सच यही कि हर किसी को सच दिखाता आईना
ये भी सच कि सच किसी को कह न पाता आईना
रू-ब-रू हो आईने से बात पूछे गर कोई
कौन सुन पाता इसे बस बुदबुदाता आईना
जाने अनजाने बुराई आ ही जाती सोच में
आँख तब मिलते तो सचमुच मुँह चिढ़ाता आईना
कौन ऐसा आजकल जो अपने भीतर झाँक ले
आईना कमजोर हो तो छटपटाता आईना
आईना बनकर सुमन तू आईने को देख ले
सच अगर न कह सका तो टूट जाता आईना
Saturday, December 24, 2011
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16 comments:
बेहतरीन ग़ज़ल....
श्यामल
आशीर्वाद
बहुत गहराई और छटपटात
झाँकता हो अपने भीतर कौन ऐसा आजकल
आईना कमजोर हो तो छटपटाता आईना
विहल प्रेमी के अश्रु देख मुस्कराता आईना
बल्ब के अंदर का लोगो न जले तो क्या करे आईना
मन का मीत ना मिले तो चकना चूर होता आईना
Waah! Behtreen Gazal...
झाँकता हो अपने भीतर कौन ऐसा आजकल
आईना कमजोर हो तो छटपटाता आईना,,behtarin ghazal..sadar badhayee aur amantran
ke sath
मन धधकते हों अगर अंगार जीवन के
नहीं कुछ भी व्यक्त करता, शान्त रहता आईना,
आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल सोमवारीय चर्चामंच http://charchamanch.blogspot.com/ पर भी होगी। सूचनार्थ
कल 27/12/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!
रू-ब-रू हो आईने से बात पूछे गर कोई
सुन नहीं पाता कोई और बुदबुदाता आईना
अलग ही अंदाज की उम्दा ग़ज़ल है भईया...
सादर बधाई...
बहुत सुंदर रचना,...अच्छी प्रस्तुती,
क्रिसमस की बहुत२ शुभकामनाए.....
मेरे पोस्ट के लिए--"काव्यान्जलि"--बेटी और पेड़-- मे click करे
आईना बनकर सुमन तू आईने को देख ले
सच अगर न कह सका तो टूट जाता आईना
सुन्दर रचना .सच कहा है झूठ नहीं बोलते आईने .दर्पण झूठ न बोले .
Bahut sundar
www.poeticprakash.com
सारे शेर लाजवाब हैं...
"झाँकता हो अपने भीतर कौन ऐसा आजकल
आईना कमजोर हो तो छटपटाता आईना"
शायद इसीलिए लोग ज्यादा देर तक अपने ही आईने (अक्स) से आँखें मिलाने से कतराते हैं...
"बहुत खूबसूरत हैं आँखें तुम्हारी....
कभी खुद से भी तो
नज़र मिला लिया करो यारों..."
बहुत सुन्दर !!
MIRROR CRACKING !
उम्दा रचना ।
इसे पढने के बाद गुलजार साहब की रचना याद आती है कि -
आओ पहन ले सभी आइने ,
सभी देखेँगे अपना ही चेहरा ,
सबको सब हंसी लगेँगे ,
रूह भी अपनी , किसने देखी है ।.
बहुत ही खूबसूरत तरीके इस मुश्किल रदीफ़ को निभाया है आपने!
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