प्रेम सदा जीवन सुमन जीने का आधार।
नैसर्गिक उस प्रेम का हरदम हो इजहार।।
मन मंथन नित जो करे पाता है सुख चैन।
सुमन मिले मनमीत से स्वतः बरसते नैन।।
भाव देखकर आँख में जगा सुमन एहसास।
अनजाने में ही सही वो पल होते खास।।
जीवन में कम ही मिले स्वाभाविक मुस्कान।
नया अर्थ मुस्कान का सोच सुमन नादान।।
प्रेम-ज्योति प्रियतम लिये देख सुमन बेहाल।
उस पर मीठे बोल तो सचमुच हुआ निहाल।।
प्रेम समर्पण इस कदर करे प्राण का दान।
प्रियतम के प्रति सर्वदा सुमन हृदय सम्मान।।
सुख दुख दोनों में रहे हृदय प्रेम का वास।
जब ऐसा होता सुमन प्रियतम होते खास।।
मान लिया अपना जिसे रहती उसकी याद।
यादों के उस मौन से सुमन करे संवाद।।
Monday, April 18, 2011
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5 comments:
प्रेम सदा जीवन सुमन जीने का आधार।
नैसर्गिक उस प्रेम का हरदम हो इजहार।।
बहुत अच्छी बात कही है. यह सभी को ध्यान रखने कि बात है. बहुत सुंदर भावना और सुंदर कविता.
DIL KO PYARI LAGNE WALI KAVITA. BAHUT KHUB.
DIL KO PYARI LAGNE WALI KAVITA. BAHUT KHUB.
बहुत खूबसूरत रचना ..सार्थक शिक्षा दे रही है यह रचना
bahut hi bhavnaon se bhari hui shaandaar rachanaa sumanji.dil ko choo gai .badhaai aapko.
happy friendship day.
"ब्लोगर्स मीट वीकली {३}" के मंच पर सभी ब्लोगर्स को जोड़ने के लिए एक प्रयास किया गया है /आप वहां आइये और अपने विचारों से हमें अवगत कराइये/हमारी कामना है कि आप हिंदी की सेवा यूं ही करते रहें। सोमवार ०८/०८/११ को
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