रंगीन दिखती जो जिन्दगी, अनुभूतियाँ कुछ ख़ास है
खुशियों के भीतर झांककर, देखा जो मन को उदास है
चेहरे पे दिखते असल नहीं, अब असलियत दिखती कहाँ
बनी जिन्दगी जो मरीचिका, जहाँ प्यास में भी प्यास है
जिसको जहाँ में पूछ लो, कहते कि दुःख में है जिन्दगी
यूँ बात करके भी जी रहे, क्योंकि जिन्दगी से ही आस है
मजबूरियों से जूझकर, जीते हैं जो भी जिन्दगी
मिहनत की हर बूँदें कहे, इस जिन्दगी में सुवास है
जब जिन्दगी बस प्यार है, और प्यार इक दीवानगी
दीवानगी यूँ बनी रहे, वो मन सुमन के पास है
Tuesday, December 6, 2011
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रचना में विस्तार
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अन्ध-भक्ति है रोग
छुआछूत से कब हुआ, देश अपन ये मुक्त? जाति - भेद पहले बहुत, अब VIP युक्त।। धर्म सदा कर्तव्य ह...
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गन्दा फिर तालाब
क्या लेखन व्यापार है, भला रहे क्यों चीख? रोग छपासी इस कदर, गिरकर माँगे भीख।। झट से झु...
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मगर बेचना मत खुद्दारी
यूँ तो सबको है दुश्वारी एक तरफ मगर बेचना मत खुद्दारी एक तरफ जाति - धरम में बाँट रहे जो लोगों को वो करते सचमुच गद्दारी एक तरफ अक्सर लो...
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लेकिन बात कहाँ कम करते
मैं - मैं पहले अब हम करते लेकिन बात कहाँ कम करते गंगा - गंगा पहले अब तो गंगा, यमुना, जमजम करते विफल परीक्षा या दुर्घटना किसने देखा वो...
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18 comments:
आपकी यह दीवानगी निश्चय ही बरकरार रहेगी।
जिसको जहाँ में पूछ लो, कहते की दुःख में है जिन्दगी
यूँ बात करके भी जी रहे, चूँकि जिन्दगी से आस है
सुंदर आस झलकाती..अच्छी कविता ...!!
चेहरे पे दिखते असल नहीं, अब असलियत दिखती कहाँ
बनी जिन्दगी जो मरीचिका, जहाँ प्यास में भी प्यास है
सुन्दर रचना ..
श्यामल
आशीर्वाद
चेहरे पे दिखते असल नहीं, अब असलियत दिखती कहाँ
बनी जिन्दगी जो मरीचिका, जहाँ प्यास में भी प्यास है
बहुत जी कर लिक्खी यह कविता भी कुछ खास है
बहे अश्रु नमकीन पर भावनाओं में मिठास है
खुशियों के भीतर झांककर, देखा जो मन को उदास है
उदासी तेरे चहरे पे गवारा भी नहीं लेकिन,
तेरी खातिर सितारे तोड़ कर लाना मुश्किल
मजबूरियों से जूझकर, जीते हैं जो भी जिन्दगी
मिहनत की हर बूँदें कहे, इस जिन्दगी में सुवास है
जब जिन्दगी बस प्यार है, और प्यार इक दीवानगी
दीवानगी यूँ बनी रहे, वो मन सुमन के पास है
Wah!
achchi gajal hai
jindgi se aas hona hee chahiye,, sukh dukh to do pahloo hain..sunder rachna..sadar badhayee aaur amantran ke sath..
आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल आज 08 -12 - 2011 को यहाँ भी है
...नयी पुरानी हलचल में आज... अजब पागल सी लडकी है .
मारीचिका का बहुत सही बिम्ब बहुत अच्छा लगा |
बधाई
आशा
बहुत सुन्दर प्रविष्टि...बधाई
चेहरे पे दिखते असल नहीं, अब असलियत दिखती कहाँ
बनी जिन्दगी जो मरीचिका, जहाँ प्यास में भी प्यास है
waah
जिसको जहाँ में पूछ लो, कहते कि दुःख में है जिन्दगी
यूँ बात करके भी जी रहे, क्योंकि जिन्दगी से ही आस है
मजबूरियों से जूझकर, जीते हैं जो भी जिन्दगी
मिहनत की हर बूँदें कहे, इस जिन्दगी में सुवास है
...jiwan ki sachai uker dee aapne rachna mein... aabhar!
बहुत बहुत सुन्दर भाई जी...सदा की तरह....प्रेरक, चिंतन को खुराक देती रचना...
सुन्दर!
जब जिन्दगी बस प्यार है, और प्यार इक दीवानगी
बहुत उत्तम
तीर बिछाए नजरों ने जुल्फों के घने साये में
सजनवा अब तो तेरे बिना रहा ना जाये रे
Very very Nice post our team like it thanks for sharing
बहुत बहुत सुन्दर ....
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