Saturday, July 23, 2011

खूबसूरत ये जहाँ

दिन कटे जब ठीक से तो है इनायत ये जहाँ
और गर्दिश के दिनों में बस क़यामत ये जहाँ

रंग चश्मे का है कैसा देखते हैं किस तरह
बात लेकिन सच यही कि है मुहब्बत ये जहाँ

रोटियाँ भी जब मयस्सर हो नहीं आवाम को
और रौनक कुछ घरों में तो अदावत ये जहाँ

रात दिन कुछ सरफिरे जो बाँटते हैं खौफ को
जब करोड़ों दिल अमन के
है सलामत ये जहाँ

है पता करना ये मुश्किल कौन अच्छे लोग हैं
चैन हो दिल में सुमन तो खूबसूरत ये जहाँ

10 comments:

Amrita Tanmay said...

Sach hi kaha hai...chain me hi khubsurti hai...bahut badhiya

प्रवीण पाण्डेय said...

सारी खूबसूरती चैन में है।

Kusum Thakur said...

"क्या यहाँ पे खूबसूरत कौन अच्छे लोग हैं
चैन हो दिल में सुमन तो खूबसूरत ये जहाँ"

वाह कितनी अच्छी बात कही है सुमन जी......

अमन और चैन की कमी लगे जहाँ में
है अच्छे लोग भी खूबसूरत जहाँ में

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

आपकी प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल उद्देश्य से दी जा रही है!

Dr Varsha Singh said...

रोटियाँ भी जब मयस्सर हो नहीं आवाम को
और रौनक कुछ घरों में तो अदावत ये जहाँ

रात दिन कुछ सरफिरे जो बाँटते हैं खौफ को
जब करोड़ों दिल अमन के है सलामत ये जहाँ


बेहद शानदार अशआर..... बहुत खूब कहा है आपने ...।

sushma 'आहुति' said...

बहुत ही सुंदर...

सुमन'मीत' said...

bahut khoob...

Sunil Kumar said...

रोटियाँ भी जब मयस्सर हो नहीं आवाम को
और रौनक कुछ घरों में तो अदावत ये जहाँ
बहुत अच्छे शेर, मुबारक हो

SAJAN.AAWARA said...

Sarthak post..........
Jai hind jai bharat

संगीता पुरी said...

क्या यहाँ पे खूबसूरत कौन अच्छे लोग हैं
चैन हो दिल में सुमन तो खूबसूरत ये जहाँ

बहुत खूब !!

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