Wednesday, January 13, 2010

लेकिन प्यास अधूरी है

मिलने की मजबूरी है
बाधा लेकिन दूरी है

प्यार की बारिश होती रहती
लेकिन प्यास अधूरी है

बिखर गए सारे सपने पर
ख्वाहिश तो सिन्दूरी है

आग तड़प की दोनों दिल में
मिलना बहुत जरूरी है

भ्रमर सुमन का मिलन हुआ तो
समझो चाहत पूरी है

20 comments:

राज भाटिय़ा said...

सुंदर रचना के लिये धन्यवाद

महेन्द्र मिश्र said...

सुंदर रचना
मकर संक्रांति पर्व की हार्दिक शुभकामना . भगवान सूर्य की पहली किरण आपके जीवन में उमंग और नई उर्जा प्रदान करे

डॉ टी एस दराल said...

बिखर गए सारे सपने पर
ख्वाहिश तो सिन्दूरी है
नई आशाओं की ख्वाईशें बनी रहें।

मनोज कुमार said...

बहुत अच्छी लगी यह रचना।
मकर संक्रांति पर्व की हार्दिक शुभकामना।

हर्षिता said...

यह रचना बहुत अच्छी लगी।
मकर संक्रांति पर्व की हार्दिक शुभकामना।

योगेश स्वप्न said...

vandana ji , adhi adhuri nahin ye poorn aur aapki behatareen rachnaon men ek hai. lajawaab.

Creative Manch-क्रिएटिव मंच said...

प्यार की बारिश होती रहती
लेकिन प्यास अधूरी है
बिखर गए सारे सपने पर
ख्वाहिश तो सिन्दूरी है


बहुत सुंदर रचना
धन्यवाद
मकर संक्रांति पर्व की हार्दिक शुभकामना।


★☆★☆★☆★☆★☆★
'श्रेष्ठ सृजन प्रतियोगिता
★☆★☆★☆★☆★☆★
क्रियेटिव मंच

वन्दना said...

beshak choti rachna hai magar bahut hi sundar hai.

गौतम राजरिशी said...

खानापूर्ति..? बाप रे, ये अगर खानापूर्ति है सुमन जी तो फिर असला क्या होगा???

एक-दो मिस्रे में शायद एक "दीर्घ" अतिरिक्त आ रहा है, वर्ना तो कयामत ढ़ा ही रहे हैं सब के सब शेर अपने खानापूर्ति वाली अवस्था में भी...

ख्वाहिश तो सिंदूरी है वाले मिस्रे ने मन मोह लिया है सरकार।

वन्दना अवस्थी दुबे said...

अतिसुन्दर.

रंजना said...

Aap is rachna ko chhoti aur tuchch samajh rahen hain..meri aapatti darz karen...

Bahut hi sundar rachna hai...bahut bahut sundar...

श्यामल सुमन said...

हार्दिक धन्यवाद सहित विनम्र आभार प्रेषित है।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

छोटी बहर में अच्छा तो लिखा है साहिब!

Apanatva said...

bahut pyaree rachana lagee ye aapkee.

मथुरा कलौनी said...

रचना बहुत अच्‍छी लगी।

BrijmohanShrivastava said...

प्यास अधूरी अच्छी कविता ,इत्तेफ़ाकन आज सबेरे से खाना नही खा पाया था इस कारण ख्वाहिश तो सिन्दूरी है की जगह पढ गया ,ख्वाहिश है कुछ हो तन्दूरी

Mrs. Asha Joglekar said...

प्यार की बारिश होती रहती
लेकिन प्यास अधूरी है
वाह वाह ।
भ्रमर सुमन का मिलन हुआ तो
समझो चाहत पूरी है
क्या बात है बात भी कह दी और अपना नाम भी गूंथ दिया बहुत खूबसूरती से ।
खानापूर्ती न कहें, इतनी विनम्रता अच्छी नही ।

महेन्द्र मिश्र said...

सुंदर रचना
बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाये ओर बधाई आप को .

सतीश सक्सेना said...

क्या मुक्त गान है सुमन जी !!
वाह वाह !

Anonymous said...

मिलने की मजबूरी है
बाधा लेकिन दूरी है

प्यार की बारिश होती रहती
लेकिन प्यास अधूरी है

बिखर गए सारे सपने पर
ख्वाहिश तो सिन्दूरी है

आग तड़प की दोनों दिल में
मिलना बहुत जरूरी है

भ्रमर सुमन का मिलन हुआ तो
समझो चाहत पूरी है

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