Wednesday, September 30, 2009

समझौता

यूँ तो हम हर साल दशहरा मनाते हैं,
रावण के पुतले को पटाखों से सजाकर,
सामूहिक उत्सव में धूमधाम से जलाते हैं।
और नकली रावण को जलाने के लिए
अक्सर असली रावण को बुलाते हैं,

पटाखों की हर आवाज के साथ,
रावण अट्टाहास करता है,
क्योंकि भारत में कई कलियुगी रावण,
बड़े मजे से राज करता है।।

होकर व्यथित राम ने सोचा,
कुछ न कुछ अब करना होगा।
जल्द से जल्द किसी तरह भी,
राम के खाली पदों को भरना होगा।।
क्योंकि हर रावण के पीछे राम चाहिए,
अंगद और हनुमान चाहिए।
राम राज्य लाने की खातिर,
विभीषण जैसा नाम चाहिए।

रावण बोला हे राम,
तू व्यर्थ देख रहा है सपना।
इतने बरस बीत गए,
क्या बनबा सका तू मंदिर अपना।।

राम बोला हे दशकंधर,
तेरी संख्या लगातार बढ़ रही है अंदर अंदर।
मेरे भक्त मेरे ही रथ पे होकर सवार,
कर दिया मुझको बेबस और लाचार।।

हे दशानन,
तेरे विचार लगते अब पावन।
तुम्हीं बताओ कोई राह,
जो पूरा हो जन जन की चाह।।

रावण बोला हे राम,
तुम व्यर्थ ही हो परेशान।
आओ हम तुम मिलकर,
चुनाव पूर्व गठबंधन बनायें।
जीत जाने पर
प्रजा को ठेंगा दिखायें।।

37 comments:

Nirmla Kapila said...

रावण बोला हे राम,
तुम व्यर्थ ही हो परेशान।
आओ हम तुम मिलकर,
चुनाव पूर्व गठबंधन बनायें।
जीत जाने पर
प्रजा को ठेंगा दिखायें।।
बिलकुल सही कहा आज कल राम को भी रावण की जरूरत है तभी राज नीति की रोटियाँ सेंकी जाती हैं और आज के राम और रावण शब एक हैं बधाई इस रचना के लिये

विनोद कुमार पांडेय said...

राजनीति से कौन बचें....कुछ भी संभव है..बढ़िया रचना....बधाई

दिगम्बर नासवा said...

अच्छा व्यंग है सुमन जी......... आज के हालत पर सुन्दर तप्सरा है ........

Mithilesh dubey said...

रावण बोला हे राम,
तुम व्यर्थ ही हो परेशान।
आओ हम तुम मिलकर,
चुनाव पूर्व गठबंधन बनायें।
जीत जाने पर
प्रजा को ठेंगा दिखायें।।

एक दम सही लिखा है आपने।

M VERMA said...

और नकली रावण को जलाने के लिए
अक्सर असली रावण को बुलाते हैं,
यथार्थ है
रावण ही रावण के पुतले पर निशाना लगाता है

रश्मि प्रभा... said...

नकली रावण को जलाने के लिए
अक्सर असली रावण को बुलाते हैं,
shatpratishat sahi

महेन्द्र मिश्र said...

सुन्दर भावपूर्ण . बढ़िया प्रस्तुति . आजकल खादी के अन्दर राम और रावण दोनों के दर्शन करना सहज है .

Pankaj Mishra said...

होकर व्यथित राम ने सोचा,
कुछ न कुछ अब करना होगा।
जल्द से जल्द किसी तरह भी,
राम के खाली पदों को भरना होगा।।
क्योंकि हर रावण के पीछे राम चाहिए,
अंगद और हनुमान चाहिए।
राम राज्य लाने की खातिर,
विभीषण जैसा नाम चाहिए।
सुमन जी नमस्कार ,
काफी दिन बाद आपको पढ़ने के लिए मिला सुखद अनुभूति .

Harkirat Haqeer said...

रावण बोला हे राम,
तुम व्यर्थ ही हो परेशान।
आओ हम तुम मिलकर,
चुनाव पूर्व गठबंधन बनायें।
जीत जाने पर
प्रजा को ठेंगा दिखायें।।

waah lajwaab......!!

kahaan se late hain itani dhaar ....??

हिमांशु । Himanshu said...

लाजवाब और खूबसूरत प्रविष्टि । आभार ।

वन्दना said...

amazing..........aaj ki rajniti par kada vyangya.

ओम आर्य said...

satik hai ..........aaj sab ek hai ....

रंजना said...

सटीक व्यंग्य साधा आपने....
रावन ही रावन के पुतले का दहन कर रहा है...क्या विडंबना है....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत करारा प्रहार!
व्यंग्य की पैनी है धार!!

बधाई!

pallavi trivedi said...

bilkul sahi farmaya....

महामंत्री - तस्लीम said...

गहरा व्यंग्य।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

राज भाटिय़ा said...

रावण बोला हे राम,
तुम व्यर्थ ही हो परेशान।
आओ हम तुम मिलकर,
चुनाव पूर्व गठबंधन बनायें।
जीत जाने पर
प्रजा को ठेंगा दिखायें।।

शायद आज कल रावण राज ही तो चल रहा है.
बहुत सुंदर कविता लिखी आप ने.
धन्यवाद

श्यामल सुमन said...

बड़भागी श्यामल सुमन मिला बहुत ही प्यार।
यही प्यार सच मानिये लेखन का आधार।।

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

बहुत काम की बात है आपके पोस्ट में - राम के समय रावण से लड़ना सरल था - शत्रु बाहर था। आज लड़ना कठिन है - शत्रु (रावण) हर आदमी के अंदर है!

दर्पण साह "दर्शन" said...

raavano aur raamon ki nayi paribhasha ghadne ki avshyakta hai...

...pehal ke liye saadhu !! saadhu !!

दुर्योधन है , ओसामा है , कंस कभी कहलाता है ,
रंगमंच का पात्र वही है रूप बदल सा जाता है .

ये कलयुग है इस कलयुग में ऐसा तो होना ही था ,
बेटा माँ को अंधा करके श्रवण कुमार कहलाता है .

योगेश स्वप्न said...

wah wah wah.

अभिषेक ओझा said...

बड़ा खतरनाक गठबंधन है जी :)

Babli said...

बहुत ही सुंदर और शानदार रचना लिखा है आपने! आज के हालात को मद्दे नज़र रखते हुए आपने बखूबी प्रस्तुत किया है!

Mumukshh Ki Rachanain said...

और नकली रावण को जलाने के लिए
अक्सर असली रावण को बुलाते हैं,

अच्छा व्यंग है सुमन जी......... आज के हालत पर

आभार

www.cmgupta.blogspot.com

naveentyagi said...

और नकली रावण को जलाने के लिए
अक्सर असली रावण को बुलाते हैं,

naveentyagi said...

और नकली रावण को जलाने के लिए
अक्सर असली रावण को बुलाते हैं,

kshama said...

करारा व्यंग है ...!
आपको क्षमाके साथ ये क्षमा एक अर्ज़ करती है ...टिप्पणी के लिए तहे दिलसे शुक्रिया ..लेकिन मै 'शमा ' नहीं क्षमा हूँ.. .......!!!

श्रद्धा जैन said...

रावण बोला हे राम,
तुम व्यर्थ ही हो परेशान।
आओ हम तुम मिलकर,
चुनाव पूर्व गठबंधन बनायें।
जीत जाने पर
प्रजा को ठेंगा दिखायें।।
bahut gahra vayng hai
aajkal raam ko bhi ravan ki zarurat hai

hem pandey said...

रावण बोला हे राम,
तुम व्यर्थ ही हो परेशान।
आओ हम तुम मिलकर,
चुनाव पूर्व गठबंधन बनायें।
जीत जाने पर
प्रजा को ठेंगा दिखायें।।

- करारा व्यंग्य. साधुवाद.

सर्वत एम० said...

भाई आप ठीक आदमी नहीं हैं. हंसी-हंसी में इतनी गंभीर बातें की जाती हैं? रावण और उसके फालोवर्स हर युग में नम्बर वन रहे हैं. फिर यह तो कलियुग है भाई, इस में भी पूरे तौर पर इन्हीं का शासन रहेगा, राम राज्य एक सपना है, सुनने-सुनाने में अच्छा लगता है.
आपने मेरी बात का बुरा तो नहीं माना!

कविता said...

जीवन ही एक समझौता है। सुंदर लिखा है, बधाई।
Think Scientific Act Scientific

मुकेश कुमार तिवारी said...

श्यामल भाई,

मैं हिन्दी फिल्मों में लाठी भांजते हुये हीरो ने हमेशा मन मोहा है कि एक बीस-तीस-चालीस लोगों पर भारी पड़ता है।

उसी तरह आज आपने जो लाठी भांजी है कि सबहिं चारो खाने चित्त।

वाह!!!!

सादर,


मुकेश कुमार तिवारी

पिछले कुछ दिनों से संपर्क नही रख पाया मुआफी चाहूंगा।

Roshani said...

महोदय जी प्रणाम ,

आपका व्यंग बहुत ही सटीक बैठता है आज के समय में.

बेहतरीन रचना के लिए आपको बधाइयाँ.

Vijay Kumar Sappatti said...

Suman ji ;

Aapki is kavita me accha vyangya chupa hua hai....

raavan aur raam ke beech ke sanwaad ke dwara aapne bahut acchi tarah se aaj ke desh ki stithiti ko darshaya hai...

meri badhai sweekar kare..

dhanywad

vijay
www.poemofvijay.blogspot.com

संजय भास्कर said...

बहुत सुन्दर रचना । आभार

ढेर सारी शुभकामनायें.

SANJAY KUMAR
HARYANA
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

गुड्डोदादी said...

Dadi Guddo
Shyamal Suman

समझौता

यूँ तो हम हर साल दशहरा मनाते हैं,
... रावण के पुतले को पटाखों से सजाकर,
... सामूहिक उत्सव में धूमधाम से जलाते हैं।
और नकली रावण को जलाने के लिए
अक्सर असली रावण को बुलाते हैं,

पटाखों की हर आवाज के साथ,
रावण अट्टाहास करता है,
क्योंकि भारत में कलियुगी रावण,
बड़े मजे से राज करता है।।

एक दिन व्यथित राम ने सोचा,
कुछ न कुछ अब करना होगा।
जल्द से जल्द किसी तरह भी,
राम के खाली पदों को भरना होगा।।
क्योंकि हर रावण के पीछे राम चाहिए,
अंगद और हनुमान चाहिए।
राम राज्य लाने की खातिर,
विभीषण जैसा नाम चाहिए।

रावण बोला हे राम,
तू व्यर्थ देख रहा है सपना।
इतने बरस बीत गए,
क्या बनबा सका तू मंदिर अपना।।

राम बोला हे दशकंधर,
तेरी संख्या लगातार बढ़ रही है अंदर अंदर।
मेरे भक्त मेरे ही रथ पे होकर सवार,
कर दिया मुझको बेबस और लाचार।।

हे दशानन,
तेरे विचार लगते अब पावन।
तुम्हीं बताओ कोई राह,
जो पूरा हो जन जन की चाह।।

रावण बोला हे राम,
तुम व्यर्थ ही हो परेशान।
आओ हम तुम मिलकर,
चुनाव पूर्व गठबंधन बनायें।
जीत जाने पर
प्रजा को ठेंगा दिखायें।।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।See More
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Deepa Bhurani, Trapti Jain, Preeti Khanna Fernandes and 7 others like this..
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Remove CommentMark as SpamMukesh Bhatia Dadi aapko Dussehra ki shubhkaamnayen hamare pariwar ki taraf se.
13 hours ago · LikeUnlike.Dadi Guddo मुकेश जी आशीर्वाद
12 hours ago · LikeUnlike.Dadi Guddo हिदायत बेटा धन्यवाद
5 minutes ago · LikeUnlike.Dadi Guddo सुजाता बेटी धन्यवाद
5 minutes ago · LikeUnlike.Dadi Guddo एस पी डोगरा नन्हे भाई धन्यवाद
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Kuldeep Sing said...

आपकी यह बेहतरीन रचना शुकरवार 21/12/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.com पर लिंक की जाएगी…
इस संदर्भ में आप के अनुमोल सुझाव का स्वागत है।

सूचनार्थ,

हाल की कुछ रचनाओं को नीचे बॉक्स के लिंक को क्लिक कर पढ़ सकते हैं -
विश्व की महान कलाकृतियाँ- पुन: पधारें। नमस्कार!!!