Monday, July 13, 2009

भागमभाग

बाहर बारिश अन्दर आग
अभी शेष भीतर अनुराग

परदेशी बालम आयेंगे
बोल गया है छत पर काग

सब रिश्तों के मोल अलग हैं
नारी माँगे अमर सुहाग

भाव इतर और शब्द इतर हैं
रंग मिलेगा गाकर राग

खोने का संकेत है सोना
सोना पाने, उठकर जाग

उदर भरण ही लक्ष्य जहाँ हो
मची वहाँ पर भागमभाग

इक दूजे का हक जो छीना
लेना अपना लड़कर भाग

घाव भले तन पर लग जाये
कभी न रखना मन पर दाग

देखो नजर बदल के दुनिया
लगता कितना सुन्दर बाग

सुमन खिले हैं सबकी खातिर
लूट रहा क्यों भ्रमर पराग

33 comments:

Udan Tashtari said...

बेहतरीन!!

सुमन खिले हैं सबके खातिर
क्यों लूटा है भ्रमर पराग

सुन्दर है!!

mehek said...

घाव भले तन पर लग जाये
कभी न रखना मन पर दाग

देखो दुनियाँ नजर बदल के
लगता है इक सुन्दर बाग
behad khubsurat

HinBlogNet said...

वाह, मज़ा आ गया!
हिन्दी ब्लॉग नेटवर्क पर अपना ब्लॉग बनायें और अपने उत्कृष्ट लेखों की कीमत वसूल करें। आप अपना मौजूदा ब्लॉग वहां इम्पोर्ट कर सकते हैं।

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत लाजवाब रचना.

रामराम.

काजल कुमार Kajal Kumar said...

बहुत बढ़िया.

Nirmla Kapila said...

खोने का संकेत है सोना
छोड़ नींद को उठकर जाग

उदर भरण ही लक्ष्य जहाँ हो
मची वहाँ पर भागमभाग
बहुत सुन्दर भाव हैं और उपर सब से पहले जो बात कही है वो जिन्दगी के लिये बहुत अहम है आभार्

हया said...

लाजवाब शेरों से सजी आपकी ये ग़ज़ल कमाल की है...
हया

woyaadein said...

बखूबी भाव अभिव्यक्त किया हैं आपने......छोटे किन्तु प्रभावी शेरों में.....

साभार
प्रशान्त कुमार (काव्यांश)
हमसफ़र यादों का.......

vandana said...

har sher ki apni ek jagah hai........bahut sundar

डॉ. मनोज मिश्र said...

बहुत खूब-
परदेशी बालम आयेंगे
कुछ बोला है छत पर काग.

ओम आर्य said...

भाव इतर और शब्द इतर हैं
रंग मिलेगा गाकर राग
KABHEE AAPAKE AAWAJ ME SUNANE KA MOUKA MILE TO SARTHAK HO JAYE AAPKI KAWITAO KA PADHANA.....

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

बहुत सुन्दर जी!
भाव इतर और शब्द इतर हैं
रंग मिलेगा गाकर राग

दिगम्बर नासवा said...

परदेशी बालम आयेंगे
कुछ बोला है छत पर काग

छोटी बहर में सज़ा लाजवाब गुलदस्ता........ सुंदर ग़ज़ल है .

विनोद कुमार पांडेय said...

घाव भले तन पर लग जाये
कभी न रखना मन पर दाग
jawab nahi..
ati sundar kavita..
badhayi

मुकेश कुमार तिवारी said...

श्यामल जी,

मन लुभा गई, बड़ी ही खूबसूरत रचना ।
रिश्तों को पहिचाना है सावन के बहाने

सादर,

मुकेश कुमार तिवारी

Dhiraj Shah said...

सब रिश्तों का मोल अलग है
नारी माँगे अमर सुहाग

khubsurat bhav

श्रद्धा जैन said...

सुमन खिले हैं सबके खातिर
क्यों लूटा है भ्रमर पराग

खोने का संकेत है सोना
छोड़ नींद को उठकर जाग

bahut sunder gazal

रंजन said...

सुन्दर भाव..

Science Bloggers Association said...

जीवन के विविध रंगों को भागमभाग के माध्‍यम से बहुत सुंदर ढंग से बयां किया है।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

श्यामल सुमन said...

प्रेषित है आभार सुमन का
दिया सभी ने बेहतर पाग

(पाग - मिथिला-संस्कृति में किसी के सम्मान में दी जानेवाली एक प्रकार की टोपी)

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

"उदर भरण ही लक्ष्य जहाँ हो
मची वहाँ पर भागमभाग"

सुमन जी!
इस नायाब रचना के लिए तो
मुख से यही निकलता है-
वाह..वाह...
उत्तम!

राज भाटिय़ा said...

घाव भले तन पर लग जाये
कभी न रखना मन पर दाग
बहुत सुंदर लिखा आप ने...
धन्यवाद

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

"घाव भले तन पर लग जाये
कभी न रखना मन पर दाग"
ये पंक्तियां बहुत अच्छी लगी....
इस सुन्दर रचना के लिये बहुत बहुत धन्यवाद...

Harkirat Haqeer said...

इक दूजे का हक जो छीना
लेना अपना लड़कर भाग

घाव भले तन पर लग जाये
कभी न रखना मन पर दाग

बहुत बढ़िया......!!

Hari Shanker Rarhi said...

सरल शब्दों में अच्छी रचना है।

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

वाह-वाह, सुन्दर रचना |

Prem said...

saral sehaj aur sunder rachna badhai .meri rachna padhne ke liye shukriya .prem

M VERMA said...

खोने का संकेत है सोना
छोड़ नींद को उठकर जाग
इतने सरल शब्दो मे इतना कुछ
बहुत खूब

Babli said...

बहुत ही ख़ूबसूरत और लाजवाब रचना लिखा है आपने!

सैयद | Syed said...

बहुत ही ख़ूबसूरत !!

प्रवीण शुक्ल (प्रार्थी) said...

भाव इतर और शब्द इतर हैं
रंग मिलेगा गाकर राग
बिना दिए कुछ नहीं मिलता अगर कुछ पाना है तो कुछ देना भी होगा बहुत ही सुंदर मेरा प्रणाम स्वीकार करे
सादर प्रवीण पथिक
9971969084

Mrs. Asha Joglekar said...

घाव भले तन पर लग जाये
कभी न रखना मन पर दाग ।
सुंदर ।

गुड्डोदादी said...

घाव भले तन पर लग जाये
कभी न रखना मन पर दाग

jeevn jeena bahoot kathin hai
likhne se naa jaana bhaag

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