Saturday, July 18, 2009

तस्वीर

अगर तू बूँद स्वाती की, तो मैं इक सीप बन जाऊँ
बनो तुम प्रेम की पाती, तो मैं इक गीत बन जाऊँ
अंधेरे और नफरत को मिटाता प्रेम का दीपक
कहीं बन जाओ तुम बाती, तो मैं इक दीप बन जाऊँ

तेरी आँखों में गर कोई, मेरी तस्वीर बन जाये
मेरी कविता भी जीने की, नयी तदबीर बन जाये
बडी मुश्किल से पाता है कोई दुनियाँ में अपनापन
बना लो तुम अगर अपना, मेरी तकदीर बन जाये

भला बेचैन क्यों होता, जो तेरे पास आता हूँ
कभी डरता हूँ मन ही मन, कभी विश्वास पाता हूँ
नहीं है होंठ के वश में जो भाषा नैन की बोले
नैन बोले जो नैना से, तरन्नुम खास गाता हूँ

कई लोगों को देखा है, जो छुपकर के गजल गाते
बहुत हैं लोग दुनियाँ में, जो गिरकर के संभल जाते
इसी सावन में अपना घर जला है क्या कहूँ यारो
नहीं रोता हूँ फिर भी आँख से, आँसू निकल आते

है प्रेमी का मिलन मुश्किल, भला कैसी रवायत है
मुझे बस याद रख लेना, यही क्या कम इनायत है
भ्रमर को कौन रोकेगा सुमन के पास जाने से
नजर से देख भर लूँ फिर, नहीं कोई शिकायत है

34 comments:

vandana said...

इसी सावन में अपना घर जला है क्या कहूँ यारो
नहीं रोता हूँ फिर भी आँख से, आँसू निकल आते
waah bahut khoob
ati sunder rachana ..hatts off

डॉ. मनोज मिश्र said...

अगर तू बूँद स्वाती की, तो मैं इक सीप बन जाऊँ
कहीं बन जाओ तुम बाती, तो मैं इक दीप बन जाऊँ
अंधेरे और नफरत को मिटाता प्रेम का दीपक
बनो तुम प्रेम की पाँती, तो मैं इक गीत बन जाऊँ..
vaah sir jee vaah.

Nirmla Kapila said...

अगर तू बूँद स्वाती की, तो मैं इक सीप बन जाऊँ
कहीं बन जाओ तुम बाती, तो मैं इक दीप बन जाऊँ
अंधेरे और नफरत को मिटाता प्रेम का दीपक
बनो तुम प्रेम की पाँती, तो मैं इक गीत बन जाऊँ..
बहुत सुन्दर प्रेमरस मे भीगी शब्दों की बरसात बधाई

M VERMA said...

नहीं है होंठ के वश में जो भाषा नैन की बोले
नैन बोले जो नैना से, तरन्नुम खास गाता हूँ
अच्छा बिम्ब प्रस्तुत किया आपने तो
बहुत सुन्दर रचना

Babli said...

बहुत ही ख़ूबसूरत, लाजवाब और दिल को छू लेने वाली रचना लिखा है आपने !

Priya said...

shabd - shabd tarpan hain...ye post behat khoobsoorat hain

"कई लोगों को देखा है, जो छुपकर के गजल गाते
बहुत हैं लोग दुनियाँ में, जो गिरकर के संभल जाते
इसी सावन में अपना घर जला है क्या कहूँ यारो
नहीं रोता हूँ फिर भी आँख से, आँसू निकल आते

आनन्द वर्धन ओझा said...

'इसी सावन में अपना घर जला है...' वाह ! क्या बात कही है, बहुत खूब ! अच्छी रचना, मन को भा गई. बधाइयाँ !!

mehek said...

कई लोगों को देखा है, जो छुपकर के गजल गाते
बहुत हैं लोग दुनियाँ में, जो गिरकर के संभल जाते
इसी सावन में अपना घर जला है क्या कहूँ यारो
नहीं रोता हूँ फिर भी आँख से, आँसू निकल आते
waah atisunder,shabd,bhav manbhawan.

‘नज़र’ said...

बहुत बढ़िया रचना है
---
पढ़िए: सबसे दूर स्थित सुपरनोवा खोजा गया

सैयद | Syed said...

इसी सावन में अपना घर जला है क्या कहूँ यारो
नहीं रोता हूँ फिर भी आँख से, आँसू निकल आते..


... बहुत खूब

काजल कुमार Kajal Kumar said...

वाह भाई बहुत सुंदर.

vandana said...

ati sundar.........bahut badhiya.

Harsh said...

bahut achchi lagi shayamal ji yah rachna.........

Ravi Srivastava said...

आज मुझे आप का ब्लॉग देखने का सुअवसर मिला।
वाकई आपने बहुत अच्छा लिखा है।

‘…हम तो ज़िन्दा ही आपके प्यार के सहारे है
कैसे आये आपने होंठो से पुकारा ही नही…’’

आशा है आपकी कलम इसी तरह चलती रहेगी और हमें अच्छी -अच्छी रचनाएं पढ़ने को मिलेंगे
बधाई स्वीकारें।
आप मेरे ब्लॉग पर आए, शुक्रिया.
आप के अमूल्य सुझावों का 'मेरी पत्रिका' में स्वागत है...

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत खूबसूरत रचना.

रामराम.

hem pandey said...

'अंधेरे और नफरत को मिटाता प्रेम का दीपक
बनो तुम प्रेम की पाँती, तो मैं इक गीत बन जाऊँ'
-पहली पंक्ति जहां शाश्वत सत्य उजागर करती है, वहीं दूसरी पंक्ति प्रेम की उदात्तता. साधुवाद.

संजीव गौतम said...

तेरी आँखों में गर कोई, मेरी तस्वीर बन जाये
मेरी कविता भी जीने की, नयी तदबीर बन जाये
बडी मुश्किल से पाता है कोई दुनियाँ में अपनापन
बना लो तुम अगर अपना, मेरी तकदीर बन जाये
इन पंक्तियों पर सब कुछ न्यौछावर. गलती से मेरे ब्लाग पर आपके ब्लाग का लिंक नहीं था. इसलिये ज्यादा मुलाकात नहीं हो पायी. गलती सुघार ली है. दोहों को अपना स्नेह देने के लिये आभार वहां भी भूल-सुधार कर लिया है.

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत ही ख़ूबसूरत

श्यामल सुमन said...

दिया प्यार जो आपने उसका है आभार।
यही प्यार तो अबतलक लेखन का आधार।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

'अदा' said...

कई लोगों को देखा है, जो छुपकर के गजल गाते
बहुत हैं लोग दुनियाँ में, जो गिरकर के संभल जाते
इसी सावन में अपना घर जला है क्या कहूँ यारो
नहीं रोता हूँ फिर भी आँख से, आँसू निकल आते

ह्रदय से आप लिखते जाते
औ धीरे-धीरे ह्रदय में उतरते जाते ...

बहुत सुंदार लिखे हैं भईया,,,,

रश्मि प्रभा... said...

वाह ..........

नीरज गोस्वामी said...

सुमन जी इस लाजवाब रचना के लिए दिल से बधाई स्वीकार करें...
नीरज

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

अंधेरे और नफरत को मिटाता प्रेम का दीपक
बनो तुम प्रेम की पाँती,
तो मैं इक गीत बन जाऊँ..

बहुत सुन्दर।
बधाई!

जितेन्द़ भगत said...

सुंदर गीत।

Mumukshh Ki Rachanain said...

नहीं है होंठ के वश में जो भाषा नैन की बोले
नैन बोले जो नैना से, तरन्नुम खास गाता हूँ

' वाह !
क्या बात कही है, बहुत खूब !
अच्छी रचना, मन को भा गई.
बधाइयाँ !!

adwet said...

बहुत खूब लिख है आपने।

karuna said...

बड़ी मुश्किल से पाटा है कोई दुनिया में अपनापन ,
बना लो तुम अगर अपना मेरी तकदीर बन जाए |यह एक सच्चा भावः है ,जिसे बहुत ही सीधे तरीके से व्यक्त किया है |

Dr.T.S. Daral said...

आपकी पिछली कई रचनाये पढ़ी. बहुत सुंदर लिखते हैं आप. बधाई

विनोद कुमार पांडेय said...

prem ki adbhut vyakhya..

aapne kavita ke madhdhym se prem ka itana sundar bhav jagaya hai ki kya kahu..

kuch kavita aisi hoti hai chahe jitani baar padho..bas kuch aisi hi aapki yah kavita hai..

sundar

Manish Kumar said...

तेरी आँखों में गर कोई, मेरी तस्वीर बन जाये
मेरी कविता भी जीने की, नयी तदबीर बन जाये
बडी मुश्किल से पाता है कोई दुनिया में अपनापन
बना लो तुम अगर अपना, मेरी तकदीर बन जाये


इस छंद ने तो मन को मोह लिया। क्या बात है जनाब

Prem said...

बहुत सुंदर रचना एं होती हैं आपकी ,अच्छा लगता है पढ़ कर ।

चंदन कुमार झा said...

बहुत ही सुन्दर एवं उत्कृष्ट रचना.बधाई.

गुलमोहर का फूल

sushant jha said...

बहुत अच्छी कविता...वधाई।

महामंत्री - तस्लीम said...

Shaandar Tashveer.
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

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