे मुहब्बत और खुशबू को
सुमन टूटे जो शाखों से तू जुल्फों में लगा देना 

तमाशा ना कर सके

ताना मिला है अक्सर अच्छा ना कर सके
गलती यही किसी से धोखा ना कर  सके

सहलाया दर्द सबके गर्दिश के दिनों में
उस दर्द में कभी भी इजाफा ना कर सके

चुपके से जब किसी ने था प्यार जताया
सच है किसी से झूठा वादा ना कर सके

रस्ता कठिन है सच का ये जानते हुए
उस राह पे चले पर दिखावा ना कर सके

किसकी है कौन सुनता सब बोलते सुमन
अपनी ही हकीकत का तमाशा ना कर सके

Saturday, February 22, 2020

आंखों से पैगाम मिला है

अब जा कर आराम मिला है
करने को कुछ काम मिला है

था वसंत जो अबतक फीका
आंखों से पैगाम मिला है

वक्त प्यार के कम होते पर
मुझको आठो याम मिला है

पानी भरा गिलास भले हो
लगा छलकता जाम मिला है

जाम प्यार का पी ले उसको
जीवन रंग तमाम मिला है

लगता रावण की बस्ती में
मुझे अचानक राम मिला है

खुशबू बांटो डूब प्यार में
तुझे सुमन जो नाम मिला है
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