Saturday, July 30, 2011

शिकायत कैसी

मेरे महबूब को मुझसे है शिकायत कैसी
बात कह दो वही, बातों में किफायत कैसी

उतर जा दिल में मेरे, आँख के रस्ते आ जा
प्यार में छिपने छिपाने की रवायत कैसी

तेरे दीदार को दिन रात तरसता कोई
चुराया अक्स मिली खुशियाँ निहायत कैसी

बहुत कठिन है कसक दिल में छुपाये रखना
करो इकरार जुबां से है हिदायत कैसी

जुल्फ हटते ही सुमन खो गया रुखसारों में
हुस्न पे इश्क का मरना है इनायत कैसी

21 comments:

bhooli dastaan said...

बहुत कठिन है कसक दिल में छुपाये रखना
करो इकरार जुबां से है हिदायत कैसी




कैसे खोलूँ उस पल्लू की गाँठ को

मेरे जीवन की दास्तान बंधी हुई हैं

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत कठिन है कसक दिल में छुपाये रखना
करो इकरार जुबां से है हिदायत कैसी

बहुत खूबसूरत गज़ल ..

निवेदिता said...

निहायत उम्दा गज़ल ......

SAJAN.AAWARA said...

उतर जा दिल में मेरे, आँख के रस्ते आ जा
प्यार में छुपने छुपाने की रवायत कैसी

KHUBSURAT GAJAL...

JAI HIND JAI BHARAT

प्रवीण पाण्डेय said...

कसक सेभरी पंक्तियाँ।

Shah Nawaz said...

Bahut hi behtreen Gazal...

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

nice...

आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 01-08-2011 को चर्चामंच http://charchamanch.blogspot.com/ पर सोमवासरीय चर्चा में भी होगी। सूचनार्थ

sushma 'आहुति' said...

सच में शिकायत कैसी हो सकती है इतनी खुबसूरत ग़ज़ल पढने के बाद....

S.M.HABIB said...

बहुत ही उम्दा ग़ज़ल....
सादर...

vidhya said...

nice...

सुमन'मीत' said...

khubsurat si gazal...

manoj said...

wah bahut khubsurat gajal hai..

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

बहुत ही बढ़िया सर।
---------------
कल 08/08/2011 को आपकी एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

Kailash C Sharma said...

बहुत सुंदर॥

๑♥!!अक्षय-मन!!♥๑, said...

waah sir j padh kar maja aa gayaa sare sher lajaw poori ghazal lajawab

कई जिस्म और एक आह!!!

BHOOLI DASTAAN said...

तेरे दीदार को दिन रात तरसता कोई
चुराया अक्स मिली खुशियाँ निहायत कैसी

TERE PYAR KAA AASRA
TADAFTA HAI DIN RAT
TOO KHUD HEE SAMJH
MERE MN KEE BAAT

गुड्डोदादी said...

shyamal jee
chirnjeev bhavah

बहुत कठिन है कसक दिल में छुपाये रखना
करो इकरार जुबां से है हिदायत कैसी


bahoot sunder gjl kahen yaa kavita shbdon kaa mel ekdam steek

Domain registration india said...

Really heart touching lines and truly i love this write up. Thanks a lot for sharing.

सिद्धार्थ said...

जब चलेँ जाते है वो मेरे गाँव से,
धुप लगती है हमको घने छाँव से ।

निहायत उम्दा गजल, दिल को छु गई, या योँ कहे कि दिल मेँ समा गई।

Anonymous said...

बहुत ही खूबसूरती से प्रेम विरह की गजल


तेरी खुशबू को जोर से पुकरा
याद है मुझे उस लम्हें की कयामत

Anonymous said...

कितने अजीब थे वो मस्ती भरे दिन...
सपने थे आँखों में नये रोज़ दिन...
बातों में हर पल थी शहद सी मिठास..
हमे दूरियों का ना था एहसास...
खेले थे हम हैर पल जिन खिलौने से...
उन खिलौने से फिर खेलने को दिल चाहता है...
आज फिर से रोने को दिल चाहता है...

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