Wednesday, June 3, 2009

नारी

रूप तेरे हजार, तू सृजन की आधार।
माँ की ममता है तुझमें, बहन का भी प्यार।।

बन के शक्ति - स्वरूपा, किया है जो काम।
फिर भी अबला जगत ने, दिया तुझको नाम।
तेरी करूणा अपार, तू है सबला साकार।
चेतना भी हृदय की, हो प्रियतम - श्रृंगार।।
रूप तेरे हजार, तू सृजन का आधार।
माँ की ममता है तुझमें, बहन का भी प्यार।।

कभी नाजों पली, बेवजह भी जली।
तू कदम से कदम तो, मिलाकर चली।
रूक कर तू विचार, न हो जीवन बाजार।
चंद सिक्कों की खातिर, न तन को उघार।।
रूप तेरे हजार, तू सृजन का आधार।
माँ की ममता है तुझमें, बहन का भी प्यार।।

त्याग-शांति की मूरत हो, धीरज की खान।
करे सम्मान नारी का, वो है महान।
नित कर तू सुधार, नहीं बनो लाचार।
बढे बगिया की खुशबू, सुमन का निखार।।
रूप तेरे हजार, तू सृजन का आधार।
माँ की ममता है तुझमें, बहन का भी प्यार।।

24 comments:

स्वप्न मंजूषा शैल said...

बन के शक्ति - स्वरूपा, किया है जो काम।
फिर भी अबला जगत ने, दिया तुझको नाम।

अतिसुन्दर अभिव्यक्ति, बधाई

ajay kumar jha said...

waah shyaamal jee...kamaal ke shabdon kaa chayan aur upyog kiyaa hai aapne...rachnaa bahut hee sundar ban padi hai...nari jagat ko samarpit....badhai sweekar karein....

ताऊ रामपुरिया said...

त्याग-शांति की मूरत हो, धीरज की खान।
करे सम्मान नारी का, वो है महान।

बहुत नायाब रचना.

रामराम.

woyaadein said...

नारी तू नारायणी.......
नारी तू कल्याणी.......
नारी तू अन्नपूर्णा......
नारी तू शक्तिस्वरूपा....

साभार
हमसफ़र यादों का.......

दिगम्बर नासवा said...

वह नारी के कितने रूप.......प्रेम, त्याग, शक्ति प्रेमिका और भी न जाने कितने रूप ....बहूत ही लाजवाब पोस्ट ..........

vandana said...

nari ke har swaroop ko bahut hi sundar shabdon mein bandha hai.......lajawaab.

रश्मि प्रभा... said...

satya ko jitni baar kahen,ek nayi jagriti hoti hai,nay aahwaan .........

राज भाटिय़ा said...

त्याग-शांति की मूरत हो, धीरज की खान।
करे सम्मान नारी का, वो है महान।
बहुत ही सुंदर....
सच मै नारी है महान

KK Yadav said...

नारी पर बहुत सुन्दर लिखा आपने..उम्दा प्रस्तुति के लिए साधुवाद !!
____________________
विश्व पर्यावरण दिवस(५ जून) पर "शब्द-सृजन की ओर" पर मेरी कविता "ई- पार्क" का आनंद उठायें और अपनी प्रतिक्रिया से अवगत कराएँ !!

SWAPN said...

suman ji , lekhan men vividhta ka aapka ek roop ye bhi.

bahut achchi lagi yah rachna. badhaai.

रंजना said...

भावपूर्ण अतिसुन्दर अभिव्यक्ति के लिए बहुत बहुत आभार.......

Nirmla Kapila said...

shyaamal jee kisi ek pankati me hee naheen har shbad me eksundar bhaav hai laajavaab abhivyakti hai aabhaar

Science Bloggers Association said...

भावपूर्ण अभिव्यक्ति।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

Priya said...

कभी नाजों पली, बेवजह भी जली।
तू कदम से कदम तो, मिलाकर चली।

Naari par itni sunder rachna ke liye aabhaar

श्यामल सुमन said...

जीवन भर लिखता रहूँ अगर मिले यह प्यार।
ताकत मिलती है मुझे बहुत बहुत आभार।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

निर्झर'नीर said...

vandniiy vichar

har nari ko bhi chahiye apne is roop ko banaye rakhe ..shakshi jaisi kalikh laga ke nari ke roop ko ganda hone se bachaye.

महामंत्री - तस्लीम said...

नारी के अनेक रूपों का सटीक चित्रण।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

vandana said...

कभी नाजों पली, बेवजह भी जली।
तू कदम से कदम तो, मिलाकर चली।

waah shyamal sir bahut hi sunder rachna hai ...

neha said...

bahut hi khubsurat rachna....nari ke har roop ko bakhubi ujagar kiya hai aapne...

डुबेजी said...

sir namaskar .....mere blog par ane aur tippani ke liye dhanyawad....apka blog padha ....shandar ..badhai ..n regards

प्रशांत said...

Bahut kub ...rachnaa bahut hi sunder hai

शोभना चौरे said...

नित कर तू सुधार, नहीं बनो लाचार।
बढे बगिया की खुशबू, सुमन का निखार।।
ati sundar vichar

Babli said...

नारी के विभिन्न रूप को लेकर आपने बहुत ही सुंदर रचना लिखा है! आपकी जितनी भी तारीफ की जाए कम है!

दिनेश पारीक said...

बेहद प्रभाव साली रचना बहुत अच्छी रचना .....


आप मेरे भी ब्लॉग का अनुसरण करे

आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में

तुम मुझ पर ऐतबार करो ।

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विश्व की महान कलाकृतियाँ- पुन: पधारें। नमस्कार!!!