Wednesday, May 5, 2010

टिप्पणी करना सीख

टिप्पणी पाने के लिए, टिप्पणी करना सीख।
बिन माँगे कुछ न मिले, मिले माँगकर भीख।।

पोस्ट जहाँ रचना हुई किया शुरू यह खेल।
जहाँ तहाँ हर पोस्ट पर कुछ तो टिप्पणी ठेल।।

कहता रचनाकार क्या, क्या इसके आयाम?
"नाईस", "उम्दा" कुछ लिखें चल जाता है काम।।

आरकुट और मेल से माँगें सबकी राय।
कुछ टिप्पणी मिल जायेंगे करते रहें उपाय।।

टिप्पणी ऐसी कुछ मिले मन का टूटे धीर।
रोते रचनाकार वो होते जो गम्भीर।।

संख्या टिप्पणी की बढ़े, बढ़ जायेगा मान।
भले कथ्य विपरीत हों इस पर किसका ध्यान।।

गलती भी दिख जाय तो देना नहीं सलाह।
उलझेंगे कुछ इस तरह रोके सृजन प्रवाह।।

सृजन-कर्म है साधना भाव हृदय के खास।
व्यथित सुमन यह देखकर जब होता उपहास।।

37 comments:

पी.सी.गोदियाल said...

हा-हा-हा, ये भी खूब रही !

वाणी गीत said...

गलती भी दिख जाय तो देना नहीं सलाह।
उलझेंगे कुछ इस तरह रोके सृजन प्रवाह...
सही बात कह दी ...!!

परमजीत सिँह बाली said...

टिप्पणी देने आ गए देखो फिर हम आज।
हमारी पोस्ट की आप भी रख लेना जी लाज।

बाटँन वाले को लगे, ज्यों मेंहदी को रंग,
ऐसी टिप्पणी कीजिए सारे रह जाए दंग।:)

रश्मि प्रभा... said...

टिप्पणी पाने के लिए टिप्पणी करना सीख।
बिन माँगे कुछ न मिले मिले माँगकर भीख।।
hahaha........sachchi

RajeevBharol said...

अब आप ही बताएं, टिप्पणी दें या न दें? :)

ये रचना सचमुच अच्छी लगी.
मैं टिप्पणी लेने के लिए नहीं कह रहा हूँ. सच्ची.

Sonal Rastogi said...

बहुत खूब सुमन जी
ये खेल तो काफी समय से देख रहे है, कभी इमानदार कमेंट्स देकर आलोचना का शिकार भी हुए वैसे safe है "NICE "

kshama said...

Ha,ha,ha! ab ispe kya comment kiya jaye? Waise mere jaisi ek adna-si wyakti,jo na kavi hai na lekhak,badi shashopanj me pad jati hai!

वन्दना said...

vaah vaah..........is hath de aur is hath le..........give and take.........achcha formula bataya hai.

Kusum Thakur said...

वाह सुमन जी .......

sangeeta swarup said...

गलती भी दिख जाय तो देना नहीं सलाह।
उलझेंगे कुछ इस तरह रोके सृजन प्रवाह।।

सृजन-कर्म है साधना भाव हृदय के खास।
व्यथित सुमन यह देखकर जब होता उपहास।

इस रचना में व्यंगात्मक शैली में लिखी आपकी संवेदना दिख रही है.....

टिप्पणी से मिलता है एक नया उत्साह
हर रचनाकार को होती इसकी चाह ....

राज भाटिय़ा said...

टिपण्णी से टीपण्णी मिले कर कर लंबे हाथ.
बहुत सुंदर लगी जनाब आप की यह कविता.
धन्यवाद

honesty project democracy said...

रोते हुए आते है सब ,हँसता हुआ जो जायेगा ,सार्थकता जो अपनाएगा ,ब्लॉग का सिकंदर वही कहलायेगा /

ललित शर्मा said...

सृजन-कर्म है साधना भाव हृदय के खास।
व्यथित सुमन यह देखकर जब होता उपहास।।

"नाईस"ही ठीक है रहिए नो टेंसन
काहे लंबी टीप के रहिएगा अटेंसन॥

संजय भास्कर said...

टिप्पणी पाने के लिए टिप्पणी करना सीख।

संजय भास्कर said...

बहुत खूब, लाजबाब !

Shastri JC Philip said...

प्रिय श्यामलाल जी, काव्य विधा में जिस तरह से आप ने विषय को प्रस्तुत किया है वह पढ कर आनंद आ गया!

प्रभु करे कि इस कविता को जम कर टिप्पणियां मिलें!

सस्नेह -- शास्त्री

हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है
http://www.IndianCoins.Org

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

कहता रचनाकार क्या, क्या इसके आयाम।
"नाईस", "उम्दा" कुछ लिखें चल जाता है काम।।

आपने एकदम सच लिखा है ... कई बार तो यह देखता हूँ कि कुछ लोग एक ही टिप्पणी को दस जगह कॉपी पेस्ट कर देते हैं ... बिलकुल वही शब्द, वही वाक्य आपको अलग अलग ब्लॉग पर अलग अलग पोस्ट में दिख जायेंगे ... कुछ ऐसे लोग भी हैं जो एक ही पोस्ट पर दो तीन बार टिप्पणी देते हैं ... सिर्फ इसलिए कि टिप्पणी की संख्या बढे ... और आप भी खुश होकर उनके पोस्ट पर टिप्पणी दें ... और टिप्पणी भी ऐसी कि पोस्ट से कोई लेने देना ही नहीं "बस आ गए हैं आपके ब्लॉग पर, मैंने दे दिया है, अभी आपकी बारी है" के तर्ज पर ...
वैसे सच तो ये है कि ये सारे हथकंडे काफी सफल हैं ...
जय टिप्पणी माता की ...

डॉ टी एस दराल said...

दोहे द्वारा हास्य --वाह सुमन जी क्या बात है !
बहुत बढ़िया ।

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

सुंदर दोहे।

Pratik Maheshwari said...

हा हा..
क्या ज़माना है.. टिपण्णी भी भीख में लेनी पद रही है !
(आशा करता हूँ कि इस टिप्पणी के बदले मुझे भी एक टिप्पणी मिल जाएगी :) )

संजय कुमार चौरसिया said...

sabhi blog bandhuon ke man ki baat kah di aapne

aapka aabhar

M VERMA said...

संख्या टिप्पणी की बढ़े, बढ़ जायेगा मान।
भले कथ्य विपरीत हों इस पर किसका ध्यान।।
===
बहुत खूब

guddo9@gmail.com said...

श्यामल जी
सदा सुखी रहो


ऑरकुट और मेल से मांगे सबकी राय
कुछ टिप्पणी मिल जायेंगे करते रहें उपाय
कैसे बंद करूँ हंसी क्या चुन चुन कर लिखा है

प्रवीण पाण्डेय said...

ब्लॉगजगत की व्यथा कथा । वाह बहुत अच्छा ।

Shekhar Kumawat said...

kya bat he achha topic liya aap ne gazal ke liye kabile tarif he

Rajni Nayyar Malhotra said...

गलती भी दिख जाय तो देना नहीं सलाह।
उलझेंगे कुछ इस तरह रोके सृजन प्रवाह।।

सृजन-कर्म है साधना भाव हृदय के खास।
व्यथित सुमन यह देखकर जब होता उपहास।

bilkul sahi likha sir, aajkal isi funde ko apnana chahiye blogger khush ho jayenge.....
plz mind mat karna bas yun hi kah rahi

मनोज कुमार said...

संख्या टिप्पणी की बढ़े, बढ़ जायेगा मान।
भले कथ्य विपरीत हों इस पर किसका ध्यान।।
ज़ोर का झटका धीरे से ...!

सतीश सक्सेना said...

सही सीख रहे हो भाई जी ! हार्दिक शुभकामनायें !

शिवम् मिश्रा said...

लो जी भाई जी हमने तो दे दी टिपण्णी अब आप की बारी !!
वैसे राय बढ़िया लगी,
"टिप्पणी पाने के लिए टिप्पणी करना सीख।
बिन माँगे कुछ न मिले मिले माँगकर भीख।।"

राजेन्द्र मीणा 'नटखट' said...

टिपण्णी का खेल अनूठा है.कुछ सच कुछ झूंठा है .....सारी बातें सही है
अब टिपण्णी का कर्जा चुकाने आ जाना :) :) : )

http://athaah.blogspot.com/

गुड्डोदादी said...

श्यामल जी

टिप्पणी ऐसी कुछ मिले मन का टूटे धीर
रोते रचनाकार वो होते जो गंभीर
टिप्पणी न हुई मानो इतिहास के पन्ने हो गये टिप्पणी मिलने के यही खेल हो रहे हैं
न मिले तो रोते है बेकल र्रात भर

Anonymous said...

nice

काजल कुमार Kajal Kumar said...

:)

Pushpendra said...

टिपण्णी से टीपण्णी मिले कर कर लंबे हाथ.
बहुत सुंदर लगी जनाब आप की यह कविता.
धन्यवाद

चन्द्र कुमार सोनी said...

bahut badhiya likha hain aapne.
thank.
WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey said...

पोस्ट जहाँ रचना हुई किया शुरू यह खेल।
जहाँ तहाँ हर पोस्ट पर कुछ तो टिप्पणी ठेल।।


वाह! बोल सियावर रामचन्द्र की जै! :)

मनोज कुमार said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
इसे 08.05.10 की चिट्ठा चर्चा (सुबह 06 बजे) में शामिल किया गया है।
http://chitthacharcha.blogspot.com/

हाल की कुछ रचनाओं को नीचे बॉक्स के लिंक को क्लिक कर पढ़ सकते हैं -
विश्व की महान कलाकृतियाँ- पुन: पधारें। नमस्कार!!!