Sunday, July 26, 2009

भिखारी

धन-पद की ऐसी लिप्सा जो, मानवता पर भारी है।
इस दुनिया में प्रायः मानव, लगता आज भिखारी है।।

माँगे कोई बड़े लोग से और कोई भगवान से।
चाहत प्रभुता पाने की तो, गलबाँही शैतान से।
खुद की सुख सुविधा बढ़ जाये, सबको यही बीमारी है।
इस दुनिया में प्रायः मानव, लगता आज भिखारी है।।

कोई व्याकुल प्यार की खातिर, किसी की चाहत है काया।
चिन्तन में चाहत की उलझन, बाहर कहते जग माया।
चिपकाया है चेहरे पर जो, वह मुस्कान उधारी है।
इस दुनिया में प्रायः मानव, लगता आज भिखारी है।।

किसी की चाहत स्वर्गधाम तो, माँग रहा सन्तान कोई।
अपमानित कर्मों के बदले, माँग रहा सम्मान कोई ।
सुमन विकल ये नश्वर जीवन, मची क्यूँ मारामारी है?
इस दुनिया में प्रायः मानव लगता आज भिखारी है।।

36 comments:

Hemant Kumar said...

सही कहा आपने ।

दिगम्बर नासवा said...

दिल की बातें लिखकर टिप्पणी माँग रहे हैं ब्लागर।
टिप्पणी तो खुद मिल जायेगी रचना हो गर बेहतर।

ये बात सही है ........... आपने सही माध्यम से बताया है........... लाजवाब

suresh sharma (cartoonist) said...

श्यामल सुमनजी, बहुत अच्छा लिखा है आपने..बधाई ! आप से कुछ जरूरी सहयोग लेना है, आप मुझे ०९७०९०८३६६४ पर संपर्क करें !

दिगम्बर नासवा said...

दिल की बातें लिखकर टिप्पणी माँग रहे हैं ब्लागर।
टिप्पणी तो खुद मिल जायेगी रचना हो गर बेहतर।

ये बात सही है ........... आपने सही माध्यम से बताया है........... लाजवाब

वन्दना अवस्थी दुबे said...

वाह क्या बात है. बहुत सुन्दर माध्यम लाचारी जताने का.

रश्मि प्रभा... said...

दिल की बातें लिखकर टिप्पणी माँग रहे हैं ब्लागर।
टिप्पणी तो खुद मिल जायेगी रचना हो गर बेहतर।
सब पर टिप्पणी न देने की कुछ न कुछ लाचारी है
इस दुनिया में प्रायः मुझको लगता सभी भिखारी है।।
....bilkul sahi

http://podcast.hindyugm.com/2009/07/barish-ka-mausam-podcast-kavi-sammelan.html
agle sammelan mein aap aamantrit hain

विनोद कुमार पांडेय said...

इस दुनिया में प्रायः मुझको लगता सभी भिखारी है।।

शब्द भाव को जोड़ जोड़ कर कविता खूब संवारी है,

ओम आर्य said...

बहुत ही करिने से ब्यान करी है आपने ......अतिसुन्दर रचना

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सही कहा.

रामराम,

प्रवीण शुक्ल (प्रार्थी) said...

नमस्कार श्यामल जी मैं दुबारा कहूँगा आप की रचनाये यथार्त के धरातल पर तीखी चोट करते हुए हथौडा सा बार करती है ये तभी हो सकता है जब आप सामाजिक परिवर्तनों मेंमें हो रहे बदलाब के प्रति सजग हो और और उसे आत्मसत करते हुए चले आप से मुझे लिखने की प्रेरणा मिलती है
मेरा प्रणाम स्वीकार करे
सादर
प्रवीण पथिक
9971969084

‘नज़र’ said...

अत्यंत प्रभावशाली रचना है
---
शैवाल (Algae): भविष्य का जैव-ईंधन

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

दिल की बातें लिखकर टिप्पणी माँग रहे हैं ब्लागर।
टिप्पणी तो खुद मिल जायेगी रचना हो गर बेहतर।
सब पर टिप्पणी न देने की
कुछ न कुछ लाचारी है
इस दुनिया में प्रायः मुझको
लगते सभी भिखारी है।।

सुमन जी!
बिल्कुल बेलाग बात कही है।
बधाई।

Dhiraj Shah said...

यहाँ तो सभी भिखारी है, कौन किससे नही भीख मांगता,आमीर मागता गरीब से , गरीब मागता अमीर से , नेता मागता देश से यहाँ सब भिखारी है ।

Science Bloggers Association said...

Dil se nikli baaten.

श्यामल सुमन said...

बाँट सकूँ जीवन का अनुभव बस इसकी तैयारी है।
सबका स्नेह समर्थन पाकर सुमन सदा आभारी है।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

रंजना said...

बहुत बहुत सही कहा आपने......इस दुनिया में ऐसा कोई नहीं जो किसी न किसी लालसा के वश में नहीं....

सदैव की भांति महत सन्देश लिए अतिसुन्दर रचना....

mehek said...

har alfaz sach hai,bahut achhi lagi rachana.badhai

Manish Kumar said...

achchi rachna...

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

सुमन जी सही याद दिलाया है हम सब बिखरी हैं |

दिल की बातें लिखकर टिप्पणी माँग रहे हैं ब्लागर।
टिप्पणी तो खुद मिल जायेगी रचना हो गर बेहतर।
सब पर टिप्पणी न देने की कुछ न कुछ लाचारी है
इस दुनिया में प्रायः मुझको लगता सभी भिखारी है।

टिप्पणी न देने की एक लाचारी ये भी है की जब वो टिप्पणी नहीं देता तो मैं क्यों दूं, क्यों मैंने सही कहा ना ?

समयचक्र : महेन्द्र मिश्र said...

टिप्पणी तो खुद मिल जायेगी रचना हो गर बेहतर

सही कहा...,..बधाई.

AlbelaKhatri.com said...

gazab !
bahut kuchh kah diya
sab kuchh kah diya
waah
anand aa gaya................badhaai !

ज्योति सिंह said...

ऐसी लिप्सा धन-पद की जो मानवता पर भारी है।
इस दुनिया में प्रायः मुझको लगता सभी भिखारी है।।
waah kya baat hai .magar mujhe tippani ki laalsa nahi .jo saath chalate hai unke saath chalane ki koshish hai .main karm par dhayan deti hoon .fal pe nahi ,sochane se kisi ko haasil hota hai .

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

"ऐसी लिप्सा धन-पद की जो मानवता पर भारी है।
इस दुनिया में प्रायः मुझको लगता सभी भिखारी है।।"
आप की रचना बहुत अच्छी लगी....बहुत बहुत बधाई।

संजीव गौतम said...

दिल की बातें लिखकर टिप्पणी माँग रहे हैं ब्लागर।
टिप्पणी तो खुद मिल जायेगी रचना हो गर बेहतर।
कहने के लिये इशारा काफी है. सही कहा है आपने.
रचना अच्छी है.

'अदा' said...

बहुत अच्छी रचना गढ़ी आपने, बहुत अच्छी रचना हमने पढ़ी
जाएँ भिक्षाटन पर बाकी ब्लागर, टिपण्णी के आप अधिकारी हैं
बहुत अच्छी रचना भईया....

सुशील कुमार said...

आपका हेडर ब्लाग से बड़ा क्यों है। उसे आप फोटोशॉप में जाकर पत्रिका के अनुकूल काट कर फिर से ले-आउट के हेडर में लोड करें।तब जाकर वह फीट बैठेगा।

सुशील कुमार said...

लेकिन उस से पहले आप ले-आउट के हेडर में जाकर shrink to fit को टिक कर उसी हेडर को फिर से लोड करें। हो सकता है,फिट हो जाय।अगर न हो तो उपर की प्रक्रिया अपना कर क्रोप-अप करना होगा इमेज को और फिर से लोड करना होगा।

गुंजन said...

कविता बहुत अच्छी लगी और उसका उपसंहार में चलते-चलते जो लिखा है वह ब्लॉगर्स का दर्द बयाँ कर गया।

पत्रिका-गुंजन

आपका स्वागत है एक साहित्यिक पहल से जुड़ने का

मुकेश कुमार तिवारी said...

श्यामल जी,

भिखारी को पढ़ने बाद यह लगा कि वस्तुतः हम भी एक भिखारी ही हैं, बड़ा व्यापक दृष्टीकोण है आपका लाजवाब।

हमारी मनोवृत्तियों पर व्यंग्य कसते हुये चिकोटी काटती हुई रचना, सुन्दर है।

सादर,

मुकेश कुमार तिवारी

चंदन कुमार झा said...

बहुत ही सुन्दर रचना.........साधूवाद.



गुलमोहर का फूल

योगेन्द्र मौदगिल said...

अच्छी रचना है भाई बधाई स्वीकारें...

Nirmla Kapila said...

दिल की बातें लिखकर टिप्पणी माँग रहे हैं ब्लागर।
टिप्पणी तो खुद मिल जायेगी रचना हो गर बेहतर।
सब पर टिप्पणी न देने की कुछ न कुछ लाचारी है
इस दुनिया में प्रायः मुझको लगता सभी भिखारी है।।

aapआने तो अपनी कह दी अब अपनी बारी है
खरी खरी सुनाना प्यार से ये कितनी होशियारी है
बहुत बडिया सटीक अभिव्यक्ति है

Babli said...

अत्यन्त सुंदर रचना! बहुत अच्छा लगा!

योगेश स्वप्न said...

wah suman ji ,
दिल की बातें लिखकर टिप्पणी माँग रहे हैं ब्लागर।
टिप्पणी तो खुद मिल जायेगी रचना हो गर बेहतर।
सब पर टिप्पणी न देने की कुछ न कुछ लाचारी है
इस दुनिया में प्रायः मुझको लगता सभी भिखारी है।।

kya baat kahi hai.blogging ka sach belaag. wah.

Prem said...

क्या खूब लिखते हैं --चलते चलते बड़ा सच लिखा पर आपको तो बिन मांगे काफ़ी टिप्पणिया मिल जाती होंगी कि आप अच्छा लिखते हैं ।

संजय भास्कर said...

इस दुनिया में प्रायः मुझको लगता सभी भिखारी है।।

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