Sunday, July 24, 2011

सर पे सवार क्यूँ है

कहना कठिन तुम्हीं पे मेरा एतबार क्यूँ है
अबतक न मिल सके तो ये इन्तजार क्यूँ है

जब उम्र आधी गुज़री क्या इश्क समझ पाया
बेचैन सोच करके दिल में बहार क्यूँ है

हर पल तुम्हारी यादें जागूँ भला या सोऊँ
आँखों में तेरी सूरत सपनों में प्यार क्यूँ है

इकरार-ए-मुहब्बत का तुमसे यकीन मुझको
जब इश्क है परस्पर इतना विचार क्यूँ है

अब देर भला कैसी इजहारे मुहब्बत में
दीवानगी सुमन के सर पे सवार क्यूँ है

10 comments:

संजय भास्कर said...

आदरणीय श्यामल सुमन जी
नमस्कार !
......बहुत उम्दा रचना है सर,
दिल की गहराईयों को छूने वाली बेहद खूबसूरत गज़ल

प्रवीण पाण्डेय said...

ये दीवानगी सवार रहे,
मन में जो आये, कहे।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आज 25- 07- 2011 को आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है .....


...आज के कुछ खास चिट्ठे ...आपकी नज़र .तेताला पर
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स्वाति said...

कहना कठिन तुम्हीं पे मेरा एतबार क्यूँ है
अबतक न मिल सके तो ये इन्तजार क्यूँ है
kya khoob....lajbab...

vidhya said...

बहुत ही सुन्दर

SAJAN.AAWARA said...

Behtreen gajal likhi hai sir ji apne............
Jai hind jai bharat

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

aaderniy shyamal ji..pahli baar aapke blog pe aana hua.accha laga..is shandar ghazal ke liye badhai...kabhi apne vyasttam kshdon se kuch pal nikalkar aaiyega mere blog pe ..apka swagat hai

Dorothy said...

सुंदर प्रस्तुति. आभार.
सादर,
डोरोथी.

sushma 'आहुति' said...

बहुत ही सुंदर ग़ज़ल...

Anonymous said...

हर पल तुम्हारी यादें जागूँ भला या सोऊँ

आँखों में तेरी सूरत सपनों में प्यार क्यूँ

AISA KYON

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