Saturday, December 24, 2011

छटपटाता आईना

सच यही कि हर किसी को सच दिखाता आईना
ये भी सच कि सच किसी को कह न पाता आईना

रू-ब-रू हो आईने से बात पूछे गर कोई
कौन सुन पाता इसे बस बुदबुदाता आईना

जाने अनजाने बुराई आ ही जाती सोच में
आँख तब मिलते तो सचमुच मुँह चिढ़ाता आईना

कौन ऐसा आजकल जो अपने भीतर झाँक ले
आईना कमजोर हो तो छटपटाता आईना

आईना बनकर सुमन तू आईने को देख ले
सच अगर न कह सका तो टूट जाता आईना

18 comments:

sushma 'आहुति' said...

बेहतरीन ग़ज़ल....

गुड्डोदादी said...

श्यामल
आशीर्वाद
बहुत गहराई और छटपटात
झाँकता हो अपने भीतर कौन ऐसा आजकल
आईना कमजोर हो तो छटपटाता आईना



विहल प्रेमी के अश्रु देख मुस्कराता आईना

लीला झा said...

बल्ब के अंदर का लोगो न जले तो क्या करे आईना
मन का मीत ना मिले तो चकना चूर होता आईना

Shah Nawaz said...

Waah! Behtreen Gazal...

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

झाँकता हो अपने भीतर कौन ऐसा आजकल
आईना कमजोर हो तो छटपटाता आईना,,behtarin ghazal..sadar badhayee aur amantran
ke sath

प्रवीण पाण्डेय said...

मन धधकते हों अगर अंगार जीवन के
नहीं कुछ भी व्यक्त करता, शान्त रहता आईना,

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल सोमवारीय चर्चामंच http://charchamanch.blogspot.com/ पर भी होगी। सूचनार्थ

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

कल 27/12/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

रू-ब-रू हो आईने से बात पूछे गर कोई
सुन नहीं पाता कोई और बुदबुदाता आईना

अलग ही अंदाज की उम्दा ग़ज़ल है भईया...
सादर बधाई...

dheerendra said...

बहुत सुंदर रचना,...अच्छी प्रस्तुती,
क्रिसमस की बहुत२ शुभकामनाए.....

मेरे पोस्ट के लिए--"काव्यान्जलि"--बेटी और पेड़-- मे click करे

veerubhai said...

आईना बनकर सुमन तू आईने को देख ले
सच अगर न कह सका तो टूट जाता आईना
सुन्दर रचना .सच कहा है झूठ नहीं बोलते आईने .दर्पण झूठ न बोले .

Prakash Jain said...

Bahut sundar


www.poeticprakash.com

***Punam*** said...

सारे शेर लाजवाब हैं...

"झाँकता हो अपने भीतर कौन ऐसा आजकल
आईना कमजोर हो तो छटपटाता आईना"

शायद इसीलिए लोग ज्यादा देर तक अपने ही आईने (अक्स) से आँखें मिलाने से कतराते हैं...

"बहुत खूबसूरत हैं आँखें तुम्हारी....
कभी खुद से भी तो
नज़र मिला लिया करो यारों..."

Dr.Nidhi Tandon said...

बहुत सुन्दर !!

सिद्धार्थ सारथी said...

MIRROR CRACKING !
उम्दा रचना ।
इसे पढने के बाद गुलजार साहब की रचना याद आती है कि -
आओ पहन ले सभी आइने ,
सभी देखेँगे अपना ही चेहरा ,
सबको सब हंसी लगेँगे ,
रूह भी अपनी , किसने देखी है ।.

'साहिल' said...

बहुत ही खूबसूरत तरीके इस मुश्किल रदीफ़ को निभाया है आपने!

aditya kumar said...

sb rango se ru b ru jindgi dikhati ye aaenaa
awesome bahut badhiya

aditya kumar said...

jindgi se ru b ru har rang dikhati aaena
awesome creativity

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