है कुदाल सी नीयत प्रायः, बदल रहा परिवेश।
कैसे बचेगा भारत देश?
बड़े हुए लिख, पढ़ते, सुनते, यह धरती है पावन।
जहां पे कचड़े चुन चुन करके, चलता लाखों जीवन।
दिल्ली में नित होली दिवाली, नहीं गाँव का क्लेश।
कैसे बचेगा भारत देश?
है रक्षक से डर ऐसा कि, जन जन चौंक रहे हैं।
बहस कहाँ संसद में होती, लगता भौंक रहे हैं।
लोकतंत्र के इस मंदिर से, यह कैसा सन्देश?
कैसे बचेगा भारत देश?
बूढा एक तपस्वी आकर, बहुत दिनों पर बोला।
सत्ता-दल संग सभी विपक्षी, का सिंहासन डोला।
है गरीब भारत फिर कैसे, पैसा गया विदेश?
कैसे बचेगा भारत देश?
सजग सुमन हों अगर चमन के, होगा तभी निदान।
भाई भी हो भ्रष्ट अगर तो, क्यों उसका सम्मान?
आजादी के नव-विहान का, निकले तभी दिनेश।
ऐसे बचेगा भारत देश।।
Monday, December 26, 2011
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8 comments:
gahan ..soch deti hui sarthak rachna ...!!badhai ..
आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 28-12-2011 को चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ
श्यामल
आशीवाद
लोकतंत्र के इस मंदिर से, यह कैसा सन्देश?
कैसे बचेगा भारत देश?
जहां पे कचड़े चुन चुन करके, चलता लाखों जीवन।
जन और देश की व्यथा है नहीं घटने वाला कलेश
श्यामल
आशीर्वाद
है कुदाल सी नीयत प्रायः, बदल रहा परिवेश।
कैसे बचेगा भारत देश?
कुदाल ही जड़ लोभ लालच की खुरपी बन जाते तो बच जाता घर परिवार और देश देश
है रक्षक से डर ऐसा कि, जन जन चौंक रहे हैं।
बहस कहाँ संसद में होती, लगता भौंक रहे हैं ..
सच कहा है सुमन जी ... हालात लगातार गिर रहे हैं देश की और ऐसे में आपकी चिंता वाजिब है ...
चिंता स्वाभाविक ही है. बढ़िया रचना.
चिँतनीय विषय । खैर कुछ आशा के किरण नजर आ रहे है । आप अपनी ही कविता पर नज़र डाल कर तस्सली दे सकते है खुद को कि , अब तिहार मेँ कितने मंत्री , बतियाते आपस मेँ संतरी ।
जाने और न कितने आये , क्या तिहार संसद बन जाये ?
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एक और ऊम्दा रचना ।
▬● अच्छा लगा आपकी पोस्ट को देखकर... साथ ही यह ब्लॉग देखकर भी अच्छा लगा... काफी मेहनत है इसमें...
नव वर्ष की पूर्व संध्या पर आपके लिए सपरिवार शुभकामनायें...
मेरे ब्लॉग्स की तरफ भी आयें तो मुझे बेहद खुशी होगी...
[1] Gaane Anjaane | A Music Library (Bhoole Din, Bisri Yaaden..)
[2] Meri Lekhani, Mere Vichar..
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