Thursday, July 16, 2009

मन

हर मन का उच्चारण है
मन उलझन का कारण है

मन से मन की सुन बातें जो
मन में करता धारण है

ऐसे मन वाले को अक्सर
मन कहता साधारण है

मन लेकिन मनमानी करता
मन का मानव चारण है

टूटे मन को मन जोड़े तो
मन का कष्ट निवारण है

गर विवेक मन-मीत बने तो
मन-सीमा निर्धारण है

सुमन देखता मन-दर्पण में
कुछ भी नहीं अकारण है

28 comments:

M Verma said...

टूटे मन को मन जोड़े तो
मन का कष्ट निवारण है
बेह्द खूबसूरत रचना या मन का आईना

adwet said...

सचमुच काफी अच्छी कविता लिखी है। बधाई।

शरद कोकास said...

मस्तिष्क के सारे क्रिया कलापों का योग ही मन है

Harsh said...

bahut sundar shayamal ji aajkal kaya naja taaja chal raha hai kya kar rahe hai?

Priya said...

man par ye varnan achcha laga... but mujhe ek confusion bahut dino se hain..ki man ka existence kaha hai..... dil aur dimaag to jante hain.....par man inse kaise alag hain....... will u pls. specify me.

Harkirat Haqeer said...

हर मन का उच्चारण है
मन उलझन का कारण है

अरे वाह....आप तो बहुत जल्दी - jaldi post badalte हैं ....kamaal hai itana kaise likh lete hain....!!

राज भाटिय़ा said...

गर विवेक मन-मीत बने तो
मन-सीमा निर्धारण है
बहुत सुंदर कविता
धन्यवाद

mehek said...

टूटे मन को मन जोड़े तो
मन का कष्ट निवारण है

गर विवेक मन-मीत बने तो
मन-सीमा निर्धारण है
behad khubsurat,man ka ye vishleshan bahut pasand aaya.

'अदा' said...

मन लेकिन मनमानी करता
मन का मानव चारण है
waah bhaiya, man ki itni baatein , bahut hi sundar kavita bani hai,
gazab..
hriday se badhai...

श्यामल सुमन said...

मन से आभारी हूँ सबका
प्यार सुमन मनभावन है

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

शब्दों के चमत्कार से सजी
बढ़िया पोस्ट।

प्रशांत गुप्ता said...

बहुत सुंदर

रश्मि प्रभा... said...

ऐसे मन वाले को अक्सर
मन कहता साधारण है.......sahi hai

vandana said...

man darpan mein dikhte sare rang hain
.......bahut hi badhiya prastuti.

प्रवीण शुक्ल (प्रार्थी) said...

saadar prnaam aap ka lekhan hamesha hi arth purn hota hai aur nayiprrna deta hai
टूटे मन को मन जोड़े तो
मन का कष्ट निवारण है

mera prnaam swikaar kare
saadar

praveen pathik
9971969084

Prem Farrukhabadi said...

टूटे मन को मन जोड़े तो
मन का कष्ट निवारण है

बहुत ही सुन्दर भाव लगे बधाई!

गुंजन said...

श्यामल सुमन जी

एक नई साहित्यिक पहल के रूप में इन्दौर से प्रकाशित हो रही पत्रिका "गुंजन" के प्रवेशांक को ब्लॉग पर लाया जा रहा है। यह पत्रिका प्रिंट माध्यम में प्रकाशित हो अंतरजाल और प्रिंट माध्यम में सेतु का कार्य करेगी।

कृपया ब्लॉग "पत्रिकागुंजन" पर आयें और पहल को प्रोत्साहित करें। और अपनी रचनायें ब्लॉग पर प्रकाशन हेतु editor.gunjan@gmail.com पर प्रेषित करें। यह उल्लेखनीय है कि ब्लॉग पर प्रकाशित स्तरीय रचनाओं को प्रिंट माध्यम में प्रकाशित पत्रिका में स्थान दिया जा सकेगा।

आपकी प्रतीक्षा में,

विनम्र,

जीतेन्द्र चौहान(संपादक)
मुकेश कुमार तिवारी ( संपादन सहयोग_ई)

रंजना said...

गर विवेक मन-मीत बने तो
मन-सीमा निर्धारण है


यह इतनी बड़ी बात कह दी आपने कि क्या कहूँ....इसे यदि मन में धारण कर लिया जाय तो फिर कहना ही क्या...

बहुत ही सुन्दर प्रेरणादायी इस रचना के लिए आपका आभार.

आकांक्षा~Akanksha said...

टूटे मन को मन जोड़े तो
मन का कष्ट निवारण है

गर विवेक मन-मीत बने तो
मन-सीमा निर्धारण है
.....vakai ye panktiyan padhkar dil kah utha-vah-vah !!

Dhiraj Shah said...

मन को शब्दो मे बाँधने के शब्दकार को नमन है ।
मन की सुन्दर अभिव्यक्ति।

गौतम राजरिशी said...

लाजवाब काफ़ियों संग सजी-धजी एक लाजवाब रचना श्यामल जी।
बेहतरीन !

woyaadein said...

मन अपना भी कहता कुछ ऐसा,
यह ब्लॉग बहुत मनभावन है..........

बहुत सुंदर....

साभार
हमसफ़र यादों का.......

Nirmla Kapila said...

टूटे मन को मन जोड़े तो
मन का कष्ट निवारण है

गर विवेक मन-मीत बने तो
मन-सीमा निर्धारण है
श्यामल जी बहुत सुन्दर मन के भावों को दर्शाती और अच्छा संदेश देती रचना के लिये बधाई

श्याम सखा 'श्याम' said...

मन को कर लें काबू गर हम
मन फ़िर अपना अभ्यारण है

श्याम सखा

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

मन की चंचलता और मन का निग्रह तो शाश्वत विषय हैं।
विचित्र है मन।

विनोद कुमार पांडेय said...

baar baar padhane ka man karata hai
aapki kavita..

sundar bhav..

Anupama Tripathi said...

bahut sundar aur sarthak bhi ...!!
shubhkamnayen .

गुड्डोदादी said...


टूटे मन को मन जोड़े तो
मन का कष्ट निवारण है
(पता नहीं चचा सहगल जी यही गीत गाया
जब दिल ही टूट गया

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